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आर्थिक घेरेबंदी में पाक

पिछले दिनों भारत ने पाकिस्तान पर जो आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, उनसे भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। पुलवामा हमले के तत्काल बाद भारत ने पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीह वाले देश (एमएफएन) का दर्जा छीन लिया था। इसके बाद पाकिस्तान से आयात होने वाली सभी वस्तुओं पर दो सौ फीसद का आयात शुल्क लगा दिया था। इसका पाक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (AP/PTI)

जयंतीलाल भंडारी

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच दुनिया के अर्थविशेषज्ञों और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत ने बालाकोट में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके पुलवामा आतंकी हमले का जो बदला लिया है उससे पूरी दुनिया में भारत की तस्वीर एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी है। अब भारत को पूरी ताकत से पाकिस्तान पर आर्थिक प्रहार करने होंगे। बीस वर्ष पहले करगिल युद्ध के दौरान दोनों देशों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी। अब बीस वर्ष बाद भारत पाकिस्तान से किसी भी युद्ध की स्थिति में आर्थिक दृष्टिकोण से बहुत मजबूत स्थिति में है। भारत तो युद्ध के भारी-भरकम खर्चों को वहन कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान ऐसी स्थिति में नहीं है। यही वह कारण है जिससे पाकिस्तान भारत के सामने घुटने टेकते हुए दिखाई दे रहा है।

निश्चित रूप से यदि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ तो यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला होगा। करगिल युद्ध के दौरान प्रत्येक देश को करीब पंद्रह करोड़ रुपए रोजाना का खर्च आया था। करगिल युद्ध कश्मीर के एक छोटे क्षेत्र तक ही सीमित था, इसलिए यह खर्च इतना था। लेकिन अब रक्षा विशेषज्ञों का कहना है की जिस तरह बहुत बड़े क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भारत-पाक युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ रही है, उसमें प्रत्येक देश के लिए दस हजार करोड़ रुपए प्रति सप्ताह तक खर्च हो सकता है। इस समय भारत का वार्षिक रक्षा बजट पाकिस्तान से पांच गुना ज्यादा है। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से काफी बेहतर और मजबूत है। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से करीब नौ गुना बड़ी है और भारत से होने वाला निर्यात पाकिस्तान की तुलना में करीब दस गुना अधिक हैं। ऐसे में युद्ध होने की दशा में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी।

पाकिस्तान इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट में है, एक तरह से दिवालिया जैसी स्थिति में पहुंच चुका है। विकास दर चार फीसद से भी कम है और विदेशी मुद्रा भंडार 17 अरब डॉलर से भी कम है। उसने आर्थिक मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से गुहार लगाई है। दिसंबर 2017 से अब तक पाकिस्तानी रुपए का चार बार अवमूल्यन हो चुका है। चीन सहित कई विदेशी संस्थाओं पर बहुत अधिक आर्थिक निर्भरता ने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से कमजोर बना दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान के पास अपने आयात बिलों का भुगतान करने के लिए विदेशी जमा पूंजी भी नहीं बची है। पाकिस्तान का निर्यात कम है और आयात इसका लगभग दोगुना है। पाकिस्तान पेट्रोलियम, औद्योगिक सामान और खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं जबकि पाकिस्तान से निर्यात होने वाले कपास और सूत की कीमत लगातार घट रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को मिलने वाली दी जाने वाली अमेरिकी मदद काफी कम कर दी है और अगले साल भी इसमें और कटौती की धमकी दी है। चीन से मिल रहे कर्ज पर भी पाकिस्तान को खासा ब्याज देना पड़ रहा है। कुल मिला कर पाकिस्तान की माली हालत बदतर हो चुकी है। नकारात्मक छवि की वजह से पाकिस्तान में विदेशी निवेश लगातार घट रहा है। ऐसे में रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान छह दिन के युद्ध की आर्थिक लागत भी नहीं उठा पाएगा।

दूसरी ओर भारत पाकिस्तान की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है। भारत में विदेशी निवेश बढ़ रहे हैं। इस समय जहां भारत के विदेशी मुद्रा कोष में चार सौ अरब डॉलर संचित हैं, वहीं सात फीसद से अधिक विकास दर के साथ भारत दुनिया का सबसे अधिक विकास दर वाला देश है और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 के अंत में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2.6 लाख करोड़ डॉलर (178.59 खरब रुपए) हो गया। ऐसे में जीडीपी के आंकड़ों के आधार पर भारत फ्रांस को पछाड़ कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। विश्व बैंक का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भारत की अर्थव्यवस्था में अच्छा सुधार हुआ है। भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेतक हैं। जाहिर है, भारत तो फिर भी एक बार युद्ध का खर्च झेल सकता है, लेकिन पाकिस्तान इसमें आर्थिक रूप से तबाह हो जाएगा।

पिछले दिनों भारत ने पाकिस्तान पर जो आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, उनसे भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी। पुलवामा हमले के तत्काल बाद भारत ने पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीह वाले देश (एमएफएन) का दर्जा छीन लिया था। इसके बाद पाकिस्तान से आयात होने वाली सभी वस्तुओं पर दो सौ फीसद का आयात शुल्क लगा दिया था। इसका पाक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। भारत के आर्थिक प्रतिबंधों के बाद पाकिस्तान में महंगाई दर आठ फीसद से अधिक हो गई है। जनवरी में यह सात फीसद के लगभग थी। लेकिन भारत पर पाकिस्तानी सामान का आयात घटने का अधिक दबाव नहीं पड़ा है। जो वस्तुएं पाकिस्तान से भारत आती हैं, वे अधिकांश वस्तुएं अब सरलता से और किफायती दामों पर अफगानिस्तान से भारत आ सकेंगी। अफगानिस्तान ने 24 फरवरी, 2019 से ईरान के चाबहार बंदरगाह से भारत को निर्यात शुरू कर दिया है। भारत में महंगाई नियंत्रित है। यह चार फीसद के लगभग ही है। पाकिस्तान से आयात बंद होने पर भारत में महंगाई नहीं बढ़ी है।

पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए भारत ने नदियों का पानी रोकने की भी चेतावनी दी है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि 1960 में हुए सिंधु जल समझौते के कारण पाकिस्तान को जो लाभ हो रहे हैं, उन्हें भी रोका जाएगा। इससे पाकिस्तान चिंतित है। एक मार्च को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर कहा है कि भारत के द्वारा पानी को हथियार के रूप में उपयोग करने से पाकिस्तान के सामने पीने के पानी व कृषि व उद्योग के लिए संकट खड़ा होगा। यदि भारत अब आतंकी हमले और शत्रुता के मद्देनजर सिंधु जल समझौते को तोड़ दे तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।

इन सबके अलावा यदि भारत पाकिस्तान रहित एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोआॅपरेशन (सार्क) के साथ-साथ पाकिस्तान रहित साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया (साफ्टा) की संभावना को आगे बढ़ाएगा और म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान को मिला कर गठित समूह बिम्सटेक (बे आॅफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टर टेक्नीकल एंड इकोनॉमिक कोआॅपरेशन) को बढ़ावा देगा, तो पाकिस्तान का पड़ोसी देशों के साथ कारोबार घटेगा और यह भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती होगी। निश्चित रूप से पाकिस्तान के घोर आतंकवादी रवैये को भारत के आर्थिक विकास की शक्ति, कूटनीति और भारतीय सेना के शौर्य ने रोका है। इस समय हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि जिस तरह दोनों विश्व युद्धों का अंतिम फैसला युद्ध से नहीं आर्थिक शक्ति व कूटनीति की बिसात पर हुआ था, इसी तरह यदि हम पाकिस्तान से एक और युद्ध जीत भी लें तो भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का समाधान नहीं निकलेगा। इसलिए अब पाक को पूरी तरह से परास्त करने के लिए उसके खिलाफ विभिन्न आर्थिक रणनीतियों और प्रतिबंधों और सतर्क व स्पष्ट कूटनीति की डगर पर आगे बढ़ने की जरूरत है।

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