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राजनीति: परमाणु युद्ध का खतरा

दुनिया के मुल्कों को परमाणु युद्ध का खतरा एक दूसरे से तो है ही, इससे भी ज्यादा बड़ा खतरा अलकायदा और इसलामिक स्टेट जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों से भी है। ये आतंकी संगठन लंबे समय से परमाणु हथियार हासिल करने की फिराक में हैं। दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों के सामने यह भी बड़ी चुनौती है कि परमाणु हथियार कैसे सुरक्षित रखे जाएं ताकि आतंकियों की इन तक पहुंच न बन सके। दुनिया ने परमाणु बम से होने वाली तबाही हिरोशिमा और नागासाकी में देखी है।

Author Published on: September 7, 2019 4:18 AM
पीएम मोदी और इमरान खान। फोटो: एपी/जनसत्ता

विजन कुमार पांडेय

अमेरिका के पास दशकों से ऐसे परमाणु हथियार हैं जो इतनी भयानक तबाही कर सकते हैं कि धरती का कोई हिस्सा इंसान के रहने लायक भी न रह जाए। अमेरिका के हथियारों का जखीरा ब्रिटेन के मुकाबले इकत्तीस गुना और चीन के मुकाबले छब्बीस गुना बड़ा है। वाशिंगटन स्थित संस्था- आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार केवल रूस ही है जो परमाणु शक्ति के मामले में फिलहाल अमेरिका से आगे है। अमेरिका के पास कुल छह हजार आठ सौ परमाणु हथियार हैं जबकि रूस के पास सात हजार ऐसे हथियार हैं। अमेरिका और रूस दो ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु हमले के लिए जरूरत से ज्यादा हथियार हैं। दोनों के पास दुनिया में मौजूद कुल परमाणु हथियारों का नब्बे फीसदी हिस्सा है। इस सूची में तीन सौ परमाणु हथियारों के साथ फ्रांस तीसरे नंबर पर है।

पूर्व में ऐसे हथियार केवल प्रतिरोधक उपायों के तौर पर देखे जाते थे। लेकिन सबसे खतरनाक बात ऐसे हथियारों की सामग्री की बढ़ती खोज है, जिससे परमाणु युद्ध का नया खतरा सामने आ गया है। इस कारण परमाणु हथियारों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पाकिस्तान हमेशा भारत को परमाणु युद्ध के लिए उकसाता रहा है। इसके लिए दोनों देश कम से कम पांच बार परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंच चुके थे। परमाणु हथियारों युग में भारत की शुरुआत 1974 में हुई थी। इसके बाद 1998 में भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया था। इस समय भारत-पाक के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान परमाणु युद्ध की धमकी तक दे चुका है। रक्षा विशेषज्ञ भी आशंका जताते रहे हैं कि यदि भारत पाकिस्तान पर कोई कठोर सैनिक कार्रवाई करता है तो यह स्थिति पूर्णकालिक युद्ध का रूप ले सकती है। इसका अंत एक भयानक परमाणु युद्ध में हो सकता है।

आज के जमाने में परमाणु युद्ध की क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसका अंदाज लगाना बहुत मुश्किल है। इस समय दोनों देशों के बीच काफी तनाव है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि युद्ध होगा ही। अगर गलती से भी ऐसा होता है तो इसका परिणाम बहुत भयानक होगा। परमाणु युद्ध से होने वाली तबाही का मंजर कितना भयानक होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। फिर भी माना जाता है कि परमाणु हमला हफ्ते भर में दो करोड़ से ज्यादा लोगों को मार देगा। इनमें से पचास लाख से ज्यादा लोग बम की तपिश से ही झुलस जाएंगे। आधी दुनिया के दो अरब से ज्यादा लोग सिर्फ भूख से मर जाएंगे। जो बचेंगे वे विकिरणों की मार से मर जाएंगे। यह आंकड़ा यह दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तादाद के मुकाबले आधी है। इतना ही नहीं, मौत का ये आंकड़ा हिंदुस्तान में पिछले दस सालों में आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों, पुलिस, जवान और सुरक्षा बलों की कुल तादाद से दो हजार दो सौ इक्कीस गुना ज्यादा होगी। ओजोन की आधी परत खत्म हो जाएगी। दुनिया से सर्दी-गर्मी का मौसम खत्म हो जाएगा। इतना ही नहीं, धरती के बड़े हिस्से से बनस्पति और जीव-जंतुओं भी साफ हो जाएंगे। इससे दुनिया में भुखमरी फैलेगी सो अलग। भुखमरी ही अरबों लोगों की मौत का कारण बनेगी। ये आंकड़े 2013 में भौतिक वैज्ञानिकों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ने परमाणु युद्ध रोकने के लिए किए गए एक अध्ययन के बाद जारी किए गए थे।

बात सिर्फ हिंदुस्तान और पाकिस्तान की नहीं, दांव पर आधी दुनिया होगी। भारत और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं वे हिरोशिमा पर गिराए गए बम के बराबर हैं। ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इनकी गर्मी, तपिश और विकिरण लोगों की जान ले लेंगे। इसके बाद जो बच जाएंगे उनके लिए भी जीना आसान नहीं होगा। भोपाल गैस के कांड के तीस साल बाद तीसरी पीढ़ी के लोग बीमार पैदा हो रहे हैं। वह तो मिक (मिथाइल आइसो साइनेट) गैस थी, जबकि ये तो परमाणु बम हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर परमाणु हमला हुआ तो इसका असर कितना लंबा और खतरनाक होगा। बमों से निकले विकिरण लोगों को तिल-तिल कर मारेंगे।

पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान की ओर से लगातार भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है। पाकिस्तान परमाणु बम हमले की धमकी दे रहा है। पाकिस्तान परमाणु सपंन्न राष्ट्र है। ऐसे में भारत को यह ध्यान रखना होगा कि उकसावे की कार्रवाई में अपना नुकसान न हो जाए, क्योंकि पाकिस्तान की छवि पूरी दुनिया में आतंकियों को पालने वाले देश के रूप में होती है और पाकिस्तान से निकला आतंक पूरी दुनिया को कई बार दहला चुका है। इसमें भारत ही नहीं अमेरिका जैसे देश तक झुलस चुके हैं।

भारत की ओर से चलाए जा रहे मिसाइल परीक्षण कार्यक्रमों से पाकिस्तान बौखलाता रहा है। इस बात को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले गया है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे संपूर्ण दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ेगा। ऐेसे में अगर युद्ध हुआ तो यह किसी के लिए बेहतर नहीं होगा। इससे तनाव दक्षिण एशिया खासकर भारत-पाकिस्तान के बीच तो और बढ़ेगा ही, साथ ही इस तनाव से पूरी दुनिया प्रभावित होगी। जबकि ऐसा नहीं कि केवल भारत ही मिसाइल परीक्षण कर रहा है। पाकिस्तान भी लगातार अपने मिसाइल परीक्षण को धार दे रहा है। भारत ने अगर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि, त्रिशूल, नाग, पृथ्वी जैसी मिसाइलों के परीक्षण किए हैं तो पाकिस्तान ने भी गौरी, शाहीन जैसी मिसाइलों के परीक्षण कर भारत की बराबरी का दावा किया है। अगर वर्तमान स्थिति को देखें तो इन मामलों में भारत पाकिस्तान से काफी आगे है और भारत ने काफी कुछ अपने दम पर विकसित कर लिया है, जबकि पाकिस्तान को अभी भी दूसरे देशों की तकनीकी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बस यही अहम अंतर है, जो भारत को पाकिस्तान से आगे रख रहा है।

दुनिया के मुल्कों को परमाणु युद्ध का खतरा एक दूसरे से तो है ही, इससे भी ज्यादा बड़ा खतरा अलकायदा और इसलामिक स्टेट जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों से भी है। ये आतंकी संगठन लंबे समय से परमाणु हथियार हासिल करने की फिराक में हैं। दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों के सामने यह भी बड़ी चुनौती है कि परमाणु हथियार कैसे सुरक्षित रखे जाएं ताकि आतंकियों की इन तक पहुंच न बन सके। दुनिया ने परमाणु बम से होने वाली तबाही हिरोशिमा और नागासाकी में देखी है। साथ ही चेरनोबिल जैसे हादसे भी इसका खतरे को बताने के लिए काफी हैं। गुजरे वक्त के साथ, इस हादसे की यादें इतिहास के पन्नों में दबती जा रही हैं। लेकिन इन हमलों और हादसों के जख्म आज भी रिस रहे हैं। हिरोशिमा और नागासाकी के लोग आज भी पूरी तरह सेहतमंद नहीं हैं। आने पीढ़ियां किसी न किसी रूप में इनकी मार झेल रही हैं। इसीलिए जरूरी है कि हम ये देखें कि दुनिया परमाणु हमला झेलने के लिए कितनी तैयार है।

ब्रिटेन में पिंडार नाम से एक सुरक्षित बंकर बना हुआ है जहां किसी परमाणु हमले की सूरत में सेना और सरकार के अधिकारी अपनी जान बचा सकेंगे। परमाणु जंग के बाद मची तबाही के वक्त भी यहां से तमाम सरकारी काम चलते रहेंगे। यहां का सरकारी वर्ग और सैनिक सुरक्षित रहेंगे। लेकिन अगर भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों से जंग हो गई तो आम जनता को सुरक्षित कैसे रखा जाएगा, इसकी भी तैयारी होनी चाहिए। इसके लिए सरकार की क्या तैयारी है? इस पर विचार करने की जरूरत है।

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