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राजनीतिः संकटों के बीच हासिल

सरकार ने पिछले छह साल में जो कदम उठाए उनके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं होगा। ‘एक राष्ट्र-एक कर’, ‘एक राष्ट्र-एक मोबिलिटी कार्ड’, ‘एक राष्ट्र-एक फास्ट टैग’, ‘एक देश-एक संविधान’ और आज वैश्विक महामारी कोरोना के इस दौर में ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’। इन प्रयासों से देश में राष्ट्रीयता और भारतीयता की भावना बलवती हुई है।

Author Published on: May 30, 2020 1:13 AM
भारत सहित पूरा विश्व आज कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से संकट में है।

प्रभात झा

केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार आज अपने दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरा कर रही है। अपने पांच वर्षों के पहले कार्यकाल में सरकार ने जहां समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के दरवाजे तक अपनी पहुंच को सुनिश्चित किया, वहीं इस दशक को भारत का दशक और इस सदी को भारत की सदी बनाने के लिए मजबूत नींव रखने में भी सफलता प्राप्त की। नए भारत के निर्माण की दिशा में हमारा कदम बढ़ा। विश्व में भारत के प्रति सोच में परिवर्तन आया। ‘सबका साथ-सबका विकास’ से उत्पन्न जन-विश्वास के फलस्वरूप 23 मई, 2019 को भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को ऐतिहासिक विजय मिली और 30 मई, 2019 को सरकार की दूसरी पारी की शुरुआत हुई। दूसरे कार्यकाल के पहले साल के शुरुआती महीनों को सरकार ने जहां एक ओर विचारधारा को समर्पित किया है, वहीं पिछले दो-ढाई महीनों में वैश्विक महामारी कोरोना से उत्पन्न चुनौतियों को अवसर में बदलने का साहसिक कदम उठाया।

भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के मूल में पंच निष्ठाएं हैं- राष्ट्रीय एकात्मता, लोकतंत्र, शोषण मुक्त और समता युक्त समाज की स्थापना, सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता एवं सर्वपंथ समभाव और मूल्य आधारित राजनीति। राष्ट्रीयता सांस्कृतिक है, केवल भौगोलिक नहीं। भारत भू-मंडल में अनेक राज्य रहे, पर संस्कृति ने राष्ट्र को बांध कर रखा। संक्रमण काल ने हमारी राष्ट्रीयता को जरूर कमजोर किया, लेकिन उसी सांस्कृतिक राष्ट्रीयता से उत्पन्न आंदोलन ने भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाई। लेकिन स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र के समक्ष अनेक समस्याएं खड़ी हो गईं। इसमें एक प्रमुख समस्या जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए संविधान में अनुच्छेद 370 और 35ए का प्रावधान था। अनुच्छेद 370 के कारण कश्मीर भारतीय राष्ट्रीयता को चुनौती देने वाला और आतंकवाद का केंद्र बनता चला गया। राष्ट्र और विकास की मुख्यधारा से दूर होता गया। आतंकवाद के कारण जम्मू-कश्मीर में हजारों लोग मारे गए। लेकिन जो काम पिछले सात दशकों में नहीं हुआ, वह केंद्र सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के सत्तर दिनों के भीतर कर दिखाया। संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के साथ संविधान से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने वाले विधेयक को पारित करा कर सरकार ने साबित किया कि उसके लिए देश सर्वोपरि है।

विविधता और एकात्मता ही भारत को विश्व में विशिष्ट बनाते हैं। इस एकात्मता को मजबूत करने के लिए सरकार ने पिछले छह साल में जो कदम उठाए उनके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं होगा। ‘एक राष्ट्र-एक कर’, ‘एक राष्ट्र-एक मोबिलिटी कार्ड’, ‘एक राष्ट्र-एक फास्ट टैग’, ‘एक देश-एक संविधान’ और आज वैश्विक महामारी कोरोना के इस दौर में ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’। इन प्रयासों से देश में राष्ट्रीयता और भारतीयता की भावना बलवती हुई है।

इसके अलावा आठ करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन, दो करोड़ गरीबों को घर, लगभग अड़तीस करोड़ गरीबों के बैंक खाते, पचास करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा, चौबीस करोड़ लोगों को बीमा सुरक्षा कवच, ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त बिजली कनेक्शन बिना भेदभाव के दिया गया। वेतन संहिता लाकर महिला कामगारों के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त किया गया, वहीं ‘प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना 2019’ को मंजूरी दी गई, ताकि छोटे व्यापारियों को साठ साल की आयु हो जाने के बाद तीन हजार रुपए रुपए न्यूनतम पेंशन दी जा सके। सभी किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत लाया गया। सभी को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने और जल संबंधी मुद्दों के व्यापक समाधान के लिए जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया गया।

केंद्र सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के दस सप्ताह के अंदर मुसलिम माताओं और बहनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया। ‘मुसलिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019’ को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया गया। एक अगस्त 2019 से देश में तत्काल तीन तलाक देना कानूनी रूप से अपराध हो गया। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए पोक्सो अधिनियम में संशोधन किया गया। सरकार सकारात्मक पंथनिरपेक्षता और सर्वपंथ समभाव के प्रति भी ईमानदारी के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने रिकॉर्ड समय में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण करके, गुरु नानकदेव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। देश की सर्वोच्च अदालत ने रामजन्म भूमि विषय पर ऐतिहासिक फैसला दिया और इससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। वहीं, सर्वोच्च अदालत के निर्देशानुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दी गई।

अपने दूसरे कार्यकाल केंद्र सरकार ने बोडो समस्या का समस्या का समाधान किया और नागरिकता संशोधन कानून बनाया। विभाजन के बाद बने माहौल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘पाकिस्तान के हिंदू और सिख, जो वहां नहीं रहना चाहते, वे भारत आ सकते हैं। उन्हें सामान्य जीवन मुहैया कराना भारत सरकार का कर्तव्य है।’ इसके लिए सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून बना कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देकर शोषण से मुक्ति दिलाई। पचास वर्षों से चली आ रही बोडो समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार और असम सरकार ने बोडो संगठनों के साथ ऐतिहासिक समझौता किया है। त्रिपुरा, मिजोरम, केंद्र सरकार और ब्रू जनजाति के बीच हुए ऐसे ही एक और ऐतिहासिक समझौते से न सिर्फ दशकों पुरानी समस्या हल हुई है, बल्कि इससे ब्रू जनजाति के हजारों लोगों के लिए सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित हुआ है।

भारत सहित पूरा विश्व आज कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से संकट में है। सरकार की निष्ठा और मेहनत पिछले दिनों वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान भी देखने को मिली। देश के अट्ठाईस राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों में महामारी से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर और दिशानिर्देश देते हुए काफी अच्छे ढंग से मोर्चा संभाला। भारत चुनौती की इस इस घड़ी को अवसर में बदलने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के साथ आगे बढ़ रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के संकल्पों के लिए बीस लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई। यह आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक और किसान के लिए है जो दिन-रात परिश्रम कर रहा है, उस मध्यवर्ग के लिए है जो ईमानदारी से कर देता है और इस उद्योग जगत के लिए है जो भारत की आर्थिक सामर्थ्य को बुलंदी देने के लिए संकल्पित हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र को तीन लाख करोड़ रुपए का बिना गारंटी चार वर्ष के लिए कर्ज का प्रावधान किया गया है। संकटग्रस्त बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति ठीक करने के लिए नब्बे हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। किसानों को रियायती दरों पर चार लाख करोड़ का कर्ज दिए जाने का निर्णय लिया गया है। शहरी गरीबों को ग्यारह हजार करोड़ रुपए की मदद दी गई है। मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर दो सौ दो रुपए की जा चुकी है। मुद्रा शिशु लोन लेने वालों के ब्याज में दो फीसद की छूट दी गई है। रेहड़ी-पटरी वालों के लिए दस हजार रुपए तक के कर्ज देने की बात है।

हम वर्तमान संकट का डट कर मुकाबला करेंगे और इस चुनौती को अवसर में बदलेंगे। कोरोना संकट के बाद विश्व की कई बड़ी कंपनियां चीन से निकल कर भारत में निवेश करना चाहती हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए स्वर्णिम और ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। इसी से ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के संकल्पों से निश्चय ही पूरा होगा।
(लेखक पूर्व राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)

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