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कहां ले जाएगी अमेरिका और चीन की होड़

चीन और अमेरिका के बीच दक्षिण चीन सागर और उत्तर कोरिया को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। दोनों देश एक दूसरे से जंग के लिए तैयारी कर रहे हैं।

अमेरिकी-चीनी संबंधों के आगे ले जाने के लिए होगी ट्रंप और शी की मुलाकात और ये होगी खास बात

चीन और अमेरिका के बीच दक्षिण चीन सागर और उत्तर कोरिया को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। दोनों देश एक दूसरे से जंग के लिए तैयारी कर रहे हैं। यह जंग कभी भी हो सकती है। लेकिन चीन अमेरिका के बीच जंग शुरू होते ही यह विश्वयुद्ध में बदल जाएगी। इसमें उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देश भी शामिल हो जाएंगे और अंतत: पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ जाएगी। इस विश्वयुद्ध में कोई भी देश कभी भी परमाणु बम इस्तेमाल करके दुनिया को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। पिछले दो महीने में चीन और अमेरिका के बीच तीखी बयानबाजी हुई है। दोनों ने अलग-अलग मुद््दों पर एक-दूसरे को चेतावनी दी है। चीन यहां तक कह चुका है कि अगर अमेरिका ने उकसाया तो छियासठ साल पहले की जंग फिर दोहराई जाएगी। अमेरिका को पिछले चार दशकों में इतनी सीधी धमकी किसी देश ने नहीं दी। 1950-53 की लड़ाई में अमेरिका और चीन के बीच हुई लड़ाई के तौर पर देखा गया। दोनों तरफ के तीन लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। लेकिन इस बार युद्ध हुआ तो परमाणु मिसाइलों का भी उपयोग हो सकता है, जिसका नतीजा सारी दुनिया को भोगना पड़ेगा।

चीन के सरकारी मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि चीन अमेरिका के साथ संभावित सैन्य टकराव की तैयारियों में जुट गया है। ये खबरें ऐसे वक्त में आई हैं जब अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दक्षिणी चीन सागर विवाद और अन्य मुद््दों पर बेजिंग के दावों का मुकाबला करने के लिए वह पहले से ज्यादा सख्त नीति अमल में लाएंगे। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की आधिकारिक वेबसाइट पर 20 जनवरी के एक आलेख में कहा गया कि एशिया-प्रशांत में पहले से ज्यादा जटिल सुरक्षा स्थिति के बीच युद्ध की आशंका ज्यादा प्रबल हो गई है। वाइट हाउस के नए प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने कहा कि अमेरिका दक्षिणी चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय जलसीमा क्षेत्रों पर नियंत्रण करने से चीन को रोकेगा। चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विभाग के एसोसिएट डीन जिन कैनरोंग ने ‘ग्लोबल टाइम्स’ को बताया कि अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री टिलरसन का बयान काफी अहंकारपूर्ण था। यदि नए अमेरिकी प्रशासन ने यही राह अपनाई और यही रवैया दिखाया तो चीन और अमेरिका के बीच युद्ध होगा और इसका मतलब अमेरिकी इतिहास का अंत या पूरी मानवता का अंत होगा।

अमेरिका चीन को कई बार उत्तरी कोरिया पर लगाम लगाने के लिए कह चुका है। लेकिन उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र के तमाम प्रतिबंधों को नजरअंदाज करके मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। उसका इरादा अमेरिका तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल बनाना है। उधर अमेरिका प्रशांत महासागर और इसके विवादित हिस्से दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देख परेशान है। दोनों देश इस समुद्र का अघोषित राजा बनना चाहते हैं इसीलिए चीन यहां अपने एयर बेस और अड््डे बनाने में जुटा है, तो अमेरिका अपने युद्धपोत और विमान भेज उसे छेड़ देता है। चीन अमेरिका के दक्षिण चीन सागर मामले में दखल देने से नाराज है। चीन इसे अपना इलाका बताता है। जबकि उसके पड़ोसी देश (विएतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई, फिलीपीन्स और ताइवान) अपना।
हाल में तनाव और गहरा गया जब अमेरिकी टोही विमान ईपी-3 एरीज ने इस इलाके के ऊपर उड़ान भरी। इसके बाद दो चीनी जे-11 लड़ाकू विमानों ने अमेरिकी विमान का पीछा किया और उसे तुरंत इलाका छोड़ कर जाने की चेतावनी दी। फिर चीन ने अमेरिका को जासूसी न करने की धमकी दी। लेकिन अमेरिका फिर भी नहीं माना। उसने अपना मिसाइल डेस्ट्रायर शिप चीन समुद्र में 22 किमी. अंदर तक भेज दिया। चीन ने फिर धमकी दी, लेकिन अमेरिका बोला ‘यह इलाका तुम्हारा नहीं है।’ इस इलाके के द्वीप पर चीन ने एक हवाई अड््डा बनाया है। माना जा रहा है कि लड़ाकू विमानों को तैनात करने के लिए ऐसा किया गया है।

अमेरिका और चीन में प्रशांत महासागर पर ताकत और वर्चस्व दिखाने की होड़ है। चीन पहली बार इस क्षेत्र में परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में पहले ही अपने कई अत्याधुनिक हथियार तैनात कर चुका है। साथ ही उसने चीन के विरोधी देश दक्षिण कोरिया में थाड एंटी बालिस्टिक सिस्टम और हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल तैनात की है। यह मिसाइल एक घंटे के भीतर चीन को निशाना बनाने में सक्षम है।
समुद्री इलाके को लेकर चीन और विएतनाम में बरसों से झगड़ा है। इसका फायदा उठा अमेरिका विएतनाम के नजदीक आ रहा है। सोलह साल बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति (बराक ओबामा) विएतनाम के दौरे पर गए थे। उन्होंने विएतनाम को हथियार बेचने पर लगी पुरानी पाबंदी तक हटा दी। चीन ने सीधे तौर पर इसे अपने ऊपर हमला माना। उसने ओबामा को चेतावनी देते हुए कहा था कि वे इस कदम से एशिया में विस्फोटक स्थिति बनाने की कोशिश न करें। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से पहले कहा था कि अगर चीन के साथ व्यापारिक युद्ध भी छिड़ जाता है तो हमारे लिए चिंता की बात नहीं होगी। लेकिन अब तो दोनों देशों ने जंग के लिए मोर्चे पर पूरी तैयारी कर ली है।

अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञ जेफरी लूइस के मुताबिक उत्तरी कोरिया अंतरिक्ष के परमाणु विस्फोट करके दुनिया के तमाम देशों को घुटनों पर ला सकता है। इसमें सीधे तौर पर लोगों या धरती पर मौजूद आधारभूत ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचेगा लेकिन ऐसे विस्फोट से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे पैदा होंगी जिससे संचार, खुफिया निगरानी, सैन्यतंत्र ध्वस्त हो जाएगा। दुनिया फिर से पाषाण युग में लौट जाएगी। अमेरिका उत्तर कोरिया को लेकर बहुत सावधानी बरत रहा है। पर वह इस बात पर भी विचार कर रहा है कि उत्तरी कोरिया का सनकी प्रशासक किम जोन कोई कदम उठाए उससे पहले ही उस पर परमाणु बम से हमला कर दिया जाए। उसने कोरियाई प्रायद्वीप में विमानवाहक पोत यूएसएस कार्लविंसन की तैनाती कर दी है। इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने चीन से कहा है कि वह अपने सहयोगी पर परमाणु बम और मिसाइल का परीक्षण रोकने के लिए दबाव बढ़ाए। इस बीच अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप का जायजा लेने के लिए उसके ऊपर से अत्याधुनिक बमवर्षक विमान भी उड़ाए हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पैंस ने उत्तरी कोरिया को चेतावनी देते हुए कहा है कि तलवार म्यान में नहीं रखी गई है, वह तैयार है, अगर उत्तर कोरिया ने दुस्साहस दिखाया तो उसे अमेरिका का विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पडेÞगा। पैंस का यह बयान उत्तर कोरिया की परमाणु हमले की धमकी का जवाब माना जा रहा है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के उप राजदूत ने कहा है कि उनका देश छठे परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा है। मिसाइल परीक्षण भी साप्ताहिक और मासिक आधार पर होंगे। चीन ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उसके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लूकांग ने उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध की आशंका पर चिंता जताई है। दुनिया के कई देशों के बीच भारी तनाव है और इस तनाव के कारण परमाणु बम डालने की धमकियां भी दी जाती हैं। अब यदि कहीं भी परमाणु युद्ध हुआ तो इसमें न कोई विजेता होगा और न कोई पराजित देश होगा। परमाणु बमों का इस्तेमाल करने वाले देश तो मिट ही जाएंगे, आसपास के देशों में भी भारी तबाही होगी।

 

 

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