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राजनीति: ब्रह्मांड में जीवन की उम्मीदें

हाकिंग दूसरे ग्रहों पर जीवन की उम्मीदों को मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए महत्त्वपूर्ण मानते थे। उनका मानना था कि आकाशीय पिंडों की टक्कर या परमाणु युद्ध के कारण हमारी सभ्यता नष्ट हो सकती है। इसलिए मानव सभ्यता को बचाने के लिए हमें ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए, ताकि मानव जाति का भविष्य सुरक्षित रहे।

Author Updated: August 31, 2019 5:10 AM
नासा के वैज्ञानिकों ने हाल में एक ऐसा ग्रह खोजा है जो रहने योग्य हो सकता है।

निरंकार सिंह

जीवन के लिए सबसे अनुकूल ग्रह हमारी पृथ्वी है। वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर अन्य ग्रहों पर भी जीवन की संभावनाएं तलाश रहे हैं। अब एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि पृथ्वी के आकार वाले बर्फीले ग्रहों पर भी कुछ क्षेत्र रहने योग्य हो सकते हैं। अब तक वैज्ञानिक यह सोचते रहे हैं कि पृथ्वी जैसे आकार वाले जमे हुए ग्रहों पर जीवन मुमकिन ही नहीं हो सकता है क्योंकि इन ग्रहों पर मौजूद महासागर जमे हुए हैं और अत्यधिक ठंड जीवन की संभावनाओं को खत्म कर देती है। लेकिन नया अध्ययन हमारी उस सोच को चुनौती देता है जिसमें हमें यह लगता है कि अत्यधिक ठंडे और गर्म ग्रहों में जीवन संभव ही नहीं हो सकता। जियोफिजिकल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बर्फीले ग्रहों की भूमध्य रेखाओं के पास के क्षेत्रों में रहने योग्य तापमान भी मौजूद हो सकता है। कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी में खगोल और भौतिक विज्ञानी एडिव पैराडाइस ने बताया कि हमारी खोज में कुछ ऐसे ग्रह मिले हैं जो बर्फीले हैं। परंपरागत रूप से इनको रहने योग्य नहीं माना जा सकता, लेकिन नया अध्ययन यह सुझाव देता है कि शायद वे ग्रह रहने योग्य हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये रहने योग्य क्षेत्र एक तारे की विशिष्ट दूरी से प्रभावित होते हैं, जिसकी वजह से वहां का तापमान सामान्य और पानी तरल अवस्था में मौजूद हो सकता है।

अब तक के अध्ययनों से पता चलता है कि हमारी पृथ्वी भी दो से तीन बार हिम युग से गुजरी है लेकिन फिर भी यहां जीवन बच गया। हिम युग में भी सूक्ष्म जीव बचे रहे। पैराडाइस का कहना है कि पृथ्वी अपने हिमयुग के दौरान भी रहने योग्य थी। यहां जीवन हिमयुग से पहले पनपा था। यह हिमयुग और उसके बाद भी बरकरार रहा। वैज्ञानिकों ने बर्फीले ग्रहों में रहने योग्य कारणों का अध्ययन करने के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम का सहारा लिया, जिसमें सूर्य की रोशनी की मौजूदगी और क्षेत्रों के आकार के आधार पर मॉडल बनाए गए। सबसे खास चीज जिस पर वैज्ञानिकों ने ध्यान दिया, वह कार्बन डाइआक्साइड थी। कार्बन डाइ आक्साइड की वजह से ही ग्रहों में गर्मी रहती है और जलवायु परिवर्तन भी होता है। इसके बिना ग्रहों के महासागर जम जाते हैं, बेजान हो जाते हैं। जब वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड का स्तर कम हो जाता है तो ग्रह स्नोबॉल यानी बर्फीले हो जाते हैं। लेकिन जब इन ग्रहों पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है तो इनकी भूमध्य रेखाओं के आसपास के क्षेत्रों में बर्फ के पानी बनने की संभावना प्रबल हो जाती है। इस आधार पर भी कहा जा सकता है कि बर्फीले ग्रहों पर जीवन संभव हो सकता है।

नासा के वैज्ञानिकों ने हाल में एक ऐसा ग्रह खोजा है जो रहने योग्य हो सकता है। यह ग्रह हमारे सौर मंडल के बाहर मिला है। हमारी धरती से यह करीब इकतीस प्रकाश वर्ष दूर है। इस सुपर अर्थ ग्रह को ‘जीजे 357 डी’ नाम दिया गया है। इस ग्रह की खोज नासा के अंतरिक्ष टेलीस्कोप- ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सैटेलाइट (टीईएसएस) के जरिए इस साल के शुरू में की गई थी। अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में इस बारे में शोध करने वाले दल की सदस्य लिजा कलटेनेगर के अनुसार यह उत्साहजनक है कि धरती के सबसे करीब पहली सुपर अर्थ का पता चला है। यह ग्रह आकार में धरती से बड़ा है। इस पर घना वातावरण देखने को मिला है और इसकी सतह पर धरती की तरह पानी तरल रूप में हो सकता है। टेलीस्कोप की मदद से इस पर जीवन के संकेतों की पहचान का प्रयास चल रहा है। ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सैटेलाइट (टीईएसएस) को नासा ने ग्रहों की खोज के लिए पिछले साल 18 अप्रैल को छोड़ा था। यह दो साल तक काम करता रहेगा। स्पेन के इंस्टीट्यूट आॅफ एस्ट्रोफिजिक्स आॅफ द कैनरी आइलैंड और यूनिवसिर्टी आॅॅफ ला लागुना के खगोलविदों ने कहा है कि उन्होंने जीजे 357 सिस्टम का पता लगाया है। इसमें कुल तीन ग्रह हैं। इनमें एक ग्रह (जीजे 357डी) पर रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हो सकती हैं। इसके अलावा इसमें एक बौना ग्रह (जीजे 357) भी है जो सूर्य के आकार का एक तिहाई हिस्सा लगता है। इसी साल फरवरी में ही टीईएस सैटेलाइट ने पता लगाया था कि जीजे 357 हर 3.9 दिनों में थोड़ा मंद हो रहा था। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि इसके आसपास कोई ग्रह चक्कर का लगा रहा है। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के अनुसार यह ग्रह जीजे-357 बी था जो पृथ्वी से लगभग बाईस फीसद बड़ा है।

मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग लंबे समय से दूसरी दुनिया में जीवन की तलाश पर जोर देते रहे थे। अपने जीवन भर के गणित और खगोल भौतिकी के अध्ययन से उन्होंने कई ऐसे निष्कर्ष निकाले जो दूसरी दुनिया में जीवन की संभावनाओं का पुरजोर समर्थन करते थे। हाकिंग दूसरे ग्रहों पर जीवन की उम्मीदों को मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए महत्त्वपूर्ण मानते थे। उनका मानना था कि आकाशीय पिंडों की टक्कर या परमाणु युद्ध के कारण हमारी सभ्यता नष्ट हो सकती है। इसलिए मानव सभ्यता को बचाने के लिए हमें ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए, ताकि मानव जाति का भविष्य सुरक्षित रहे। इसके लिए उन्होंने रूसी अरबपति यूरी मिल्नर की सहायता से दस करोड़ अमेरिकी डालर की लागत वाले एक दस वर्षीय अभियान की शुरुआत की थी। इसे दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज करने का अभी तक का सबसे बड़ा अभियान माना जाता है। इसे ‘ब्रेकथू मिशन’ नाम दिया गया। इस अभियान में पृथ्वी के करीब स्थित लाखों तारों से आने वाले संकेतों को सुना जा रहा है। इस अभियान की खूबी यह है कि पुराने अभियानों की तुलना में इस अभियान का दायरा दस गुना बढ़ाया गया है। प्रोफेसर हाकिंग के इस मिशन में पृथ्वी के इर्द-गिर्द स्थित तारों के पास जीवन की संभावना की तलाश के लिए रेडियो तरंगों को भेजा जाएगा।

इसके लिए दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप, ग्रीन बैंक टेलीस्कोप और पार्क्स टेलीस्कोप की मदद ली जाएगी। एक तीसरा टेलीस्कोप दूसरी दुनिया के संकेतों का पता लगाएगा। दुनिया भर का वैज्ञानिक समुदाय 1960 से ही सामूहिक प्रयासों के जरिए सर्च फॉर एक्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (सेटी) कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष के अन्य ग्रहों पर जीवन की तलाश में लगा है। इसकी शुरुआत प्रोजेक्ट ओज्मा (1960) से हुई। शुरुआती दौर में इस कार्यक्रम के तहत कुछ समय के लिए रेडियो टेलिस्कोप के जरिये रेडियो तरंगों को भेजा जाता था।

खगोल वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम के अनुसार इंसान ब्रह्मांड में मौजूद ऐसे कई ग्रहों पर जिंदगी जी सकता है जो पृथ्वी से ही मिलते-जुलते हैं। आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसे ग्रह रहने लायक हैं कि नहीं यह पता लगाना खगोल विज्ञान के लिए एक उपलब्धि है। इस टीम की अगुआई करने वाले चार्ली लाइनवीबर के अनुसार हाल ही में कई ऐसे ग्रह पाए गए हैं जहां ऐसा माहौल पाया गया है कि जिंदगी जी जा सके। इसमें कई ग्रह ऐसे हैं जो एक जैसे हैं और पृथ्वी से मेल खाते हैं। इससे पृथ्वी के बाहर भी जिंदगी बसर करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अब नए ग्रहों की खोज से वैज्ञानिकों के हौसले काफी बढ़ गए हैं। अब अंतरिक्ष में अन्य ग्रहों पर भी जीवन की तलाश में अभियान में तेजी आएगी।

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