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कौशल विकास और रोजगार

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल कामगारों का संकट होगा, वहीं भारत के पास करीब पच्चीस करोड़ अतिरिक्त कुशल कामगार होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक दुनिया के उन्नीस विकसित और विकासशील देशों में साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा कुशल श्रमशक्ति की कमी होगी। दुनिया में भारत इकलौता देश होगा जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल कामगार होंगे।

Author June 10, 2019 1:49 AM
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक दुनिया के उन्नीस विकसित और विकासशील देशों में साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा कुशल श्रमशक्ति की कमी होगी।

जयंतीलाल भंडारी

हाल में केंद्रीयसांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) ने श्रम बल के नवीनतम आंकड़े जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसद रही है। शहरों में नौकरी लायक युवाओं में 7.8 फीसद बेरोजगार हैं, जबकि गांवों में यह आंकड़ा 5.3 फीसद है। सरकार का कहना है कि रोजगार आंकड़ों को नए डिजाइन और नई मैट्रिक्स के तहत एकत्रित किए जाने से पिछली रोजगार रिपोर्टों से इसकी तुलना नहीं की जा सकती है। जबकि आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि देश में बेरोजगारी की दर पैंतालीस साल में सर्वाधिक है।

ऐसे में रोजगार के मौके बढ़ाना निश्चित रूप से सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत में रोजगार अवसरों पर आधारित रिपोर्टों में यह कहा जा रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में श्रम का आधिक्य है, लेकिन कौशल की काफी कमी है। निश्चित रूप से उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से युक्त भारतीय युवाओं के लिए देश-विदेश में नौकरियों की कमी नहीं है। लेकिन नौकरियों की योग्यता के अभाव में इस समय ऊंची-ऊंची डिग्री रखने वाले युवा भी नौकरियों से दूर हैं। रोजगार परिदृश्य पर मौजूद चिंताओं के बीच कौशल विकास से ही करोड़ों युवाओं को रोजगार मुस्कराहट मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि न केवल परंपरागत डिग्री वाले छात्रों के समक्ष रोजगार की चिंताएं हैं, पेशेवर छात्र भी कौशल की कमी के कारण रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं। देश के विभिन्न आइआइएम, आइआइटी और प्रमुख बिजनेस स्कूलों के कुछ छात्रों को तो मोटे वेतन पैकेज मिल रहे हैं। लेकिन अधिकांश कालेजों के अधिकांश छात्रों के समक्ष रोजगार संबंधी निराशाएं हैं। कई सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि देश के सिर्फ दस फीसद इंजीनियर ही नौकरी के लिए जरूरी कौशल के लिहाज से नौकरी योग्य हैं। ऐसे में नौकरी संबंधी चिंताजनक स्थिति के कारण इंजीनियरिंग और प्रबंधन शिक्षा से छात्र विमुख हो रहे हैं।

इसमें कोई दोमत नहीं है कि अमेरिका और जापान सहित दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों में वरीयता और योग्यता के आधार पर विदेशी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं का जो नया परिदृश्य उभरकर सामने आया है, उसमें भारतीय प्रतिभाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। अब तक अमेरिका सहित कई देशों में लंबे समय से निवास करने वाले, उन निवासियों के पारिवारिक संबंधों के आधार पर और सस्ती मजदूरी पर काम करने वाले लोगों को नागरिकता और वीजा दिए जाने में प्राथमिकता दी जाती थी। लेकिन अब अमेरिका और जापान सहित विभिन्न देशों में उनके नवनिर्माण और विकास में योगदान दे सकने वाली विदेशी प्रतिभावान नई पीढ़ी को प्राथमिकता दी जाने लगी है। ऐसे में भारत की नई पेशेवर पीढ़ी के लिए अपार संभावनाएं बन रही हैं। पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने योग्यता आधारित एवं अंक आधारित जो नई आव्रजन नीति पेश की, उसके तहत मौजूदा ग्रीन कार्ड की जगह ‘बिल्ड अमेरिका’ वीजा लाने का प्रस्ताव रखा गया है। अमेरिका की इस नीति के तहत युवा एवं उच्च दक्ष पेशेवरों के लिए वीजा आरक्षण बारह प्रतिशत से बढ़कर सत्तावन प्रतिशत हो जाएगा। अब नई व्यवस्था से उन हजारों भारतीय पेशेवरों और दक्ष कर्मियों को लाभ होने की उम्मीद है जो औसतन करीब एक दशक से अधिक समय से ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं।

निसंदेह अमेरिका में वैध आव्रजन की मौजूदा प्रणाली देशभर की प्रतिभाओं को बरकरार रखने में नाकाम रही है। अब योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली के तहत स्थायी कानूनी आवास, आयु, ज्ञान, रोजगार के अवसर के आधार पर उन लोगों को दिया जाएगा जो नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझते हों। इसके अलावा प्रस्तावित प्रणाली के तहत आव्रजकों को अंग्रेजी सीखनी होगी और दाखिले से पहले नागरिक शास्त्र की परीक्षा भी उत्तीर्ण करनी होगी। बिल्ड अमेरिका वीजा योग्यता, उम्र, शैक्षणिक काबिलियत, अंग्रेजी में दक्षता आदि के आधार पर निर्धारित होगा। जापान के मशहूर उद्यमी हिरोयुकी तायकुची सान ने पिछले दिनों भारत की नई पीढ़ी के लिए जापान में रोजगार की नई संभावनाओं को रेखांकित किया। हिरोयुकी ने कहा कि जापान की औद्योगिक और कारोबार आवश्यकताओं में तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तेज होने की वजह से जापान में सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में मसलन स्वास्थ्य, कृषि, अनुसंधान और विकास, सेवा व वित्त आदि क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षित कार्यबल की भारी कमी अनुभव की जा रही है। खासतौर से जापान की बुजुर्ग होती जनसंख्या और जापान में जन्म दर गिरने की वजह से जापान में पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है। चूंकि जापान में विभिन्न सांस्कृतिक व कारोबारी संबंधों के कारण अन्य विदेशियों की तुलना में भारतीयों को अधिक सम्मान दिया जाता है, अतएव जापान में भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। ऐसे में जापान में जहां जापान सरकार की एजंसी जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) के द्वारा वर्ष 2020 तक दो लाख भारतीय पेशेवरों की पूर्ति हेतु कार्य योजना बनाई गई है, वहीं जापान के निजी क्षेत्र ने तीन लाख भारतीय पेशेवरों की जरूरत बताई है। ऐसे में दो साल में पांच लाख भारतीय पेशेवर जापान में अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल कामगारों का संकट होगा, वहीं भारत के पास करीब पच्चीस करोड़ अतिरिक्त कुशल कामगार होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक दुनिया के उन्नीस विकसित और विकासशील देशों में साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा कुशल श्रमशक्ति की कमी होगी। दुनिया में भारत इकलौता देश होगा जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल कामगार होंगे। ऐसे में भारत विश्व के तमाम देशों में कुशल कामगारों को भेज कर लाभ उठा सकेगा। भारत की युवा आबादी कौशल प्रशिक्षित होकर मानव संसाधन के परिप्रेक्ष्य में दुनिया के लिए उपयोगी और भारत के लिए आर्थिक कमाई का प्रभावी साधन सिद्ध हो सकती है। निश्चित रूप से दुनिया के अधिकांश देशों में योग्य पेशेवरों की मांग बढ़ रही है और अमेरिका की तरह कुछ और देश विदेशी पेशेवरों के लिए उपयुक्त नीति बना रहे हैं। यदि हम चाहते हैं कि देश के अधिकांश युवाओं को रोजगार मिले और भारतीय प्रतिभाएं देश की मिट्टी को सोना बना दें, तो जरूरी होगा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देकर उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार के योग्य बनाया जाए और सामान्य योग्यता वाले भारतीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से सुसज्जित करने के साथ-साथ कार्यक्षम भी बनाया जाए। इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारत की नई पीढ़ी और भारतीय पेशेवरों के लिए देश और दुनिया में रोजगार के द्वार खुल रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के कारण उच्च कौशल प्रशिक्षित भारत की नई पीढ़ी को देश और दुनिया में अपार मौके मिलने की संभावना रहेगी। निश्चित रूप से उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर उपयुक्त ध्यान देकर रोजगार की चुनौतियों के बीच रोजगार की नई संभावनाओं को साकार भी किया जा सकेगा। विश्व बैंक की ‘रोजगार रहित विकास’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं की संख्या को देखते हुए हर साल इक्यासी लाख नई नौकरियां और नए रोजगार अवसर पैदा करने की जरूरत है। इतने रोजगार के अवसर और नौकरियां जुटाने के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, सार्वजनिक और निजी निवेश में भारी वृद्धि करनी होगी। विनिर्माण क्षेत्र को गतिशील करना होगा। निर्यात बढ़ाने होंगे। श्रम कौशल बढ़ाना होगा।

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