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राजनीति: कारोबारी सुगमता के लिए

सरकार ने हाल-फिलहाल में कारोबारी सुगमता के लिए कई आर्थिक सुधार किए हैं और इस दिशा में वह लगातार आगे बढ़ रही है। अगर भारत की रैंकिंग सुधरती है तो वैश्विक स्तर की नामचीन रेटिंग एजेंसियां भारत को वर्तमान के मुकाबले बेहतर रेटिंग दे सकती हैं, जिससे निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ेगा और देश में कारोबारी माहौल भी बेहतर होगा।

Author February 14, 2018 3:50 AM
वित्तमंत्री अरुण जेटली

केंद्र सरकार ने देश में निवेश को प्रोत्साहन देने और कारोबारी सुगमता को बढ़ाने के लिए कई तरह के सुधार किए हैं, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ कहते हैं। पिछले वर्ष कारोबारी सुगमता में भारत ने रिकॉर्ड तीस पायदान सुधार कर सौवां स्थान हासिल किया था। इस साल भारत पचासवें स्थान को पाना चाहता है, लेकिन इसमें सुधार करने के लिए लगभग ढाई महीने का ही समय बचा है। विश्व बैंक दस मानदंडों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करता है, जो बताता है कि कौन-सा देश कारोबार के लिहाज से कितना बेहतर है। इस क्रम में कारोबारी सुगमता को रैंकिंग के निर्धारण का मुख्य आधार बनाया जाता है। विश्व बैंक की पिछली रिपोर्ट में न्यूजीलैंड पहले स्थान पर था और सिंगापुर दूसरे स्थान पर। इस साल रैकिंग के निर्धारण की तिथि एक मई तय की गई है और रैंकिंग की घोषणा अक्तूबर में की जाएगी।

नया कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय, खरीद-फरोख्त वाले उत्पादों के लिए गोदाम बनाने में लगने वाला समय, उसकी लागत व प्रक्रिया, किसी कंपनी के लिए बिजली कनेक्शन में लगने वाला समय, व्यावसायिक संपत्तियों के निबंधन में लगने वाला समय, निवेशकों के पैसों की सुरक्षा गारंटी, कर संरचना का स्तर, कर के प्रकार व संख्या, कर जमा करने में लगने वाला समय, निर्यात में लगने वाला समय और उसके लिए आवश्यक दस्तावेज, दो कंपनियों के बीच होने वाले अनुबंधों की प्रक्रिया और उसमें लगने वाले खर्च आदि को कारोबारी सुगमता के तहत रैंकिंग तय करने में आधार बनाया जाता है। विश्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली यह रिपोर्ट कई मायनों में अहम है, क्योंकि इस रिपोर्ट से किसी भी देश के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक स्तर पर उक्त देश की साख में भी इजाफा होता है। सरकार ने हाल-फिलहाल में कारोबारी सुगमता के लिए कई आर्थिक सुधार किए हैं और इस दिशा में वह लगातार आगे बढ़ रही है। अगर भारत की रैंकिंग सुधरती है तो वैश्विक स्तर की नामचीन रेटिंग एजेंसियां भारत को वर्तमान के मुकाबले बेहतर रेटिंग दे सकती हैं, जिससे निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ेगा और देश में कारोबारी माहौल भी बेहतर होगा। फिलहाल दस में से आठ पैमानों पर भारत ने सुधार किया है। विश्व बैंक के मुताबिक तीन साल में पिछले साल भारत में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक के अनुसार, इस साल भारत 122 सुधारों को लागू कर चुका है और इन्हें मान्यता दिलाने के लिए सरकारी तंत्र विश्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अभिषेक के मुताबिक कारोबारी सुगमता के लिए नब्बे और सुधारों को इस साल हकीकत में बदलने की कोशिश की जाएगी। इसके तहत निर्माण परमिट देने में तेजी लाना, नई कंपनियों के पंजीकरण को आसान बनाना, निदेशकों की पहचान आधार से करना आदि शामिल है। जीएसटी लागू होने से भारत की रैंकिंग में और सुधार आने की संभावना बढ़ी है। रैंकिंग में सुधार होने से देश में निवेश का सकारात्मक माहौल बनेगा। हालांकि अब भी कई क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। जीडीपी वृद्धि के हिसाब से देश में कारोबारी सुगमता की स्थिति और बेहतर होगी। गौरतलब है कि फिलहाल जीडीपी रैंकिंग के मामले में भारत चौथे स्थान पर है।

अन्य सुधारों के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ फाइनैंशियल सर्विसेज) बैंक खाता खोलने के लिए कंपनी की सील की मौजूदा आवश्यकता को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। पूंजीगत सामान के आयात पर भी कैश रिफंड को एक वर्ष के अंदर वापस करने की योजना है। फिलहाल, इस आलोक में ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ का दावा करना होता है। उद्योग विभाग ने भी कंपनी मामलों के मंत्रालय के लिए कई सुधार का प्रस्ताव किया है, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर और निदेशक पहचान नंबर को आधार से बदलना शामिल है। इस क्रम में डिजिटल हस्ताक्षर को उपयोगकर्ता के नाम या वन-टाइम पासवर्ड से बदला जा सकता है। कंपनी मामलों का मंत्रालय कंपनियों के पंजीकरण के बाद एक अलग स्थायी खाता नंबर देने की प्रक्रिया को भी समाप्त कर सकता है।
विश्व बैंक हर साल कारोबार सुगमता की सूची जारी करता है, जिसमें दुनिया भर के एक सौ नब्बे देशों को शामिल किया जाता है। विश्व बैंक पिछले पंद्रह वर्षों से इस सूची को जारी कर रहा है। उसकी ताजा रिपोर्ट में विभिन्न देशों के कारोबार नियमन के दस क्षेत्रों, जैसे कारोबार शुरू करना, निर्माण की अनुमति हासिल करना, बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया और उसमें लगने वाला समय, संपत्ति का पंजीकरण, कर्ज मिलने में लगने वाला समय, अल्पसंख्यक निवेशकों की सुरक्षा, कर का भुगतान, दूसरे देशों के साथ व्यापार करने में सहजता का प्रतिशत, समझौते को लागू कराने और दिवालियापन का समाधान करने में तेजी आदि के आधार पर रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है।

भारत को छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के पैमाने पर विश्व में चौथे स्थान पर रखा गया है। यह पहला मौका है जब भारत ने कारोबार सुगमता के किसी भी पैमाने पर शीर्ष पांच देशों में जगह पाई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा, ऋण उपलब्धता और बिजली उपलब्धता के क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत के कंपनी कानून और प्रतिभूति नियमन को भी काफी उन्नत माना गया है। विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते साल में भारत ने दस क्षेत्रों में से आठ क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछली बार कमजोर रैंकिंग ने भारत को चिंतित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में उठाए गए सुधारात्मक कदमों से भारत की रैंकिंग में सुधार आया। आने वाले दिनों में भी यदि इसी तरह के और कदम उठाए जाते हैं तो भारत की रैंकिंग में और सुधार आना तय है।

वित्तवर्ष 2014-15 में कारोबारी सुगमता के मामले में भारत की रैंकिंग 142वीं, वित्तवर्ष 2015-16 में 131वीं, वित्तवर्ष 2016-17 में 130वीं और वित्तवर्ष 2017-18 में 100वीं रही है। ताजा रिपोर्ट 2 जून 2016 से 1 जून 2017 के दौरान दिल्ली और मुंबई में क्रियान्वयन में लाए गए सुधारों पर आधारित है। इस दौरान स्थायी खाता संख्या और कर खाता संख्या के आवेदनों को मिला कर दिल्ली में कारोबार की शुरुआत करने की प्रक्रिया तेज हुई है। इसी तरह मुंबई में मूल्य वर्धित कर और व्यवसाय कर के आवेदनों को मिला कर कारोबार शुरू करना आसान हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार सुगमता के मामले में पंजाब का लुधियाना पहले पायदान पर है तो दिल्ली छठे स्थान पर।

सरकार ने पिछले एक साल में कई बड़े कदम उठाए हैं। विदेशी निवेश के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ कर पहले स्थान पर पहुंच चुका है। मोदी के सत्ता में आने के बाद से देश में करीब 170 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ चुका है। हां, भारत ने सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन में शिफ्ट करने का जो दावा किया था विश्व बैंक ने उसे सही नहीं पाया। रैंकिंग सुधारने के लिए भारत को ऐसे दावों से बचना होगा। मसलन, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया अब भी ऑनलाइन नहीं है। बहरहाल, कहा जा सकता है कि अगर भारत योजनाबद्ध तरीके से विश्व बैंक के द्वारा निर्धारित सुधार के मानकों पर आगे बढ़ने का प्रयास करता है तो कारोबार सुगमता के मामले में भारत की स्थिति और बेहतर होगी।

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