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राजनीति: जाली मुद्रा का बाजार

नोटबंदी से पहले देश के विभिन्न बैंकों के एटीएम से नकली नोट निकल रहे थे। उत्तर प्रदेश के कई बैंकों के चेस्ट में भारी मात्रा में नकली नोट पाए गए थे। यह किसी से छिपा नहीं है कि देश में ऐसे कई गिरोह हैं जो नकली नोटों का कारोबार कर रहे हैं, लेकिन वे जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं।

Author नई दिल्ली | September 24, 2019 2:06 AM
आरबीआई ने नकली नोटों पर जानकारी दी थी। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

अभिजीत मोहन

यह चिंताजनक है कि सरकर की कड़ी निगरानी के बावजूद देश में नकली नोटों का प्रवाह थम नहीं पा रहा। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक बीते दो वर्षों में नकली नोटों की संख्या में दस गुना से ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 और 2018-19 में नकली नोटों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। चिंता की बात यह है कि बड़े नकली नोटों के अलावा अब दस, बीस और पचास रुपए के छोटे नकली नोट भी बाजार में हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि एक वर्ष के दौरान दस, बीस और पचास रुपए के नकली नोटों में क्रमश: 20.2, 87.2 और 57.3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी दो साल के दरम्यान छोटी मुद्राओं में नकली नोटों की संख्या चार गुना तक बढ़ी है। आंकड़ों पर गौर करें तो पचास रुपए के नकली नोटों की संख्या नौ हजार से बढ़ कर छत्तीस हजार तक पहुंच गई है। रिजर्व बैंक के मुताबिक बाजार में सबसे अधिक सौ रुपए के नकली नोट मौजूद हैं। हालांकि सौ रुपए के नकली नोटों में साढ़े फीसद की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में दो हजार रुपए के नकली नोटों की संख्या में भी बाईस प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसी तरह दो सौ रुपए के नकली नोटों में एक सौ साठ गुना वृद्धि हुई है।

पिछले साल 2018 में दो सौ रुपए के उनयासी जाली नोट पकड़े गए थे, जबकि इस साल इनकी संख्या बारह हजार सात सौ अट्ठासी हो गयी। इसी तरह पांच सौ रुपए के नकली नोटों में एक सौ इक्कीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। 2016-17 में पांच सौ रुपए के नकली नोटों की संख्या सिर्फ एक सौ निन्यानवे थी, जो 2018-19 में बढ़ कर बाईस हजार पहुंच गई। गत वर्ष एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि पिछले दस सालों में देश के बैंकिंग तंत्र में लेनदेन के दौरान नकली मुद्रा पकड़े जाने के मामले तेजी से बढ़े हैं। साल 2007-08 में सरकार ने पहली बार यह अनिवार्य किया था कि निजी बैंकों और देश में संचालित सभी विदेशी बैंकों के लिए नकली मुद्रा पकड़े जाने संबंधी किसी भी घटना की जानकारी धनशोधन रोधी कानून के प्रावधान के तहत वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को देनी होगी। उसके बाद से एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009-10 में सवा लाख से से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हुए थे। एक ही साल यानी 2010-11 में ऐसे दर्ज मामलों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा हो गई और वर्ष 2011-12 में ये सवाल तीन लाख से ऊपर निकल गए। इन आंकड़ों से साफ है कि देश में बड़े पैमाने पर नकली नोटों का प्रवाह जारी है।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो भी खुलासा कर चुका है कि देश में सबसे अधिक पांच सौ रुपए के नकली नोट चल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में पांच सौ रुपए के 2,99,524 नोट, सौ रुपए के 2,17,189 नोट और एक हजार रुपए के 1,78,022 नकली नोट बरामद किए गए। नोटबंदी से पहले के एक आंकड़े के मुताबिक रिजर्व बैंक और जांच एजेंसियों की संख्ती के बावजूद भारतीय बाजार में मौजूद साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपए की मुद्रा में बड़ी संख्या में नकली नोट मौजूद होने का खुलासा हुआ था। यह भी आशंका जाहिर की गई थी कि यह आंकड़ा चार सौ करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकता है। नोटबंदी से पहले देश के विभिन्न बैंकों के एटीएम से नकली नोट निकल रहे थे।

उत्तर प्रदेश के कई बैंकों के चेस्ट में भारी मात्रा में नकली नोट पाए गए थे। यह किसी से छिपा नहीं है कि देश में ऐसे कई गिरोह हैं जो नकली नोटों का कारोबार कर रहे हैं, लेकिन वे जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं। अब भी पाकिस्तान नकली नोटों की खेप बांग्लादेश के जरिए भारत में भेज रहा है। सुरक्षा एजेंसियां पहले भी खुलासा कर चुकी हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ सालाना दस हजार करोड़ रुपए मूल्य के भारतीय नोटों की नकली मुद्रा छाप कर भारत में भेजने की योजना पर काम कर रही है। खास बात यह कि नोटबंदी के बाद भी पाकिस्तान इस खेल में जुटा हुआ है।

दरअसल, उसकी मंशा नकली नोटों के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देना और भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2010 में तकरीबन सोलह अरब रुपए मूल्य की नकली मुद्रा नेपाल और बांग्लादेश के जरिए भारत भेजी गई थी। इसी तरह वर्ष 2011 में बीस अरब रुपए की नकली मुद्रा भेजी गई। इस जाली मुद्रा में तकरीबन साठ फीसद हिस्सा पाकिस्तान में छापा गया था। वर्ष 2015 में भी इन रास्तों से तकरीबन तीन करोड़ से ज्यादा की मुद्रा पकड़ी गई थी।

अच्छी बात है कि समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के नागरिकों को प्रचार-प्रसार के जरिए असली-नकली नोटों के फर्क को समझाता रहता है। बैंकों को भी हिदायत दी जाती है कि वे नोटों को लेने से पहले उसकी जांच जरूर कर लें। इसमें दो राय नहीं कि नोटबंदी के बाद भी नकली मुद्रा के धंधे से जुड़े लोगों पर अभी तक पूरी तरह से शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि भारत सरकार ने नकली नोटों पर अंकुश रखने के उपाय सुझाने के लिए शैलभद्र बनर्जी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट पर अमल करते हुए मुद्रा निदेशालय में अतिरिक्त सचिव स्तर का महानिदेशक का पद सृजित किया गया है। इसके अलावा कई अन्य और कदम उठाए गए हैं। मसलन, सरकार ने बेहद सुरक्षित किस्म के कागजों पर नोट छापने का निर्णय लिया है। इसके लिए मैसूर में अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित नोटों के कागज बनाने का कारखाना लगाया जा रहा है। इस कारखाने में निर्मित करेंसी कागज की नकल करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। गौरतलब है कि अभी भारत में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश करेंसी कागज आयातित होते हैं। हर वर्ष भारत तेरह अरब रुपए मूल्य के कागज आयात करता है।

नकली नोटों के अवैध धंधे को रोकने के लिए वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र और राज्य सरकारों की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां मिल कर काम कर रही हैं। गौरतलब है कि एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए गृह मंत्रालय में एक संयोजन समिति बनाई गई है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ने नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल एक तरफ बिना छपाई वर्ष वाले 2005 से पुराने नोटों को परिचालन से बाहर कर दिया है। वहीं नए नोटों पर सुरक्षा मानक ज्यादा उन्नत बना दिए गए हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने पिछले साल से ही नंबर पैनल पर आकार में नोटों के नंबर की छपाई बढ़ते हुए क्रम में शुरू कर दी है। बेहतर होगा कि भारत सरकार नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए और कड़ा कदम उठाए। इसमें अमेरिका मददगार साबित हो सकता है। इसलिए कि उसके पास नकली नोटों से निपटने की उच्च प्रौद्योगिकी विद्यमान है और साथ ही उसके पास हर नकली अमेरिकी डॉलर का फोटो सहित डाटाबेस भी उपलब्ध है। उसे जानकारी हो जाती है कि नकली डॉलर कहां और किस रास्ते से आता है और इसे लाने वाले लोग कौन लोग हैं। अगर भारत भी अमेरिकी प्रौद्योगिकी की सहायता लेता है तो नि:संदेह नकली नोटों से निपटने में मदद मिलेगी।

 

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