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राजकोषीय घाटे का संकट

वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.24 लाख करोड़ रुपए रखा गया था, जो दिसंबर 2018 के अंत तक 7.01 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो बजट अनुमान से करीब 12.4 फीसद ज्यादा है। स्पष्ट है कि चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पिछले नौ महीनों में जो राजकोषीय घाटा ऊंचाई पर पहुंच गया है उसे पाटा जाना मुश्किल है।

Author February 11, 2019 3:17 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Freepik)

जयंतीलाल भंडारी

पिछले हफ्ते एक वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारत सरकार के 2019-20 के अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.4 फीसद रखे जाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे हासिल करने में सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अंतरिम बजट में खर्च बढ़ाने के कदम उठाए गए हैं। हालांकि बजट में राजस्व बढ़ाने के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं, लेकिन फिर भी निश्चित रूप से अंतरिम बजट की घोषणाओं से विकास को बल मिलेगा। नया अंतिरिम बजट राजकोषीय घाटे को कम करने के लिहाज से ठीक नहीं है। सरकार ने इससे पहले, राजकोषीय घाटे को मार्च 2020 तक जीडीपी के 3.1 फीसद तक और मार्च 2021 तक तीन फीसद तक सीमित रखने की प्रतिबद्धता जताई थी। एक रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अगले वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा (जीडीपी) का 3.6 फीसद रहेगा।

गौरतलब है कि विभिन्न रेटिंग एजेंसियों की तरह देश और दुनिया के कर विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने भी राजकोषीय घाटे के घोषित लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। लेकिन यह भी कहा है कि अनुकूल आर्थिक परिवेश में सरकार अपना अंतरिम बजट प्रस्तुत करते समय पूर्ण स्वायत्तता का उपयोग करते हुए बजट को सभी के लिए हितप्रद बनाते हुए भी दिखाई दी। इससे अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विभिन्न वर्गों को लाभ मिलेगा। नया अंतरिम बजट प्रमुखतया खेती और किसानों को लाभान्वित करते हुए दिखाई दे रहा है। सरकार ने इस बजट में नकद के रूप में राहत देने के लिए ऐसी योजना प्रस्तुत की है जिसके तहत किसानों का आर्थिक बोझ कम करने के लिए उनके खातों में नकद रकम हस्तांतरित की जाएगी। कृषि कर्ज का लक्ष्य बढ़ाया गया है। नए बजट में सरकार ने दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को छह हजार रुपए सालाना देने का एलान किया, जो उनके खाते में सीधे जमा हो जाएगा। सरकार यह रकम तीन किस्तों में देगी। इससे बारह करोड़ किसानों को सीधा लाभ होगा।

नया बजट राजकोषीय घाटे का है। लेकिन मध्यम वर्ग को जो सौगातें दी गई हैं, उससे बचत और निवेश में वृद्धि होगी। सरकार ने बजट में आयकर छूट की सीमा को ऐतिहासिक रूप से बढ़ाया है। कर छूट की सीमा ढाई लाख रुपए से बढ़ा कर पांच लाख रुपए कर दी है। इससे तीन करोड़ छोटे आयकरदाताओं को फायदा होगा। निवेश करने पर साढ़े छह लाख रुपए तक कोई आयकर नहीं लगेगा। सावधि जमा पर चालीस हजार रुपए तक के ब्याज पर कर नहीं देना होगा। मानक छूट चालीस हजार रुपए से बढ़ा कर पचास हजार रुपए की गई है। तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था का लाभ कामगारों और विभिन्न सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को देने के लिए बजट में प्रावधान बढ़ाए गए हैं। कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान सीमा दस लाख रुपए से बढ़ा कर बीस लाख रुपए की गई है। मजदूरों का बोनस सात हजार रुपए किया गया है। नए बजट के तहत ईपीएफओ की बीमा राशि छह लाख रुपए की गई है। इससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की मौत पर छह लाख रुपए का मुआवजा सुनिश्चित किया गया है। 60 साल की उम्र के बाद तीन हजार रुपए की पेंशन, 15 हजार वेतन वाले मजदूरों के लिए पेंशन और सौ रुपए महीने के अंशदान पर बोनस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

नए अंतरिम बजट के तहत रियल एस्टेट को प्रोत्साहन दिखाई दिया है। स्टार्टअप के लिए नई सुविधाएं दी गई हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, छोटे उद्योग-कारोबार और कौशल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट आबंटन बढ़ाया गया है। उज्ज्वला योजना के तहत दो करोड़ और मुफ्त गैस कनेक्शन के प्रावधान हैं। ऐसे विभिन्न प्रावधानों से आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ेगी और उद्योग-कारोबार को गतिशीलता मिलेगी।

चूंकि 2019-20 का अंतरिम बजट आम चुनाव के पहले का आखिरी बजट था, अतएव इसे लोकलुभावन बनाया गया है। निश्चित रूप से इस बजट को लोकलुभावन बनाने के लिए सरकार राजकोषीय घाटे संबंधी कठोरता से कुछ पीछे हटी है। आगामी वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 फीसद तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। चालू वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसद तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह भी तय लक्ष्य से ज्यादा होता दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.24 लाख करोड़ रुपए रखा गया था, जो दिसंबर 2018 के अंत तक 7.01 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो बजट अनुमान से करीब 12.4 फीसद ज्यादा है। स्पष्ट है कि चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पिछले नौ महीनों में जो राजकोषीय घाटा ऊंचाई पर पहुंच गया है उसे पाटा जाना मुश्किल है।

उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष के दिसंबर माह तक यानी पहले नौ महीनों में जहां प्रत्यक्ष कर संग्रह में साढ़े चौदह फीसद की बढ़ोतरी हुई है, वहीं अप्रत्यक्ष कर संग्रह पिछले साल के बराबर बना हुआ है। व्यय की तुलना में राजस्व पर दबाव ज्यादा दिख रहा है। प्रत्यक्ष कर के तहत कॉरपोरेट कर संग्रह चौदह फीसद बढ़ कर दिसंबर के अंत तक 4.27 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए 3.75 लाख करोड़ रुपए की तुलना में ज्यादा है। वहीं आयकर संग्रह में 15.2 फीसद की बढ़ोतरी हुई है और यह पिछले साल के 2.62 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 3.02 लाख करोड़ रुपए हो गया है। दिसंबर के अंत तक केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) संग्रह 3.4 लाख करोड़ रुपए रहा है। जनवरी तक कुल संग्रह 3.76 लाख करोड़ रुपए रहा। इससे पता चलता है कि फरवरी और मार्च 2019 में सीएसजीटी संग्रह से 1.28 लाख करोड़ रुपए की वसूली की जरूरत है, जिससे 5.04 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा हो सके। गैर कर राजस्व बजट के लक्ष्य का साठ फीसद हुआ है। दिसंबर के अंत तक विनिवेश प्रक्रिया से 34215 करोड़ रुपए आए, जबकि लक्ष्य अस्सी हजार करोड़ रुपए का रखा गया है।

इसमें कोई दो मत नहीं कि चालू वित्त वर्ष में सरकार वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण देश के राजकोषीय घाटे की बढ़ती चिंताओं को समझ रही है। इसीलिए कमजोर हुए रुपए की वजह से सरकार लगातार अपने जमा और खर्च की समीक्षा करती रही है। इस दौरान कई कम जरूरी खर्चों पर नियंत्रण किया गया और कई क्षेत्रों में आमदनी बढ़ाने का भी प्रयास हुआ। अब सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में यानी फरवरी और मार्च 2019 में होने वाले गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगाने की रणनीति भी बनाई है। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अपना उधारी कार्यक्रम पहले ही सत्तर हजार करोड़ रुपए घटा कर 6.05 लाख करोड़ रुपए कर चुकी है।

आगामी वित्त वर्ष में आमदनी की तुलना में खर्च तुलनात्मक रूप से अधिक होंगे, क्योंकि विभिन्न उम्मीदों और वादों को पूरा करने के लिए अधिक धन की जरूरत होगी। लेकिन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राजकोषीय घाटे के आकार में कुछ वृद्धि उपयुक्त ही कही जा सकती है। ऐसे सीमित राजकोषीय घाटे से एक ओर आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे नई मांग का निर्माण होगा, उद्योग-कारोबार की गतिशीलता बढ़ेगी और बढ़े हुए सार्वजनिक व्यय और सार्वजनिक निवेश से बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। लेकिन यह अत्यंत जरूरी है कि सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के शुरू से ही रणनीति के साथ आगे बढ़े। यदि सरकार राजकोषीय घाटे को लक्ष्य के अनुरूप जीडीपी के 3.4 फीसद के स्तर पर बनाए रखने में सफल होगी, तो यह सरकार की बड़ी उपलब्धि होगी।

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