ताज़ा खबर
 

राजनीति: सरकार में पेशेवरों की भूमिका

हालांकि सरकारी तंत्र में निजी क्षेत्र के पेशेवरों और विशेषज्ञों की नियुक्तियां लाभप्रद दिखाई दे रही हैं, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी। इनमें से प्रमुख चुनौती नियुक्त विशेषज्ञों की गुणवत्ता संबंधी है। दूसरी चुनौती यह है कि विशेषज्ञों और आम नौकरशाहों के बीच तनाव अनिवार्य है। बाहरी पेशेवरों के लिए प्रशासनिक सेवा के नौकरशाहों के साथ मिल कर काम करना आसान नहीं है।

लोकसभा ( फोटो सोर्स AP)

जयंतीलाल भंडारी

सरकार नौकरशाही के स्वरूप में बदलाव की डगर पर बढ़ रही है। हाल में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले निजी क्षेत्र के अधिकारियों को उपसचिव और निदेशक स्तर के पदों पर भर्ती करने के औपचारिक प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। सरकारी निर्णय प्रक्रिया में ये पद काफी महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। शुरू में ऐसे कुल चालीस अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है। ये नियुक्तियां नीति आयोग करेगा। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह जरूरी है कि विशेषज्ञों को सीधे उच्च पदों पर निश्चित अवधि के अनुबंध पर व्यवस्था में शामिल किया जाए।

इसी प्रकार कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी कहा है कि सरकार कंपनियों में निजी क्षेत्र के पेशेवरों को स्वतंत्र निदेशक बनने के लिए आॅनलाइन परीक्षा कराने की तैयारी कर रही है। इससे कंपनी कानून, नीतिशास्त्र और पूंजी बाजार की जानकारी रखने वाले ही कंपनी में स्वतंत्र निदेशक बन पाएंगे। आइएलएंडएफएस जैसे घोटालों पर गौर करते हुए सरकार कंपनियों में सुशासन को लागू करने और गड़बड़ियां रोकने के लिए यह कदम उठाने जा रही है। सरकार का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों की तुलना में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में निजी क्षेत्र के पेशेवरों का प्रयोग पर्याप्त रूप में सफल दिखाई दिया है।

यह महत्त्वपूर्ण है कि निजी क्षेत्र के पेशेवरों को सरकारी क्षेत्र में लेने के अभियान का उद्देश्य विभिन्न असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवरों को उनकी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से प्रशासन व देश के विकास में योगदान देने का अवसर सुनिश्चित करना है। इसी वर्ष लोकसभा चुनाव के पहले संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के द्वारा चयनित नौ विभिन्न असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवर विशेषज्ञों को केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर नियुक्ति दी गई है। सरकारी तंत्र में शुरू हुए निजी क्षेत्र के पेशेवरों के उपयोग के इस अभियान के तहत अपनी सेवाएं देने के लिए देश और विदेश में रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों ने आवेदन किए थे। इनमें सॉफ्टवेयर डवलपर, डाटा साइंटिस्ट, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, डिजिटल कंटेंट स्क्रिप्ट राइटर, एडवर्टाइजिंग पेशेवर, अकादमिक विशेषज्ञ, सोशल मीडिया विशेषज्ञ और ऐप डवलपर थे। आवेदकों में अमेरिका के कोलंबिया, कॉर्नेल और येल जैसे विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, एप्पल, गूगल, फेसबुक सहित अन्य प्रमुख वैश्विक कंपनियों में काम करने वाले पेशेवर और वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

देश में पहली बार निजी क्षेत्र से पेशेवर योग्यताओं के चलते नियुक्ति पाने वाले संयुक्त सचिवों को नागर विमानन, कृषि, वित्त, नौवहन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है। अभी इन पदों पर आइएएस अधिकारी करीब पच्चीस साल की सेवा के बाद पहुंच पाते हैं। संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति का कार्यकाल तीन साल का होगा और अच्छा प्रदर्शन होने पर इसे पांच साल तक किया जा सकेगा। इन पदों पर आवेदन के लिए न्यूनतम उम्र चालीस साल रखी गई थी। वेतन और अन्य सुविधाएं केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव के समान हैं।

देश में नौकरशाही में इस तरह कती नियुक्तियों का पहला प्रस्ताव 2005 में आया था। प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट में इसकी अनुशंसा की गई थी। तब इसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद सन 2010 में प्रशासनिक सुधार अयोग की दूसरी रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने इस पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। जुलाई, 2017 में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश जारी किया था। तब कहा गया था कि नौकरशाही में बाद में शामिल होने वाली इस तरह की पेशेवर प्रतिभाओं के माध्यम से मध्यम स्तर के अधिकारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा। इसमें कहा गया था कि इनके चयन के लिए सिर्फ साक्षात्कार होगा और कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में कमेटी इनका इंटरव्यू लेगी। सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में पंद्रह साल काम का अनुभव रखने वाले इन पदों के लिए आवेदन दे सकते हैं।

यह महत्त्वपूर्ण है कि निजी क्षेत्र के पेशेवरों को सरकारी क्षेत्र में लेने के इस नए अभियान का उद्देश्य विभिन्न असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवरों को उनकी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से प्रशासन व देश के विकास में योगदान देने का मौका सुनिश्चित करना है। निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को विशिष्ट वेतन भत्तों के साथ नौकरशाही में सीधे शामिल करने को विभिन्न सरकारों के उन प्रयासों की निरंतरता के साथ देखा जा सकता है जिसके तहत सरकारें शासन में बाहर से विशेषज्ञता लाना चाहती थीं। अब निश्चित रूप से अनुभवी कुशल पेशेवर प्रशासन का सक्रिय भाग बन कर देश के विकास को गति दे सकते हैं। पहले भी विभिन्न प्रधानमंत्रियों के द्वारा कुछ-कुछ प्रतिभाओं और पेशेवरों को सरकार के कार्यों में सहयोग के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में नंदन नीलेकणि को लाया गया था और उन्हें आधार कार्ड पर काम करने के लिए अधिकार दिए गए। इंदिरा गांधी भी नियमित रूप से कारोबारी जगत की प्रतिभाओं को बेहतर उपयोग में लाती रही थीं। दूरसंचार में क्रांति के लिए राजीव गांधी सैम पित्रोदा को लाए थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने आरवी शाही को बिजली सचिव की महत्त्वपूर्ण भूमिका दी थी, जिसके बेहतर नतीजे देखने को मिल रहे हैं। वीपी सिंह ने अरुण सिंह को देश के रक्षा संगठन का आधुनिकीकरण करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पीवी नरसिम्हा राव भी हरसंभव बेहतरीन प्रतिभाएं जुटाने में सफल हुए। वे मनमोहन सिंह को लाए और उन्हें सीधे वित्त मंत्री बना दिया। मनमोहन सिंह के वित्त सचिव मोंटेकसिंह आहलूवालिया ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे में अब सरकारी सेवा में देरी से प्रवेश से देश और विदेश की कुशल प्रतिभाओं और पेशेवरों का प्रशासन व सरकारी कार्य में सहयोग लेने का जो अभियान चलाया गया है, वह अवश्य लाभप्रद होगा।

हालांकि सरकारी तंत्र में निजी क्षेत्र के पेशेवरों और विशेषज्ञों की नियुक्तियां लाभप्रद दिखाई दे रही हैं, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी। इनमें से प्रमुख चुनौती नियुक्त विशेषज्ञों की गुणवत्ता संबंधी है। दूसरी चुनौती यह है कि विशेषज्ञों और आम नौकरशाहों के बीच तनाव अनिवार्य है। बाहरी पेशेवरों के लिए प्रशासनिक सेवा के नौकरशाहों के साथ मिल कर काम करना आसान नहीं है। जिन लोगों को विशेषज्ञों और पेशेवरों के रूप में चुना जा रहा है, उनके लिए फाइलों और मंत्रियों की बैठक तक पहुंच बनाना भी आसान नहीं है। ऐसे में काफी कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि राजनीतिक कार्यपालिका इन बाहरी विशेषज्ञों को किस हद तक काम करने देती है। पिछली बार इस तरह की सरकारी नियुक्ति की जो प्रक्रिया शुरू हुई है, उसकी उपयुक्तता पाई गई है। अब सरकार द्वारा नियामकीय प्रमुखों की खोज का दायरा बढ़ाया जा रहा है। देश के निजी क्षेत्र में प्रतिभाओं की भरमार है। सरकार इनकी सहायता से अपने नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया में सुधार कर सकती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार देश और विदेश में गहरा कार्य अनुभव रखने वाली प्रतिभाओं का प्रशासन में पूरा लाभ उठाएगी। अनुभवी प्रतिभाओं और पेशेवरों की नियुक्ति के लिए जो अभियान शुरू हुआ है, उससे प्रशासन में अच्छे पेशेवर आएंगे और देश को आर्थिक शक्ति बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 राजनीति: मानसून की पहेली और संकट
2 चुनाव सुधार और आशंकाएं
3 राजनीति: रक्षा बजट और पाक की रणनीति
IPL 2020: LIVE
X