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राजनीति: आइटी क्षेत्र में नई संभावनाएं

भारत में आइटी की नई सिलिकॉन वैली बनने की क्षमता और उससे अच्छे रोजगार की संभावनाओं से संबंधित विश्व बैंक की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और ब्रिटेन सहित दुनिया के कुछ विकसित देश भारतीय आइटी पेशेवरों के कदमों को रोकना चाहते हैं। लेकिन आइटी क्षेत्र में भारत के लिए नई संभावनाओं के कई कारण स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

Author May 7, 2018 03:32 am
श्विक संगठन मैकिंसे की एक रिपोर्ट के अनुसार बंगलुरु 2020 तक सिलिकॉन वैली को पछाड़ कर दुनिया का सबसे बड़ा आइटी हब होगा।

जयंतीलाल भंडारी

यकीनन इस समय भारत के आइटी परिदृश्य पर चमकीली संभावनाएं उभर कर दिखाई दे रही हैं। इस तेईस अप्रैल को भारत की सबसे बड़ी आइटी कंपनी टीसीएस का बाजार पूंजीकरण सौ अरब डॉलर के पार पहुंच गया। इस कंपनी का बाजार मूल्य दुनिया के एक सौ अट्ठाइस देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक है। साथ ही टीसीएस दुनिया की चौंसठवीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। इसी तरह भारत की दूसरी आइटी कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही है। यकीनन इन दिनों देश और पूरी दुनिया के करोड़ों लोग हाल ही में प्रकाशित उन तीन नई वैश्विक रिपोर्टों को पढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं जिनमें भारत की उज्ज्वल आइटी संभावनाओं को पेश किया गया है। इन रिपोर्टों में सबसे महत्त्वपूर्ण विश्व बैंककी ओर से जारी की गई ताजा रिपोर्ट है। इसमें कहा गया है कि जिस तरह अमेरिका के शहर सैनजोस सिलिकॉन वैली ने पूरी दुनिया में सबसे बड़े आइटी हब के रूप में पहचान बनाई है, उसी तरह अब भारत आगामी पांच साल में दुनिया की नई सिलिकॉन वैली के रूप में पहचान बनाने की संभावनाएं रखता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसके लिए भारत नवोन्मेष के अनुकूल माहौल को विस्तार देने की पूरी संभावनाएं रखता है।

विश्व बैंक ने आगामी पांच वर्षों में भारत में नई सिलिकॉन वैली बनने की उम्मीद जताई है, वहीं वैश्विक संगठन मैकिंसे की एक रिपोर्ट के अनुसार बंगलुरु 2020 तक सिलिकॉन वैली को पछाड़ कर दुनिया का सबसे बड़ा आइटी हब होगा। इस समय बंगलुरु में दुनिया की शीर्ष एक सौ पांच कंपनियों में सात लाख से ज्यादा पेशेवर काम करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 तक बंगलुरु में बीस लाख से ज्यादा आइटी पेशेवर होंगे और बंगलुरु अस्सी अरब डॉलर की आइटी सेवाएं निर्यात करेगा। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि जापान के उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजंसी जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) ने अपनी रिपोर्ट 2018 में कहा कि नई औद्योगिक और कारोबारी आवश्कताओं के मद्देनजर जापान ने आगामी दो वर्षों में भारत से दो लाख आइटी पेशेवरों को लेने की कार्ययोजना बनाई है। ऐसे में निश्चित रूप से भारत पूरी दुनिया में आइटी की एक नई शक्ति के रूप में परचम फहराते हुए आगे बढ़ते हुए दिखाई दे सकेगा। भारत में आइटी की नई सिलिकॉन वैली बनने की क्षमता और उससे अच्छे रोजगार की संभावनाओं से संबंधित विश्व बैंक की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और ब्रिटेन सहित दुनिया के कुछ विकसित देश भारतीय आइटी पेशेवरों के कदमों को रोकना चाहते हैं। लेकिन आइटी क्षेत्र में भारत की नई संभावनाओं के कई कारण स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर आइटी क्षेत्र में भारत की धाक बरकरार है। वैसे तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कई और देश आइटी हब के रूप में उभर कर सामने आए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी इस क्षेत्र में भारत के वर्चस्व को चुनौती नहीं दे पा रहा है। जानी-मानी रिसर्च फर्म गार्टनर ने कहा है कि जैसे-जैसे दुनिया में नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ) यानी ज्ञान आधारित सेवा उद्योग की मांग तेजी से बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस उद्योग में भारत के कारोबार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। देश और दुनिया के आइटी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आउटसोर्सिंग पर खतरे नहीं हैं। दुनिया का कोई भी देश अपने उद्योग-व्यवसाय को किफायती रूप से चलाने के लिए भारत के आउटसोर्सिंग उद्योग को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

निसंदेह दुनिया में भारत को आउटसोर्सिंग के लिए सबसे सस्ता, सुरक्षित और गुणवत्ता वाला देश माना जा रहा है। आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भारत की प्रगति के पीछे एक कारण यह भी है कि यहां संचार का मजबूत ढांचा कायम हो चुका है। दूरसंचार उद्योग के निजीकरण से नई कंपनियों के अस्तित्व में आने से दूरसंचार की दरों में भारी गिरावट आई है। उच्च कोटि की त्वरित सेवा, आइटी विशेषज्ञ और अंगे्रजी में पारंगत युवाओं की बड़ी संख्या ऐसे कारण हैं, जिनकी बदौलत भारत पूरे विश्व में आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। कल तक जो भारत प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) से चिंतित रहता था, अब वह आइटी के क्षेत्र में प्रतिभा वापसी लाभ (ब्रेन गेन) से विकास की नई डगर पर तेजी से आगे बढ़ने की संभावनाएं रख रहा है। लेकिन इन सब भारतीय आइटी विशेषज्ञताओं के साथ भारत में नई सिलिकन वैली को आकार देने और भारतीय आइटी पेशेवरों की नई वैश्विक उपयोगिता बनाने के लिए हमें कई बातों पर ध्यान देना होगा। भारतीय आइटी कंपनियों के द्वारा तकनीक में बदलाव और कृत्रिम बौद्धिकता, रॉबोटिक्स और क्लाउड प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि ऐसे सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बढ़ाए जाएं जो बिना किसी अड़चन के चलें और इन्हें स्मार्टफोन जैसी डिवाइसों पर भी इस्तेमाल किया जा सके। चूंकि सॉफ्टवेयर उद्योग में हमारी अगुवाई की मुख्य वजह हमारी सेवाओं और प्रोग्रामों का सस्ता होना है। इसलिए इस स्थिति को बरकरार रखने के लिए हमें तकनीकी दक्ष लोगों की उपलब्धता बनाए रखनी होगी। भारतीय कंपनियों को आगे बढ़ कर अपनी क्षमता निर्माण को मजबूत करना होगा।
एक ऐसे क्षेत्र में जहां पुरानी आइटी तकनीक बहुत जल्दी बाजार से बाहर हो जाती है, वहां नई तकनीकों के साथ तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है। ऐसे में आइटी कंपनियों के द्वारा कर्मचारियों के डिजिटल तकनीक और डिजाइन थिंकिंग जैसे नए तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए, ताकि आइटी का कारोबारी माहौल बना रह सके और आइटी उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आइटी कंपनी से जुड़ने वाले हर युवा को केवल प्रोग्रामिंग के लिए ही नहीं, वरन विपणन (मार्केटिंग) और वित्त (फाइनेंस) के लिए भी कुछ सीखने की डगर पर बढ़ना होगा। भारतीय आइटी कंपनियों को समन्वित विशेषज्ञ सेवाओं की पेशकश भी करनी होगी।

यह जरूरी होगा कि सरकार के द्वारा आइटी क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण को दी जा रही प्राथमिकता के नतीजे धरातल पर दिखाई दें। इस परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के संगठन नैस्कॉम के साथ कृत्रिम बौद्धिकता (एआइ), वर्चुअल रियल्टी, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा एनालिसिस, 3डी प्रिटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, सोशल मीडिया-मोबाइल जैसे आठ नए तकनीकी क्षेत्रों में पचपन नई भूमिकाओं में नब्बे लाख युवाओं के अगले तीन साल में प्रशिक्षित करने का जो अनुबंध किया है, उसे कारगर तरीके से कार्यान्वित करना होगा। जरूरी होगा कि नैस्कॉम के द्वारा कौशल प्रशिक्षण के लिए विश्व के सबसे बेहतर कुशल प्रशिक्षकों और विषय-वस्तु मुहैया कराने वाली और वैश्विक स्तर की विभिन्न संस्थाओं से सहयोग लिया जाए। यदि देश में आइटी क्षेत्र के विकास से संबंधित इन सब बातों पर ध्यान दिया गया और आइटी क्षेत्र में इनोवेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई तो हम उम्मीद कर सकते हैं कि विश्व बैंक और मैकिंसे की रिपोर्टों में भारत में नई सिलिकॉन वैली बनने की जो संभावनाएं प्रस्तुत की गई हैं वे संभावनाएँ आइटी हब बेंगलुरू में मूर्तरूप लेंगी। साथ ही भारत पूरी दुनिया में आइटी की एक नई शक्ति के रूप में परचम फहराते हुए आगे बढ़ता हुआ दिखाई देगा।

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