ब्रह्मांड की उलझी गुत्थियां

वैज्ञानिक परिकल्पना कहती है कि अदृश्य पदार्थ और ऊर्जा ही इस ब्रह्मांड का आधार है। इन पदार्थों की कोई विकसित समझ हमारे पास अब तक नहीं है। इसको समझ पाने का कोई ठोस आधार भी हमें अब तक नहीं मिला है। पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन पदार्थ का अस्तित्व नहीं होता।

Jansatta Editorial page
आजकल वैज्ञानिकों के बीच ब्रह्मांड में व्याप्त ऐसी अदृश्य ऊर्जा (डार्क एनर्जी) और अदृश्य पदार्थ (डार्क मैटर) पर बहस चल रही है। हालांकि अदृश्य ऊर्जा की परिकल्पना अल्बर्ट आइंस्टीन ने बहुत पहले ही कर ली थी। उनके सिद्धांतों में ‘डार्क एनर्जी’ की भी जगह थी। हालांकि वे खुद इसके बारे में संशकित थे।

निरंकार सिंह
हमारा ब्रह्मांड कैसे और कब बना, इस रहस्य की गुत्थी आज भी अनसुलझी ही है। आजकल वैज्ञानिकों के बीच ब्रह्मांड में व्याप्त ऐसी अदृश्य ऊर्जा (डार्क एनर्जी) और अदृश्य पदार्थ (डार्क मैटर) पर बहस चल रही है। हालांकि अदृश्य ऊर्जा की परिकल्पना अल्बर्ट आइंस्टीन ने बहुत पहले ही कर ली थी। उनके सिद्धांतों में ‘डार्क एनर्जी’ की भी जगह थी। हालांकि वे खुद इसके बारे में संशकित थे। उन्होंने इसे अपनी एक ‘भूल’ भी माना था।

दरअसल डार्क एनर्जी ऐसी अनजानी ऊर्जा को माना गया है कि जिसकी वजह से ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है और आकाशीय पिंड एक-दूसरे से दूर जा रहे हैं। वैज्ञानिक मानते थे कि हमारे ब्रह्मांड का सत्तर फीसद हिस्सा इसी ऊर्जा से बना है। हालांकि यह ऊर्जा क्या है किसी को नहीं पता। कई वैज्ञानिक हजारों-लाखों प्रकाश वर्ष दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन करके इस अनजानी ऊर्जा और इसके गुणों को जांचने की कोशिश कर रहे हैं। जो तथ्य और आंकड़े मिले हैं, उनसे साबित होता है कि जिसे आइंस्टीन ‘भूल’ मानते थे, वह भी उनकी प्रतिभा का एक कमाल था जो आज सच साबित हो रहा है।

दरअसल अभी तक खगोलविद और भौतिक विज्ञानी डार्क मैटर की व्याख्या नहीं कर सके हैं। यह रहस्यमय पदार्थ ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं से लेकर कॉस्मिक तरंगों तक हर महान संरचना के द्रव्यमान का अस्सी फीसद से अधिक बनाता है। एक रोमांचक संभावना यह है कि ब्लैक होल से डार्क मैटर की उत्पत्ति होती है। डार्क मैटर की तरह ब्लैक होल से कोई प्रकाश नहीं निकलता है। ब्लैक होल डार्क मैटर के लिए एक प्राकृतिक व्याख्या है। लेकिन खगोलविद लंबे समय से जानते हैं कि तारकीय द्रव्यमान वाले सामान्य ब्लैक होल ब्रह्मांड के काले पदार्थ की व्याख्या नहीं कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्मांड के इतिहास में ज्ञात डार्क मैटर के लिए पर्याप्त ब्लैक होल बनाने के लिए पर्याप्त तारे नहीं बने हैं।

ब्रह्मांड में ब्लैक होल एक ऐसा रहस्यमय पिंड माना जाता है जो गुरुत्वाकर्षण को बढ़ाता है, लेकिन प्रकाश के साथ बातचीत नहीं करता। यह छोटे-छोटे कणों से बना हो सकता है। पर अब एक नए सिद्धांत के अनुसार ब्लैक होल क्वांटम पैकेटों से बने हो सकते हैं जो उप-परमाणु कणों के साथ होते हैं और जिन्हें फर्मियन के रूप में जाना जाता है। ये ब्रह्मांड के बचपन के दौरान तंग पैकेटों में एक साथ लिप्त हो गए माने जाते हैं। ब्रह्मांड में शुरुआती क्षणों ने एक सुंदर आश्चर्यजनक काया की पेशकश की। हो सकता है कि उस समय यही चल रहा था, जिससे अरबों-खरबों छोटे ब्लैक होल बनते रहे होंगे। ये ब्लैक होल आज तक बने रह सकते हैं और संभवत: डार्क मैटर की पहेली को सुलझा सकते हैं।

अब पता चला है कि अंतरिक्ष का पनचानवे फीसद हिस्सा अदृश्य पदार्थ और ऊर्जा से मिल कर बना है। बाकी पांच फीसद हिस्सा भौतिक पदार्थों से। इनमें ग्रह, नक्षत्र, तारे वे सभी आते हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि यह अदृश्य पदार्थ और ऊर्जा ही वह कड़ी है, जिसने इस पूरे ब्रह्मांड को एक सिलसिलेवार ढंग से बांध रखा है। डार्क मैटर ऐसे पदार्थों से मिल कर बने हैं जो प्रकाश को सोख, छोड़ और परावर्तित नहीं करते। इस कारण अब तक के साधनों के बल पर इसे देख पाना संभव नहीं है।

वैज्ञानिक परिकल्पना कहती है कि यह अदृश्य पदार्थ और ऊर्जा ही इस ब्रह्मांड का आधार है। इन पदार्थों की कोई विकसित समझ हमारे पास अब तक नहीं है। इसको समझ पाने का कोई ठोस आधार भी हमें अब तक नहीं मिला है। पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन पदार्थ का अस्तित्व नहीं होता।

अब तक के शोधों से यह पता चला है कि गुरुत्वीय बंधन ऊर्जा के साथ ब्रह्मांड में ग्रहों, तारों और आकाशगंगा का अंतरजोड़ स्थापित नहीं हो सकता था। कुछ और ही अज्ञात चीज है जो इन्हें थाम रही है। वरना अब तक गुरुत्वाकर्षण कमजोर हो गया होता और सभी ग्रह, नक्षत्र तारे अपने परिक्रमा पथ से भटक गए होते। पर आज ये सभी स्थिर हैं। ऐसा क्यों है? ऐसा तभी हो सकता है जब इस ब्रह्मांड में हमारे द्वारा निरीक्षण किए गए द्रव्यमान से पांच गुना अधिक द्रव्यमान हो। यहीं से अदृश्य पदार्थ यानी डार्क मैटर की अवधारणा सामने आई। यह डार्क मैटर ही है जो ब्रह्मांड को द्रव्यमान दे रहा है।

येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीटर डोककुम ने अपनी टीम के साथ ड्रैगन फ्लाई 44 नामक आकाशगंगा का अध्ययन किया। इसमें उन्होंने पाया कि एक बड़ी आकाशगंगा होने के बावजूद ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि इसमें कम तारे हों? कम तारों के साथ भी यह आकाशगंगा स्थिर थी। ये काफी चैकाने वाला विषय था, क्योंकि तारे कम होंगे तो आकाशगंगा के भीतर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कम होगा। कम गुरुत्वाकर्षण के चलते तारे आकाशगंगा के भीतर टिक नहीं सकते। ऐसे में वे पथ से भटक जाएंगे।

डोककुम और उनकी टीम ने यह अनुमान लगाया हो न हो, पर कुछ ऐसा जरूर है जो इस आकाशगंगा को स्थिर रख रहा है। उनके प्रयोगों की जांच के जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। इस आकाशगंगा का लगभग 0.01 फीसद भाग ही सामान्य पदार्थों से मिल कर बना था, बाकी 99.99 भाग डार्क मैटर ने घेर रखा था।

खगोलशास्त्रियों का मानना है कि डार्क मैटर नॉन ब्रायोनिक पदार्थों से बने होते हैं। ब्रायोनिक पदार्थ में इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन, न्यूट्रॉन आते हैं। एक अर्थों में ब्रायोनिक पदार्थ वे हैं जिन्हें हम देख सकते हैं। वहीं दूसरी और नॉन ब्रायोनिक पदार्थ के विषय में हम कुछ भी नहीं जानते। इन्हीं नॉन ब्रायोनिक पदार्थों में एक पदार्थ आता है विंप पार्टिकल अर्थात वीकली इंट्रेक्टिंग मैसिव पार्टिकल। मान्यता है कि विंप पार्टिकल से ही डार्क मैटर बनते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि डार्क मैटर आकाशगंगाओं का ऐसा समूह हैं, जहां पर भौतिकी के दूसरे नियम काम करते हैं।

वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर कई सिद्धांत दिए हैं। इनमें से एक के अनुसार ब्रह्मांड की शुरुआत एक बहुत ही गर्म और घने वातावरण के साथ हुई। ये चरम स्थितियां कुछ भौतिक प्रक्रियाओं की अनुमति देती हैं जो आज के ब्रह्मांड में सामान्य परिस्थितियों में नहीं होती हैं। पहला घटक एक अदृश्य क्षेत्र कहलाता है, जो एक क्वांटम यांत्रिक अवस्था है जो पूरे स्थान को घेरता है। प्रसिद्ध हिग्स क्षेत्र, जो पदार्थ को उसका द्रव्यमान देता है, इसका एक उदाहरण है। जैसे-जैसे ब्रह्मांड का विस्तार होता गया और यह ठंडा पड़ता गया, इस अद्वश्य क्षेत्र में एक चरण के बाद संक्रमण हुआ जो एक क्वांटम यांत्रिक अवस्था से दूसरे में परिवर्तित हो गया।

यह संक्रमण पूरे ब्रह्मांड में एक बार में नहीं हुआ। इसके कुछ बिंदु थे जहां से संक्रमण शुरू हुआ और फिर फैल गया। तेजी से बदलते ब्रह्मांड में छोटे-छोटे पैकेट में जकड़े हुए, बड़ी संख्या में ब्लैक होल का निर्माण करते हुए, फर्मियन की गांठें भयावह रूप से ढह गईं। ये ब्लैक होल तब चरण संक्रमण के अंत तक जीवित रहे और ब्रह्मांड को डार्क मैटर के रूप में बढा़ते रहे। यह एक क्रांतिकारी प्रस्ताव है।

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