ताज़ा खबर
 

राजनीति: विकास दर और रणनीतिक कदम

देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के लिए वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में सुधार जरूरी है। विभिन्न आर्थिक अध्ययन रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि जीएसटी भारत के लिए लाभप्रद है, लेकिन उपयुक्त क्रियान्वयन के अभाव में इसका लाभ अर्थव्यवस्था को पर्याप्त रूप में नहीं मिल पाया है।

Author January 14, 2019 3:07 AM
अनुमान है कि 2019 के दौरान आयकर रिटर्न की संख्या बढ़ कर सात करोड़ से अधिक होगी।

जयंतीलाल भंडारी

सात जनवरी को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 में देश की विकास दर 7.2 फीसद रहेगी। भारत की आर्थिक संभावनाओं पर प्रकाशित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा गया है कि यदि भारत उपयुक्त विकास रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा, तो 2018 की तुलना में 2019 में जीडीपी का आकार बढ़ेगा और विकास दर भी साढ़े सात फीसद से अधिक होगी। इससे भारत दुनिया में सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत घट कर पचास डॉलर प्रति बैरल हो जाने से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। आइएमएफ का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने अच्छे आर्थिक सुधार किए हैं। कुछ आर्थिक सुधारों का भारत को विशेष रूप से फायदा हुआ है। जीएसटी के कारण दीर्घावधि में लाभ पहुंचेगा।

निसंदेह वर्ष 2018 में सरकार ने उद्योग, कारोबार एवं निर्यात क्षेत्र को जो कई राहत प्रदान की हैं, उनके सरल क्रियान्वयन से 2019 में अर्थव्यवस्था को लाभ होगा और जीडीपी बढ़ेगी। चूंकि देश के सूक्ष्म, लघु और मझौले (एमएसएमई) क्षेत्र की अधिकांश इकाइयों ने नोटबंदी और जीएसटी के दो झटके झेले थे, इसलिए इस क्षेत्र के कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मझौली इकाइयों को प्रोत्साहन पैकेज दिए हैं। इससे एमएसएमई क्षेत्र के पुनर्जीवन का नया परिदृश्य उभरेगा। देश के विकास में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) के महत्त्व को देखते हुए इसे बढ़ावा देने और इसे ज्यादा उदार बनाने के उद्देश्य से एकल ब्रांड खुदरा कारोबार में सौ फीसद एफडीआइ की अनुमति प्रदान की है। पिछले साल प्रत्यक्ष कर संग्रह अठारह फीसद बढ़ कर 10.02 लाख करोड़ रुपए से अधिक हुआ है, इसमें 2019 में और बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि 2019 के दौरान आयकर रिटर्न की संख्या बढ़ कर सात करोड़ से अधिक होगी। हालांकि इस साल वैश्विक शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी, लेकिन दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके भारत में कारपोरेट आमदनी, सार्वजनिक निवेश और विदेशी निवेश भी बढ़ने की संभावना है। इन सबके साथ-साथ आर्थिक सुधारों के कारण भारतीय शेयर बाजार में उम्मीद का माहौल रहेगा। म्यूचुअल फंड तेजी से बढ़ेंगे। अनुमान है कि मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक इस साल 40,000 अंक के आसपास पहुंच जाएगा।
वर्ष 2019 में किसानों और कृषि हितों की योजनाओं को कार्यान्वित करने से विकास की डगर आगे बढ़ेगी।

केंद्र सरकार लघु एवं सीमांत किसानों की आय में बढ़ोतरी करने की नई योजना भी ला सकती है। वर्ष 2019 में नीति आयोग के द्वारा कृषि अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए जो ‘न्यू इंडिया’ रणनीति जारी की गई है, उसके कार्यान्वयन की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाने से भी कृषि और किसान लाभान्वित होंगे। निश्चित रूप से आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य लागू करने, शीत गृहों के निर्माण में वित्तीय सहायता देने जैसे कामों को आगे बढ़ाए जाने से कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। वर्ष 2019 में खाद्य प्रसंस्करण की नई संभावनाओं को साकार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। शिकागो के एक संस्थान ने भारत में खाद्य प्रसंस्करण की प्रबल संभावनाओं पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कहा गया है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से भारत के किसानों की आय में भारी सुधार होगा और साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2024 तक भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में तैंतीस अरब डॉलर के नए निवेश और नब्बे लाख नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार को इस साल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को साकार करने के लिए प्रोत्साहन सुनिश्चित करने होंगे।

देश की अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के लिए वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में सुधार जरूरी हैं। विभिन्न आर्थिक अध्ययन रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि जीएसटी भारत के लिए लाभप्रद है, लेकिन उपयुक्त क्रियान्वयन के अभाव में इसका लाभ अर्थव्यवस्था को पर्याप्त रूप में नहीं मिल पाया है। गौरतलब है कि एक जुलाई, 2017 को देश का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया था। एक जुलाई के पहले तक देश में सत्रह तरह के अप्रत्यक्ष कर लागू थे। पारंपरिक रूप से उत्पाद और सीमा शुल्क राजस्व का प्रमुख भाग रहे हैं। इसके अलावा सेवा कर, बिक्री कर, व्यावसायिक कर, सेनवैट और स्टेट वैट, चुंगी और प्रवेश कर भी महत्त्वपूर्ण रहे हैं। जीएसटी के तहत माल एवं सेवाओं के लिए चार श्रेणियां बनाई गई हैं। ये हैं- पांच, बारह, अठारह और अट्ठाईस फीसद के स्लैब। इसमें कोई दो मत नहीं है कि जीएसटी लागू होने के बाद विक्रेताओं को कर-अंतर का लाभ उपभोक्ताओं को देने से शुद्ध राजस्व में मिलने वाले लाभ के महत्त्व का एहसास हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं की ढुलाई सुगम हुई और कर भी एक समान हुए। राज्य स्तरीय करों के खत्म होने पर कर संबंधी तमाम बाधाएं, सीमा प्रतिबंध, ढुलाई में देरी और ऐसी ही दूसरी रुकावटें अब कम हो गई हैं। कंप्यूटरीकृत कर अनुपालन व्यवस्था लागू होने से इसमें मानवीय हस्तक्षेप भी बहुत कुछ खत्म हो गया, जिसके कारण दलाली और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है।

लेकिन अभी भी जीएसटी से संबंधित कई उलझनें और कठिनाइयां दिखाई दे रही हैं। ऐसे में 2019 में उद्योग-कारोबार के लिए जीएसटी का सरल रूप जरूरी होगा। कर पुनर्भुतान के लिए मैन्युअल रिकॉर्ड और प्रक्रिया की बड़ी खामियों को दूर करना होगा। वास्तविक व्यवहार में आ रही जीएसटी दरों से संबंधित कई उलझनों का समाधान करना होगा। वर्ष 2019 में जीएसटी पोर्टल को अधिक कार्यक्षम बनाने की जरूरत है। और सबसे बड़ी जरूरत जो काफी समय से महसूस की जा रही है वह है अट्ठाईस फीसद की श्रेणी को खत्म करने की। इसके अलावा बारह और अठारह फीसद की दर का विलय करके एकल मानक दर लागू की जानी होगी। इस बात का खयाल रखना होगा कि जीएसटी अधिकारी ईमानदारी से कर चुकाने वाले करदाताओं को परेशान न करें, लेकिन जो जीएसटी भुगतान में आनाकारी करते हैं या रिटर्न दाखिल नहीं करते, उन्हें कर दायरे में लाया जाए। चूंकि जीएसटी लागू हुए ड़ेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी उद्यमियों और कारोबारियों को रिटर्न जमा करने और जीएसटी फॉर्म को समझाने में कठिनाइयां आ रही हैं, अतएव जिला स्तर पर जीएसटी अधिकारियों और विशेषज्ञों की कमेटियां बना कर जीएसटी प्रशिक्षण संबंधी कैम्प लगाए जाने चाहिए। इन सबके साथ-साथ जीएसटी की एकल विवरणी दाखिल करने की सुविधा भी देना होगी। नए वर्ष 2019 में विकास के रणनीतिक प्रयासों के तहत बेनामी संपत्ति पर जोरदार चोट करना होगी। कालेधन का बकाया इलाज पूरा करना होगा। अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने की रफ्तार तेज करना होगी। निश्चित रूप से वर्ष 2019 में अब देश की अर्थव्यवस्था को ऊंचाई देने के लिए विनिर्माण क्षेत्र की अहम भूमिका है। इसमें तेजी लाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ योजना को गतिशील बनाने की जरूरत है। उन ढांचागत सुधारों पर भी जोर देना होगा, जिसमें निर्यातोन्मुखी विनिर्माण क्षेत्र को गति मिल सके। ऐसा सब किए जाने से भारत में कृषि विकास, औद्योगिक विकास और कर सुधार का नया लाभप्रद परिदृश्य दिखाई देगा। इससे अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी और विकास दर साढ़े सात फीसद तक आसानी से पहुंच सकती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App