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मानव तस्करी का फैलता जाल

आज विश्व में ऐसी लाखों महिलाएं या लड़कियां हैं जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वेश्यावृत्ति, पोर्नोग्राफी व यौन शोषण में धकेल दिया गया है। ये वे महिलाएं व किशोर आयु की लड़कियां हैं जिन्हें उनकी आर्थिक तंगी तथा अन्य मजबूरियों का लाभ उठा कर एक ओर तो तरह-तरह से बहकाया या भ्रम में रखा गया, तथा दूसरी ओर, उन्हें वश में रखने के लिए उन पर भयावह अत्याचार भी किए गए। पर इन्हें आज भी बचाया जा सकता है।

Author October 25, 2017 01:37 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।
भारत डोगरा
महिलाओं व बच्चों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) के विरुद्ध बार-बार आवाज उठने के बावजूद यह बढ़ती जा रही है। इसके संकेत हाल के कुछ अध्ययनों में मिले हैं। जापान के संदर्भ में सीया मोरिता ने अपने शोधपत्र में बताया है कि दक्षिणी-पूर्वी एशिया से जापान के सेक्स-बाजार के लिए पांच लाख से दस लाख बच्चों व महिलाओं को लाया गया। उपर्युक्त अध्ययन में इस तरह की मानव तस्करी को तैंतीस अरब डॉलर के मुनाफे का व्यापार बताया गया है, जबकि इसमें विदेशी ‘महिला गुलामों’ की स्थिति इतनी बुरी रही कि उनमें से अनेक ने आत्महत्या कर ली। पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर थाईलैंड, ब्राजील, नीदरलैंड, फिलीपीन्स में ऐसे कई बड़े अड््डे हैं जहां पर्यटक यौन-संबंधों के लिए या अश्लील शो देखने के लिए जाते हैं। ये अड््डे मानव तस्करी का जरिया भी होते हैं। यहां प्राय: अनेक माफिया भी सक्रिय रहते हैं। आज विश्व में ऐसी लाखों महिलाएं या लड़कियां हैं जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वेश्यावृत्ति, पोर्नोग्राफी व यौन शोषण में धकेल दिया गया है। ये वे महिलाएं व किशोर आयु की लड़कियां हैं जिन्हें उनकी आर्थिक तंगी तथा अन्य मजबूरियों का लाभ उठा कर एक ओर तो तरह-तरह से बहकाया या भ्रम में रखा गया, तथा दूसरी ओर, उन्हें वश में रखने के लिए उन पर भयावह अत्याचार भी किए गए। पर इन्हें आज भी बचाया जा सकता है।
विश्व में वेश्याओं व कालगर्ल की संख्या इससे कहीं अधिक है। यहां बात केवल जोर-जबर्दस्ती व बहकावे की शिकार उन महिलाओं की हो रही है जो इस ‘धंधे’ में कतई आना नहीं चाहती थीं, पर तरह-तरह के जाल-फरेब व अत्याचार ने उन्हें यहां पहुंचा दिया। उनकी पहचान करने और उन्हें इस शोषण के जाल से बचा कर अपने घर-परिवार या सुरक्षित आश्रय-गृह में पहुंचाने के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयास की जरूरत है। वैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह मानव तस्करी बहुत समय से चल रही है, पर हाल के वर्षों में विशेष कारणों से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। पहली वजह यह है कि सामाजिक बिखराव के दौर में वैवाहिक संबंधों से बाहर यौन-सुख पाने के लिए ‘सेक्स खरीदने’ की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सैक्स खरीदने वाले अधिकतर पुरुष विवाहित हैं। पैसा देकर सेक्स संबंध बनाने के अतिरिक्तअश्लील नाच-गाने वाले क्लब में जाने की प्रवृत्ति भी बहुत तेजी से बढ़ी है।
इस समय विश्व-स्तर पर यह व्यापार लगभग बीस अरब डॉलर का है। ‘कमाई’ के अतिरिक्त इस ‘धंधे’ में लगे व्यक्तिस्वयं भी अपनी शिकार महिलाओं का यौन शोषण करते हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि दसियों हजारों साधन-संपन्न अपराधी व सफेदपोश अपराधी इस अवैध व्यापार से जुड़े हैं।
जहां देह व्यापार संचालित करने वालों की ‘कमाई’ केअवसर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं कई देशों मेंबढ़ते आर्थिक संकट के कारण महिलाओं के लिए मजबूरी व आर्थिक तनाव की स्थितियां तेजी से उत्पन्न हो रही हैं। कई गरीब क्षेत्रों से तो लंबे समय से मानव तस्करी चल रही है, पर हाल के समय में सबसे तेजी से ‘यह व्यापार’ उन देशों में बढ़ा है जहां नया आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है। सोवियत संघ व पूर्वी यूरोप में पुरानी साम्यवादी व्यवस्था जब ताश के पत्तों की तरह ढह गई तो वहां ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी। तब पश्चिमी देशों व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने ऐसे दबाव पैदा किए जिससे बेरोजगारी व सामाजिक बिखराव जैसी समस्याएं और विकट होने लगीं। अचानक और तेजी से आए आर्थिक संकट ने बहुत-से ऐसे परिवारों को भी गरीबी व कर्ज में धकेल दिया जो पहले खुशहाल स्थिति में थे।
मानव तस्करी वाले गिरोहों ने विशेषकर इन नए आर्थिक तनाव वाले क्षेत्रों को अपना शिकारस्थल बनाया। उन्होंने अपने एजेंटों का जाल बिछाया जिसमें महिलाएं भी सम्मिलित हैं। इन एजेंटों का कार्य तरह-तरह से फुसला या बहका कर महिलाओं को यौन शोषण के क्षेत्रों में पहुंचाना है। जाल में फंसाने के लिए सम्मानजनक नौकरी या काम-धंधे का वायदा किया जाता है, पर जाल में शिकार के फंस जाने पर उस लड़की या औरत को इतना डराया-धमकाया जाता है व उस पर इतना अत्याचार किया जाता है कि नए अनजान स्थान में प्रतिरोध की उसकी क्षमता धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
हाल के वर्षों में यौन शोषण के लिए होने वाली मानव तस्करी में वृद्धि का एक अन्य कारण यह है कि अब पोर्नोग्राफी फिल्में, वीडियो आदि बनाने के लिए भी बहुत-सी महिलाओं व बच्चों की ट्रैफिकिंग हो रही है। यह एक ऐसा कारोबार है जो बढ़ता ही जा रहा है। इतना ही नहीं, अनेक रसूख वाले व्यक्तिभी तरह-तरह से पोर्नोग्राफी का औचित्य सिद्ध करने का प्रयास करते रहते हैं, जिसके कारण पोर्नोग्राफी के विरुद्ध कोई असरदार अभियान चलाना कठिन हो जाता है।
सच तो यह है कि पोर्नोग्राफी का तेज प्रसार समाज के लिए तथा विशेषकर महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से बहुत नुकसानदेह साबित हो रहा है। पोर्नोग्राफी के तेज प्रसार से महिलाओं व बच्चों का यौन शोषण बढ़ा है, साथ ही अन्य सामाजिक समस्याएं भी बढ़ी हैं। जहां तक उन महिलाओं व बच्चों का सवाल है, जिनका उपयोग पोर्नोग्राफी के फिल्म व वीडियो बनाने के लिए किया जाता है, तो उनकी हालत काफी चिंताजनक पाई गई है। यूरोप में कुछ स्थानों पर ऐसी जिन महिलाओं को छुड़ा कर आश्रय-गृहों में पहुंचाया गया, उनके बीच किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि उनका दुख-दर्द बहुत गहरा है। ‘लंदन स्कूल आॅफ हाइजीन ऐंड ट्रॉपिकल मेडिसिन’ के लिए कैथी जिमरमैन ने ‘मुस्कान पर डाका’ नाम से एक रिपोर्ट लिखी है। इसके अनुसार, इनमें से 95 प्रतिशत महिलाओं (व लड़कियों) को शारीरिक तथा यौनहिंसा सहनी पड़ी थी, साठ प्रतिशत में संक्रमण समेत अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो चुकी थीं, 95 प्रतिशत अवसाद से पीड़ित थीं और 38 प्रतिशत में आत्महत्या के रुझान के लक्षण थे।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों का अध्ययन ‘न्यू इंटरनैशलिस्ट’ पत्रिका ने अपने एक विशेषांक में किया है। इस विश्लेषण के अनुसार कई प्रयास केवल इन महिलाओं को छुड़ा कर इन्हें अपने मूल देश में भेज देने तक सीमित हैं। इस तरह छुड़ाई गई अनेक महिलाएं फिर से देह-व्यापार के गिरोहों के चंगुल में फंस सकती हैं। कुछ स्थानों से छुड़ाई गई महिलाओं के लिए आश्रयगृह बनाए गए, पर यहां उन्हें बहुत कम समय तक रखा जाता है। इतने कम समय में उन्हें जोर-जुल्म से उत्पन्न तनाव व अवसाद से उबरने का अवसर नहीं मिल पाता है। दूसरी ओर कुछ ऐसे प्रयास काफी सहायक सिद्ध हुए हैं जिनमें पहले से वेश्यावृत्ति में लगी महिलाओं का सहयोग उन युवतियों को बचाने के लिए लिया जाता है जिन्हें जोर-जबर्दस्ती व धोखे से वेश्यावृत्ति में धकेला जा रहा है। कोलकाता की सोनागाछी परियोजना में यह प्रयास किया गया कि ‘पेशे’ में प्रवेश करने वाली नई युवतियों से पुरानी वेश्याएं स्वयं पूछताछ करें व जोर-जबर्दस्ती की शिकायत मिलने पर उनकी घर वापसी का प्रयास किया जाए। दुनिया के कई अन्य भागों से भी ऐसे समाचार मिले हैं कि पहले से कार्यरत वेश्याओं ने स्वयं धोखेबाजी व अत्याचार के जाल से कई लड़कियों को बचाया। इसके आगे विभिन्न देशों की सरकारों, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वैच्छिक संस्थाओं को अवैध व अनैतिक व्यापार पर नियंत्रण करने के लिए बहुत प्रयास करने पड़ेंगे।
 
 
भारत डोगरा

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