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कैराना से हिंदुओं के पलायन करने का दावा करने वाले BJP MP हुकुम सिंह आपातकाल और राम मंदिर आंदोलन के वक्त थे कांग्रेसी

कैराना मामले से पहले उनका नाम 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों में भी आया था। उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया था।

भाजपा नेता उमा भारती और विधायक संगीत सोम के साथ भाजपा सांसद हुकुम सिंह। (Photo Source: Indian Express Archive/Vishal Srivastav)

यूपी के शामली जिले के कैराना कस्बे से हिंदुओं के पलायन करने का दावा करने वाले हुकुम सिंह का बैकग्राउंड आरएसएस या भाजपा का नहीं बल्कि वे कांग्रेसी नेता भी रहे हैं। सेना में कैप्टन पद से रिटायर होने वाले सिंह ने 1961 में हुआ भारत-चीन युद्ध भी लड़ा था। सिंह ने हाल ही में दावा किया है कि एक समुदाय विशेष की दहशत और डर की वजह से कैराना से हिंदू परिवार पलायन कर रहे हैं। सिंह के इस दावे के बाद यूपी की सियासत गरमा गई। उनके दावे के बाद लोग उन्हें आरएसएस बैकग्राउंड का नेता समझ रहे थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। वे भाजपा के अलावा अन्य पार्टियों के साथ भी जुड़े रहे हैं।

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गूर्जर जाति से ताल्लुक रखने वाले सिंह 1996 में भाजपा के साथ जुड़े थे। सिंह ने बाबरी मस्जिद विवाद से पहले 1989 और 1991 और उसके बाद 1993 में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा था। वे राम मंदिर आंदोलन के वक्त भी कांग्रेस के नेता रहे थे। उन्होंने साल 1974 में विधायक बनकर राजनीति में एंट्री मारी। आपातकाल के वक्त भी वे कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़े रहे। इसके बाद वे चौधरी चरण सिंह की पार्टी के साथ भी चले गए थे, लेकिन 1985 में फिर कांग्रेस विधायक तौर पर विधानसभा पहुंच गए। उन्हें वीरबहादुर सिंह की सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा किया गया। वीर बहादुर की जगह एनडी तिवारी के लेने के बाद उन्हें कैबिनेट रैंक दी गई। वे कुछ समय के लिए मुलायम सिंह के साथ भी जुड़े रहे।

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सिंह भाजपा में 1996 में शामिल हुए थे, उसके बाद वे भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उसके बाद से वे लगातार पार्टी के साथ ही जुड़े रहे। राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। बताया जाता है कि वे दोनों की मुख्यमंत्रियों के खास थे।

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कैराना मामले से पहले उनका नाम 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों में भी आया था। उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया था। सिंह ने इस बार पहली बार संसद पहुंचे है। वे सात बार विधायक रह चुके हैं।

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