रोजगार, तकनीक और चुनौतियां

वर्ष 2025 तक कृत्रिम मेधा, रोबोट तकनीक और डेटा विज्ञान जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों में कुशल प्रतिभाओं की मांग पंद्रह से बीस गुना अधिक हो सकती है।

सांकेतिक फोटो।

जयंतीलाल भंडारी

वर्ष 2025 तक कृत्रिम मेधा, रोबोट तकनीक और डेटा विज्ञान जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों में कुशल प्रतिभाओं की मांग पंद्रह से बीस गुना अधिक हो सकती है। इसमें कोई दो मत नहीं कि डिजिटल प्रतिभाओं की दुनिया में भारत के समक्ष चुनौतियों के बीच संभावनाएं भी काफी हैं। भारत इस क्षेत्र में भारी निवेश करे तो डिजिटल प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बन सकता है।

इन दिनों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल क्षेत्र में काम करने वालों की मांग तेजी से बढ़ी है। कहा जा रहा है कि कोविड-19 के बाद उद्योग-कारोबार अप्रत्याशित रूप से डिजिटल क्षेत्र के दक्ष लोगों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। इस बारे में आई रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि यदि डिजिटल-प्रतिभाओं की कमी जल्द ही दूर नहीं की गई तो इस दशक में दुनिया की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अरबों डालर की बढ़ोतरी से चूक जाएंगी।

इस समय दुनियाभर में नए दौर के उन्नत डिजिटल कौशल की कितनी मांग बढ़ रही है, इसका अनुमान वैश्विक रोजगार पर आई मैकेंजी की गई रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि डिजिटल तकनीक के युग में अगले एक दशक में दुनियाभर में करीब दस करोड़ लोगों को अपना रोजगार बदलना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, फ्रांस, भारत, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका में हर सोलह में से एक कर्मचारी को इस बदलाव से गुजरना पड़ेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआइ) और उच्च डिजिटल कौशल आधारित रोजगारों की मांग बढ़ेगी और परंपरागत रोजगारों की उपलब्धता में कमी आएगी।

वैश्विक रोजगार के बदलते हुए परिदृश्य के परिप्रेक्ष्य में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर में उद्योगों में मशीनी मानव यानी रोबोट की भूमिका तेजी से बढ़ी है। पिछले डेढ़-दो साल में तो इसमें अप्रत्याशित तेजी आई है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक भारत, अमेरिका, चीन जैसे छब्बीस देशों में आठ करोड़ से ज्यादा नौकरियां जा सकती हैं। लेकिन इसी मशीनी मानव के चलते 2025 तक करीब दस करोड़ डिजिटल नौकरियों के नए अवसर भी बनेंगे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एआइ और कोरोना के कारण काम करने का तरीका काफी बदल गया है। अब नौकरी के लिए खुद को नए सिरे से बाजार के अनुरूप कौशल युक्त बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई ऐसे नए क्षेत्रों का उदय होने वाला है जिनके लिए अलग-अलग उच्च कौशल वाले लोगों की जरूरत होगी। कंपनियां डिजिटल पर ज्यादा जोर देंगी। आॅफिस से काम करने का चलन कम होगा। इन नई जरूरतों के हिसाब से खुद को ढाल लिए जाने पर छंटनी की संभावना को कम किया जा सकेगा और साथ ही नए अवसर भी बनेंगे।

स्थिति यह है कि डिजिटल-प्रतिभा संबंधी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए देश और दुनिया के उद्योग-कारोबार बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इसके तहत नई भर्तियां, आॅनलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल संबंधी कार्यक्रमों में वृद्धि, कार्यरत लोगों को प्रशिक्षण के लिए नई-प्रतिभाओं की तैनाती और कर्मचारियों को एक समग्र रोजगार अनुभव प्रदान करने जैसे कई तरीके शामिल हैं। स्थिति यह भी है कि कुछ समय पहले तक प्रतिभाओं के लिए दरवाजे बंद करने वाले ब्रिटेन, अमेरिका और आस्ट्रेलिया जैसे कई देश अब उच्च-कौशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियां बना रहे हैं। इसके तहत जोखिमयुक्त रोजगार के लिए फास्ट-ट्रैकिंग वीजा और अत्यधिक कुशल आवेदकों के लिए वीजा को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं।

निसंदेह कोविड-19 के बीच अब देश और दुनिया में परंपरागत रोजगारों के जाने के खतरे बढ़ गए हैं और इसकी जगह डिजिटल रोजगार जैसे नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 तक कृत्रिम मेधा, रोबोट तकनीक और डेटा विज्ञान जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों में कुशल प्रतिभाओं की मांग पंद्रह से बीस गुना अधिक हो सकती है। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि डिजिटल प्रतिभाओं की दुनिया में भारत के समक्ष चुनौतियों के बीच संभावनाएं भी काफी हैं। भारत डिजिटल कौशल विकास क्षेत्र में उपयुक्त निवेश करे तो डिजिटल प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बन सकता है। साथ ही इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हो सकती है। डब्ल्यूईएफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कौशल विकास में निवेश वर्ष 2030 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में साढ़े छह खरब अमेरिकी डालर और भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच सौ सत्तर अरब अमेरिकी डालर की वृद्धि कर सकता है।

दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को संभालने में भारत की कौशल प्रशिक्षित नई पीढ़ी प्रभावी भूमिका निभा रही है। घर से काम (डब्ल्यूएफएच) करने की नई संस्कृति को व्यापक तौर पर स्वीकार्यता मिली है। कोरोना की चुनौतियों के बीच भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) क्षेत्र द्वारा समय पर दी गई गुणवत्तापूर्ण सेवाओं से वैश्विक उद्योग-कारोबार इकाइयों का भारत की आइटी कंपनियों पर भरोसा बढ़ा है। न केवल अमेरिका में बल्कि जापान, ब्रिटेन और जर्मनी सहित दुनिया के विभिन्न देशों में औद्योगिक और कारोबारी आवश्यकताओं में तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की वजह से आइटी के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में मसलन स्वास्थ्य देखभाल, नर्सिंग, बिजली, इलेक्ट्रानिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, जहाज निर्माण, विमानन, कृषि, अनुसंधान, विकास, सेवा व वित्त आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षित भारतीय कार्यबल की भारी मांग बनी हुई है।

रोजगार की बदलती हुई इस डिजिटल दुनिया में भारत उपयुक्त रणनीतिक कदमों से भरपूर लाभ उठा सकता है। इस डिजिटल युग में दुनिया में अपना वर्चस्व जमाने के लिए भारत को प्रतिभा-विकास की पारंपरिक सोच बदलनी होगी। परंपरागत नौकरियों में कमी आने और डिजिटल रोजगार के मौकों के तेजी से बढ़ने के मद्देनजर नई पीढ़ी को डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करते समय कुछ महत्त्वपूर्ण बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।

नई शिक्षा नीति में डिजिटल दुनिया के कौशल विकास से संबंधित अत्याधुनिक एवं वैश्विक मानक सुनिश्चित किए गए हैं। साथ ही भारत में एआइ को नई शिक्षा प्रणाली के साथ इस तरह जोड़ा गया है कि बड़ी संख्या में कुशल पेशेवर तैयार किए जा सकें। हमें छोटे शहरों में डिजिटल-क्षमताओं के निर्माण की ओर ध्यान देना होगा। युवा पेशेवर महिलाओं को उन्नत कार्य मानदंडों के साथ श्रम-बल में शामिल करना होगा। उच्च और मिले-जुले कार्य मानदंडों के साथ अधिकाधिक महिलाओं को नई धारा में शामिल किया जाना होगा। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं पॉलिटेक्निक संस्थाओं में व्यावसायिक शिक्षा में सुधार करने के साथ कौशल दक्षता को प्रोत्साहित करना होगा। इसके अलावा छोटे शहरों में भी डिजिटल क्षमताओं का निर्माण करना होगा।

इसके साथ ही देश के डिजिटल क्षेत्र को यह रणनीति भी बनाना होगी कि किस तरह के काम दूर स्थानों से किए जा सकते हैं और कौनसे काम कार्यालय में आकर किए जा सकते हैं। अब देश के डिजिटल रोजगार अवसरों को महानगरों की सीमाओं के बाहर छोटे शहरों और कस्बों में गहराई तक ले जाने की जरूरत को ध्यान में रखा जाना होगा। अब भारत के नवाचारी उद्योगों के संस्थापकों को आइटी से संबंधित वैश्विक स्तर के उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा, जिससे तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की जगह बनाई जा सकेगी। विकास और नवाचार को गति देने के लिए भारत को न सिर्फ कौशल-विकास में लगातार निवेश करना होगा, बल्कि देश में उन्नत कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली कार्य संस्कृति भी विकसित करना होगी। तभी देश डिजिटल प्रतिभाओं की नई दुनिया में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

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