ताज़ा खबर
 

काला धन, कानून और राजनीति

रवि शंकर काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (नया कर) विधेयक को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है। इस विधेयक से विदेशों में जमा काले धन पर कड़े कानून का रास्ता साफ हो गया है। इसके अलावा, बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) संशोधन वर्ष 1988 […]

Author June 17, 2015 5:53 PM

रवि शंकर

काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (नया कर) विधेयक को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है। इस विधेयक से विदेशों में जमा काले धन पर कड़े कानून का रास्ता साफ हो गया है। इसके अलावा, बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) संशोधन वर्ष 1988 के कानून की जगह लेगा। नए कानून के जरिए सरकार की कोशिश है कि रियल एस्टेट और सोने की खरीदारी में बेनामी रूप से हो रहे लेन-देन पर लगाम लगाई जाए, जिससे काले धन का इस्तेमाल देश में कम हो सके। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि विधेयक में विदेशों में रखी अघोषित संपत्ति की घोषणा करने वालों को राहत देने का भी प्रावधान है। जो लोग बेदाग निकलना चाहते हैं वे संपत्ति की घोषणा करें। गौरतलब है कि मोदी सरकार इस कानून को लागू कर काले धन को लेकर उस पर हो रहे विपक्ष के हमले कादबाव कम करना चाहती है।

इस विधेयक में विदेश में काला धन छिपाने वालों को दस साल तक की सजा और नब्बे फीसद का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। यह जुर्माना उस पर लगने वाले तीस प्रतिशत कर के अतिरिक्त होगा। नए विधेयक के तहत काला धन जमा करने वालों के अलावा इसमें संलिप्त बैंकों, चार्टर्ड एकाउंटेंटों, निदेशकों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही नए कानून में यह प्रावधान भी है कि रिटर्न फाइल करने में संपत्ति की जानकारी छिपाने पर सात साल तक की सजा होगी।

इस विधेयक में एक छोटी अवधि की राहत दिए जाने का प्रावधान है, जिसमें आयकरदाता विदेशों में जमा धन और संपत्ति की जानकारी देने के साथ ही कर और जुर्माना चुका कर जेल जाने से बच सकेंगे। हालांकि यह मोहलत कुछ महीनों की है और इस दौरान काला धन घोषित करने वालों को कर और पेनाल्टी मिला कर करीब साठ फीसद का जुर्माना देना पड़ सकता है, जिससे उनका कम से कम चालीस फीसद धन बच जाएगा। इस योजना का फायदा उठाने वालों को बाद में वेल्थ टैक्स, कंपनी कानून, सीमा शुल्क कानून या फेमा कानून का सामना नहीं करना होगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसे माफी योजना न माना जाए, क्योंकि आर्थिक दंड लगाया जा रहा है।

इसके पहले वर्ष 1997 में तत्कालीन संयुक्त मोर्चा सरकार ने काले धन का खुलासा करने के लिए इस तरह की योजना चलाई थी। उसके बाद से अब तक कई बार इस बारे में विचार किया गया, लेकिन राजनीतिक वजहों से लागू नहीं किया गया। वहीं नए कानून के तहत कर चोरी के मामलों को भी धनशोधन (मनी लांड्रिंग) निरोधक कानून, 2002 के तहत अपराध माना जा सकेगा। यानी कर चोरी के मामलों में मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।

साफ है, सरकार विदेश में काला धन जमा करने वाले व्यक्तियों और इस काम में उनके मददगार बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर अंकुश लगाने की पूरी तैयारी कर रही है। इसके तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के उन कर्मचारियों को सात साल तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है, जो कर-चोरी करने और विदेश में संपत्ति छिपाने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, इस कानून में उन कंपनियों के शीर्ष अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का प्रावधान है, जो कर चोरी करने और विदेश में काला धन जमा करने के लिए अपने मातहतों पर प्रभाव डालते हैं। एसआइटी के गठन और अब इस विधेयक को पेश कर मोदी सरकार ने साबित किया है कि काले धन से संबंधित अपने चुनावी वादे को लेकर वह गंभीर है।

उल्लेखनीय है कि भारत ने वैश्विक स्तर पर समयबद्ध रूप में कर संबंधी सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की वकालत की है, जिस पर जी-20 देशों ने भी सहमति जताई है। पिछले साल नवंबर में जी-20 के ब्रिसबेन शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने नए वैश्विक पारदर्शिता मानकों का समर्थन किया था, जिसके तहत विभिन्न देश एक साझा रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड 2017-18 द्वारा कर संबंधी सूचनाओं का आपस में आदान-प्रदान करेंगे।

खैर, विदेशी बैंकों में भारत का कितना काला धन जमा है, इस बात के अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़े सरकार के पास मौजूद नहीं हैं, लेकिन अनुमान के मुताबिक यह 466 अरब डॉलर से लेकर 1400 अरब डॉलर हो सकता है। जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ पब्लिक फाइनेंस ऐंड पॉलिसी की साल 2014 की रिपोर्ट के अनुसार भारत के जीडीपी का इकहत्तर फीसद के करीब काला धन है। स्विस बैंक में खाता खोलने के लिए न्यूनतम जमा राशि पचास करोड़ रुपए बताई जाती है।

इतनी मोटी रकम जमा करने वाले व्यक्ति की आय के स्रोत कैसे होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी बात यह कि अभी तक विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत वापस लाने के लिए हमारे पास ठोस कानून और सरकारी इच्छाशक्तिदोनों नहीं हैं और न ही निकट भविष्य में यह होने वाला है, क्योंकि कानून बनाने वाले हमारे राजनेताओं, कानून का पालन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और कानून बनवाने और तोड़ने में अहम भूमिका रखने वाले उद्योगपतियों का ही विदेशी बैंकों में काला धन जमा है। ऐसे में कोई सरकार काले धन के खिलाफ एक हद से आगे शायद नहीं जा सकती, क्योंकि सच्चाई का पता चलते ही कई बड़े चेहरों से नकाब हट जाएगा और उनकी गुनाहों की सूची बहुत लंबी होगी, जिसके लिए उनपर आपराधिक मुकदमे भी शुरू हो जाएंगे।

लोगों के मन में सवाल उठता रहता है कि भारत से काला धन स्विस बैंक में पहुंचता कैसे है और वह किसका पैसा होता है? दरअसल, हमारे देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत फैली हुई हैं। कोई भी काम करवाने के लिए रिश्वत देने और लेने का चलन है। काले धन की समस्या से भारत ही नहीं परेशान है, बल्कि पूरा विश्व इस समय काले धन की मार से काजल की कोठरी हुआ जा रहा है। इसलिए भारत अगर प्रबल इच्छाशक्ति के साथ स्विट्जरलैंड सरकार से उसके यहां के बैंकों में जमा भारतीयों के धन और खातोें के बारे में जानकारी मांगे तो स्विट्जरलैंड को जानकारी देनी ही पड़ेगी, और जो वैश्विक स्तर पर माहौल बनेगा उसको देखते हुए गुनहगार बच नहीं पाएंगे। साथ ही भारत को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विजय भी प्राप्त होगी।

काले धन का मुद्दा वर्ष 2009 के आम चुनाव से ही भारत में छाया रहा है। तब के चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने इसे मुद्दा बनाया था। बाद में वर्ष 2010 में अण्णा हजारे और उनके बाद बाबा रामदेव के आंदोलन से यह एक प्रमुख राष्ट्रीय मुद््दा बन गया। यूपीए सरकार की तरफ से न सिर्फ छह समितियां बनाई गर्इं, बल्कि कई कानून भी बनाने की घोषणा हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर काले धन को रोकने या विदेश में भारतीयों के जमा धन को लाने को लेकर कोई ठोस प्रयास नहीं हुए। बहरहाल, संसद के पिछले सत्र में पारित विधेयक से लगता है कि काले धन पर नकेल कसने के लिए वाकई अच्छा कदम उठाया गया है। लेकिन कई सवाल भी हैं। यह विधेयक कितना कारगर होगा। घरेलू काले धन का क्या होगा? राजनीतिक पार्टियों के चुनावी चंदे में जो काला धन आता है उसे कैसे रोका जाएगा?

जिन लोगों ने विदेशी बैंकों में काला धन जमा किया है वे आम भारतीय नहीं हैं। काला धन जमा करने वालों में देश के बड़े-बड़े नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा बॉलीवुड और खेल जगत की शख्सियतें भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि सरकार का तर्क था कि दोहरे कराधान से बचाव की संधि (डीटीएए) की वजह से विदेशी बैंकों में जमा काले धन के खाताधारकों के नाम उजागर नहीं किए जा सकते। जबकि 2011 की शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि डीटीएए खाताधारकों के नाम जाहिर करने से किसी भी तरह से नहीं रोकता। यूपीए सरकार ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जबकि मौजूदा सरकार ने इसे गलत समझा। अदालत ने इसे स्पष्ट करते हुए नए आदेश जारी किए हैं।

मोदी ने वादा किया था, वे सौ दिन के भीतर काला धन वापस लाएंगे। लेकिन इसमें पांच से सात साल लग सकते हैं। फिलीपींस, पेरू, नाइजीरिया आदि देशों का उदाहरण देखें तो वहां काले धन को देश में वापस लाने में पांच से दस साल लग गए। विदेशी बैंकों में जो काला धन जमा है वह इस देश की साधारण जनता का है; गरीबों, किसानों, कुलियों और मजदूरों का है। इसलिए इस विषय पर लोग सोशल मीडिया यानी फेसबुक और ट्विटर पर काफी सक्रिय हैं।

इतनी सक्रियता बोफर्स के समय में भी नहीं थी। अब सरकार की हर कार्रवाई पर जनता की नजर है। हालांकि काले धन के आंकड़ों और काला धन वापस लाने को लेकर मीडिया को सवाल करने चाहिए थे, लेकिन जादुई चुनावी अभियान में सारे तथ्य बह गए। सुप्रीम कोर्ट काले धन को लेकर काफी सक्रिय है और एसआइटी के काम पर नजर रख रहा है। जैसा कि मोदी ने मांगा था, लोगों ने भाजपा को मौका दिया। लेकिन वे कोई नाटकीय बदलाव लाने में सफल नहीं हुए।

वे जगहें, जहां टैक्स चोरों को बेझिझक शरण दी जाती है, जिन्हें अंगरेजी में ‘टैक्स हैवन’ कहते हैं, वहां की अर्थव्यवस्था इसी के भरोसे चलती है। फिर जिनका काला धन वहां जमा है वे अपने देश में रसूख वाले लोग हैं, इसलिए इस रकम की वापसी की राह में वे तमाम रोड़े अटकाएंगे। नरेंद्र मोदी चुनाव अभियान के जोश में हर गरीब भारतीय के खाते में पंद्रह लाख रुपए आने की बात कह गए थे, जिसे अब ‘चुनावी जुमला’ कहा जा रहा है। लेकिन देश के भीतर काले धन के स्रोतों और प्रवाह को बंद करने के लिए तो किसी और देश का मुंह नहीं जोहना है। फिर, कार्रवाई क्यों नहीं होती? राजनीतिक दलों को अपने आय के सारे स्रोत बताने के लिए कानूनी बाध्यता के प्रावधान क्यों नहीं किए जा रहे हैं?

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App