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राजनीति: स्वदेशी मिसाइलें और चुनौतियां

अग्नि-2 मिसाइल 21 मीटर लंबी, 1.3 मीटर चौड़ी और सोलह टन वजनी है जो तीन हजार किलोमीटर तक के दायरे में लक्ष्य को भेद सकती है।

Author Updated: December 11, 2019 2:51 AM
पिछले दिनों रक्षा मंत्री ने कहा था कि केवल हथियारों का आयातक बने रह कर कोई भी देश महाशक्ति नहीं बन सकता। (सांकेतिक तस्वीर)

दुनियाभर में हथियारों की होड़ तेजी से बढ़ रही है। चीन और पाकिस्तान जैसे भारत के पड़ोसी देश भी अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। इसी कारण भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से सुसज्जित करना समय की बड़ी मांग है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के साथ लगातार बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के बाद भारत दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हथियार आयातक देश के रूप में उभरा है। पिछले कुछ समय में अमेरिका के अलावा रूस, इजरायल, फ्रांस आदि के साथ भारत ने अत्याधुनिक हथियारों और अन्य साजो-सामान की खरीद के लिए कई बड़े सौदे किए हैं। भविष्य की रणनीतियों और युद्ध के खतरों को ध्यान में रखते हुए सेना के सभी अंगों को अत्याधुनिक हथियारों से परिपूर्ण बनाना बेहद जरूरी भी है, लेकिन इसके साथ ही इस बात की भी जरूरत महसूस की जाती रही है कि अत्याधुनिक हथियारों की खरीद के लिए हम पूरी तरह से विदेशी हथियारों पर आश्रित न रह कर उन्नत स्वदेशी तकनीक वाले हथियारों से भी सेना को सुसज्जित किया जाए।

पिछले दिनों रक्षा मंत्री ने कहा था कि केवल हथियारों का आयातक बने रह कर कोई भी देश महाशक्ति नहीं बन सकता। पिछले कुछ सालों में भारत ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित हाइपरसोनिक हथियारों और मिसाइलों से सेना की ताकत बढ़ाई है, जिनकी मारक क्षमता का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। भारत और रूस ने 2015 में पांच अरब डॉलर का हथियारों का करार किया था। इसके तहत अक्तूबर, 2020 तक सेना के बेड़े में दुनिया की सबसे आधुनिक और लंबी दूरी की एस-400 बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल होने वाली है। यह मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों और हर प्रकार के ड्रोन को निशाना बनाने और दुश्मन की तरफ से होने वाले किसी भी हवाई हमले को चार सौ किलोमीटर की दूरी पर ही खत्म करने में सक्षम है। इसके अलावा भारत में ही तैयार हो रही विभिन्न मिसाइलें भारत को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। सीमित क्षमताओं के बावजूद रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए कई रक्षा प्रणालियां, उत्पाद और प्रौद्योगिकियां विकसित करने में बड़ी कामयाबी हासिल की हैं।

डीआरडीओ द्वारा विकसित अग्नि-2 बैलिस्टिक मिसाइल का पिछले दिनों पहली बार रात के समय सफल परीक्षण करते हुए भारत ने अपनी स्वदेशी मिसाइल ताकत का स्पष्ट अहसास कराया था। अब भारत रात में भी मिसाइल दागने और लक्ष्य भेदने की क्षमता हासिल कर लेने वाला देश बन गया है। अग्नि-2 मिसाइल 21 मीटर लंबी, 1.3 मीटर चौड़ी और सोलह टन वजनी है जो तीन हजार किलोमीटर तक के दायरे में लक्ष्य को भेद सकती है और यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। सतह से सतह पर प्रहार करने की क्षमता से लैस इस मिसाइल को वर्ष 2004 में ही सेना में शामिल कर लिया गया था, लेकिन रात के समय इसका सफल परीक्षण अब किया गया। अग्नि-2 के अलावा इसी शृंखला की सात सौ किलोमीटर तक मार कर सकने वाली अग्नि-1, तीन हजार किलोमीटर तक जाने वाली अग्नि-3, लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-4 और पांच हजार किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 भी भारत की मिसाइल परियोजनाओं की बड़ी देन रही हैं। अब अग्नि-6 पर भी तेजी से काम चल रहा है।

अमेरिका, रूस और चीन के पास इस समय विभिन्न प्रकार की हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। अमेरिका के पास एक साथ तीन परमाणु हथियार ले जाने और तीन अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने में सक्षम तेरह हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली एलजीएम-30 माइन्यूटमैन है तो रूस के पास एक साथ दस ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम सोलह हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली आर-36 है। इसी तरह चीन के पास एक साथ दस से भी ज्यादा ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम डोंगफेंग-41 मिसाइल है। पांचवीं पीढ़ी का हथियार मानी जा रही हाइपरसोनिक मिसाइल की गति कम से कम पांच मैक होती है और एक मैक गति ध्वनि की गति के बराबर मानी जाती है, यानी ध्वनि से पांच गुना तेज गति वाली मिसाइलें ही हाइपरसोनिक मिसाइलें कहलाती हैं, जो एक सेकेंड में एक मील से भी ज्यादा दूरी तय करती हैं। ध्वनि की गति से दो से तीन गुना अधिक गति वाली मिसाइलें सुपरसोनिक मिसाइल कहलाती हैं। भारत के पास फिलहाल ब्रह्मोस जैसी 2.8 मैक गति वाली सुपरसोनिक मिसाइलें तो हैं, जो तीन सौ किलोग्राम हथियार के साथ करीब दो सौ नब्बे किलोमीटर तक हवा से हवा में मार कर सकती हैं। अमेरिका, रूस और चीन की बढ़ती मिसाइल ताकत की वजह से ही भारत को हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास करना जरूरी हो गया था।

अगर बात की जाए भारत और रूस के साझा प्रयासों से बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की तो नौसेना, थलसेना और वायुसेना की जरूरतों के आधार पर समुद्र, जमीन और आकाश से दागे जाने वाले इस मिसाइल के कई संस्करण पहले ही तैयार हो चुके हैं, लेकिन सितंबर 2019 में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के जिस विशेष संस्करण का सफल परीक्षण किया गया, उस टू-इन-वन मिसाइल को जमीन के अलावा समुद्री पोतों और पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है। यह दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है और वर्ष 2020 तक सुखोई-30 लड़ाकू विमानों में भी ब्रह्मोस तैनात कर दिए जाने की योजना है। पिछले महीने डीआरडीओ द्वारा ही तैयार साढ़े तीन हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली के-4 परमाणु मिसाइल का भी परीक्षण किया गया था। वैसे वर्ष 2010 से अभी तक इसके कई परीक्षण किए जा चुके हैं और अब परीक्षण के दौरान यह शून्य त्रुटि के साथ लक्ष्य को भेदते हुए सभी मानकों पर खरी उतरी है। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत अब अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के बाद पानी के भीतर मिसाइल दागने की अभूतपूर्व ताकत और तकनीक रखने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है।

इस साल सितंबर में भारत पूर्णरूप से स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल का भी सफल परीक्षण कर चुका है। ‘अस्त्र’ मिसाइल हवा से हवा में मार करने वाली पहली पूर्ण स्वदेशी मिसाइल है, जिसमें अलग-अलग ऊंचाई पर उड़ान भर रहे कम व लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता है। ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल दुश्मन देशों के रडार की आंखों में धूल झोंकने की क्षमता से भी लैस है और पंद्रह किलोग्राम विस्फोटकों से लैस होकर यह साढ़े पांच हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वार कर सकती है। चूंकि यह प्रक्षेपण के तुरंत बाद बड़ी तेजी से अपने लक्ष्य को भेदती है, इसीलिए इसे ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल’ भी कहा गया है। इस मिसाइल को विशेष रूप से मिराज, सुखोई एसयू-30, एलसीए तेजस, मिग-29 और मिग-21 बायसन जैसे लड़ाकू विमानों में लगाने के लिए विकसित किया गया है और अब इसका नया विकसित संस्करण बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

अगर भारत द्वारा विकसित की गई अन्य स्वदेशी मिसाइलों पर नजर दौड़ाएं तो सतह से सतह पर मार करने वाली, सतह से हवा में मार करने वाली, हवा से हवा में मार करने वाली और हवा से सतह पर मार करने वाली अनेक मिसाइलें भारतीय सेना की ताकत बनी हुई हैं। बहरहाल, भारत केवल विदेशी हथियारों और मिसाइलों पर निर्भर न रह कर अब जिस प्रकार अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक स्वदेशी हथियारों के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, उससे भारतीय सेना की ताकत दिनोंदिन बढ़ रही है और इसे देखते हुए अब पाकिस्तान तो क्या, चीन जैसे देशों के भी पसीने छूटने लगे हैं।

योगेश कुमार गोयल 

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