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राजनीति: विदेशी दूल्हे पर शिकंजा

विडंबना ही है कि ऐसे उत्पीड़न और धोखेबाजी के बावजूद हमारे यहां दूसरे देशों में बसे परिवारों में बेटियां ब्याहने को लेकर गजब का उन्माद देखने को मिलता है। खुशियों की चाह में खोये अभिभावक उन परिवारों की छानबीन तक नहीं करते। विदेशी संस्कृति को अपनाने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े होने की बात करने वाले भावी दूल्हे के परिवार बहुओं के सम्मान की कोई चिंता नहीं करते।

Author Published on: March 13, 2019 3:32 AM
विदेशी दूल्हे पर शिकंजा कसने की तैयारी फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस

अनिवासी भारतीय (एनआरआइ) दूल्हों पर शिकंजा कसने के लिए राज्यसभा में विधेयक पेश किया जा चुका है। एनआरआइ दूल्हों के लिए न केवल शादी के पंजीकरण बल्कि दूसरी तरह की कानूनी सख्ती करने के बारे में लंबे समय से विचार चल रहा है। शादी के बाद अप्रवासी दूल्हों द्वारा पत्नियों को छोड़ देने की घटनाएं लंबे समय से जारी हैं। इतना ही नहीं, शादी कर विदेश जाने वाली बेटियों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें भी आए दिन आती रहती हैं। अब ऐसा करने वाले एनआरआइ दूल्हों का पासपोर्ट जब्त किया जा सकेगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी। ऐसे मामलों को लेकर बीते साल विदेश मंत्रालय ने भारत आकर धोखाधड़ी से शादी करने वाले फरार एनआरआइ पतियों के खिलाफ जारी समन, वारंट तामील करने की बात कही थी, जिसके तहत अगर आरोपी कोई जवाब नहीं देता है तो उसे वांछित अपराधी घोषित कर उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। बीते साल विदेश मंत्रालय ने बताया था कि उसे एनआरआइ पतियों से परेशान भारतीय महिलाओं की ओर से पिछले तीन साल में तीन हजार से ज्यादा शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भगोड़े एनआरआइ पतियों के खिलाफ वारंट जारी करने और उन्हें समन भेजे जाने के लिए एक पोर्टल तैयार करने और भारत में मौजूद संपत्ति को जब्त करने जैसे कड़े कदम उठाने की बात कही गई थी।

पिछले दिनों पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी कहा था कि अनिवासी भारतीयों द्वारा पत्नियों को छोड़ने के तीस हजार से ज्यादा कानूनी मामले राज्य में लंबित हैं। राज्य महिला आयोग ने केंद्र से इस संकट पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने का आग्रह करते हुए उन महिलाओं की दुर्दशा के मुद्दे को उठाया था, जो एनआरआइ दूल्हों की धोखाधड़ी व शोषण की शिकार हुई हैं। यह वाकई चिंतनीय है कि अकेले पंजाब में ही तीस हजार से ज्यादा ऐसे न्यायिक मामले लंबित हैं। आयोग का कहना था कि संबंधित एनआरआइ दोषी करार होने के दायरे में है तो इसके बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो और जब तक वह अपनी पत्नी को मुआवजा नहीं दे दे तब तक उसका पासपोर्ट जब्त रखा जाए। ऐसा कठोर कदम उठाने से बहुत सी जिंदगियां बचाने में मदद मिलेगी और यह उन लोगों के लिए भी चेतावनी होगी जो इसके परिणाम से डरे बगैर अपने निहित स्वार्थों के लिए भारत के कानून का दुरुपयोग करते हैं। निस्संदेह केंद्र और राज्य सरकारों की गंभीरता और सख्ती इन शोषित महिलाओं के लिए मददगार साबित हो सकती है।

पंजाब ही नहीं अन्य राज्यों से भी ऐसे हजारों अनिवासी भारतीय परिवार हैं, जो दूसरे देशों में जाकर बस गए हैं, विशेषकर कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और आॅस्ट्रेलिया जैसे देशों में अनिवासी भारतीय बड़ी संख्या में बसे हुए हैं। इनमें से कई परिवार आज भी अपने बेटों की शादी करने के लिए दुल्हन तलाशने भारत आते हैं। ऐसे वैवाहिक रिश्तों का सबसे दुखद पक्ष यह है कि जीवन भर के लिए जुड़ने वाले इस रिश्ते को लेकर कई भावी दूल्हों और उनके परिवार की मंशा शुरुआत से ही गलत होती है। नतीजतन, ऐसे अनगिनत मामले सामने आ चुके हैं जिनमें विदेशों में जा बसे लड़के भारतीय लड़कियों से शादी तो करते हैं, लेकिन शादी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर नहीं होते। वे इस जुड़ाव को निभाने के लिए नहीं, बल्कि अपने फायदे के लिए भुनाने की सोच रखते हैं। शादी के सालों बाद तक दुल्हन यहां इतजार करती रहती है, लेकिन वे उनकी खोज-खबर तक नहीं लेते। यही वजह है कि अकेलेपन की पीड़ा और प्रताड़ना बिना किसी गलती के ही देश की कई बेटियों के हिस्से आ रही है।

यह बेहद चिंतनीय है कि ऐसे मामले तेजी से बढ़ ही रहे हैं। पंजाब ही नहीं, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गुजरात जैसे राज्यों में भी ऐसी बेटियां बड़ी संख्या में हैं जिनकी शादी एनआरआइ परिवार में हुई, पर वे विदाई का इंतजार ही करती रह गर्इं। हालत यह है कि विदेश मंत्रालय के पास एनआरआइ पति द्वारा लड़की को छोड़ दिए जाने या प्रताड़ित किए जाने की हर दिन औसतन तीन शिकायतें आती हैं। यही वजह है कि भारतीय महिलाओं की एनआरआइ पुरुषों से शादी के बाद आ रही समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने कुछ समय पहले भारतीय दंड संहिता (सीआरपीसी) में बदलाव लाने पर भी विचार करने की बात कही थी। इस साल की शुरुआत में ही विदेश मंत्रालय ने कानून और गृह मंत्रालय से इस बात पर विचार करने को कहा था कि क्या अदालती समन की अनदेखी करने वाले एनआरआइ दूल्हों को भगोड़ा घोषित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए? ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज होने और न्यायिक कार्यवाही शुरू होने के बाद भी एनआरआइ पति कानून की पकड़ में नहीं आ पाते। दूर देश में बसे ऐसे लड़के खुद को पूरी तरह सुरक्षित समझते हैं। कई मामलों में तो यह भी सामने आया है कि यहां शादी कर परदेस लौटे दूल्हों का पता-ठिकाना तक गलत निकलता है। ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज होने और न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ज्यादातर मामले किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाते।

इस तरह के उत्पीड़न और धोखेबाजी से बचने के लिए बीते साल ही केंद्र सरकार ने ऐसी शादियों को पंजीकृत कराने का कदम उठाया है। दरअसल, एनआरआइ लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी न होने की वजह से ऐसी शादियां हो जाती हैं। कई बार लड़के और उसके परिवारजन बहुत कम समय के लिए भारत आते हैं तो जल्दबाजी में रिश्ता तय होता है, जिसके चलते लड़कियों को आगे चल कर कई तरह का उत्पीड़न सहने को मजबूर होना पड़ता है। शादी करने के बाद दुल्हन को भारत में ही छोड़ जाने के अलावा भी ऐसे वैवाहिक रिश्तों में कई शिकायतें सामने आती रही हैं। जैसे कई दूल्हे भारत में शादी करने के तुरंत बाद गायब हो गए। ऐसे प्रवासी पति भी बहुत हैं जो अपनी पत्नी को भारत आने से रोकते हैं। उन एनआरआइ पतियों की संख्या भी कम नहीं है जो अपनी पत्नी को विदेश ले जाकर छोड़ देते हैं। इनमें ऐसे प्रवासी परिवार भी शामिल हैं जो महिला को तो भारत भेज देते हैं, लेकिन बच्चों को सौंपने से इनकार कर देते हैं। पराये देश जाकर सुखी गृहस्थी बसाने के सपने देखने वाली बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार भी हुआ है कि एनआरआइ पति दूसरे देश के एयरपोर्ट पर लेने तक नहीं आते और उनके पास पति का सही पता तक नहीं होता। ऐसी धोखेबाजी सफल भी रहती है, क्योंकि कई अप्रवासी लड़के तो सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसी शादियां करते हैं।

विडंबना ही है कि ऐसे उत्पीड़न और धोखेबाजी के बावजूद हमारे यहां दूसरे देशों में बसे परिवारों में बेटियां ब्याहने को लेकर गजब का उन्माद देखने को मिलता है। खुशियों की चाह में खोये अभिभावक उन परिवारों की छानबीन तक नहीं करते। विदेशी संस्कृति को अपनाने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े होने की बात करने वाले भावी दूल्हे के परिवार बहुओं के सम्मान की कोई चिंता नहीं करते। कहने को खुलेपन की सोच और शिक्षित पृष्ठभूमि से आने वाले कई परिवार तो दहेज में मोटी रकम भी वसूलते हैं। इन सब घटनाओं के बावजूद एनआरआइ दूल्हों की मांग आज भी कम नहीं हुई है।

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