हिंदी भाषा और रोजगार

आज हिंदी भाषा के बढ़ते चलन और वैश्विक रूप ने रोजगार की अनेक संभावनाओं को उजागर किया है।

सांकेतिक फोटो।

आलोक रंजन पांडेय

आज हिंदी भाषा के बढ़ते चलन और वैश्विक रूप ने रोजगार की अनेक संभावनाओं को उजागर किया है। विविध क्षेत्रों में इसकी स्वीकृति और प्रयोजनीयता बढ़ने से हिंदी को नई दृष्टि से देखा जा रहा है। निश्चित ही इस दृष्टि में बाजार का बहुत बड़ा योगदान है।

देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। सन 1949 में इसी दिन हिंदी को भारतीय संविधान में राजभाषा का दर्जा मिला था। इसी कारण हम हर साल आज के दिन हिंदी को कुछ ज्यादा ही याद करते हैं। चूकि हिंदी दिल की भाषा है, संवेदना की भाषा है, जीने की भाषा है, संस्कृति की भाषा है, समाज को जोड़ने की भाषा, मातृभाषा है, इसलिए ऐसी भाषा के लिए केवल एक दिन कैसे हो सकता है! जिस तरह एक घर में मां के बिना घर, परिवार और उस घर के बच्चे अधूरे हैं, उसी तरह हिंदी भाषा के बिना भारत और भारतीयता अधूरी है। इस अधूरेपन को दूर करने के लिए हमें हिंदी में जीना होगा और वह भी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उसे दिल से जोड़ना होगा।

आज के समय में किसी भाषा या बोली के जीवित रहने के लिए मात्र साहित्य की नहीं, बल्कि उसे व्यवसाय, विज्ञान और रोजगार की भाषा बनाने की भी जरूरत होती है। जो भाषा सामान्य मनुष्य को रोजगार नहीं दे पाती, वह धीरे-धीरे एक संकुचित दायरे में सिमटती चली जाती है। अंग्रेजी के अंतरराष्ट्रीय भाषा होने का सबसे बड़ा कारण व्यवसाय है। शौकिया रूप से किसी भाषा को सीखने वाले बहुत ही कम लोग होते हैं। अधिकतर लोग किसी न किसी व्यावसायिक कारण से ही किसी अन्य भाषा को सीखते हैं। आज हिंदी भाषा और साहित्य को वैश्विक रूप प्राप्त हुआ है।

यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व के लगभग एक सौ सैंतीस देशों में हिंदी भाषा विद्यमान है। हिंदी भाषियों की कुल संख्या अनुमानत: सौ करोड़ है। नेपाल, चीन, सिंगापुर, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, तिब्बत, भूटान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव आदि ऐसे देश हैं, जिनमें से अनेक बृहतर भारत के अंग थे। यहां हिंदी भाषी परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी निवास कर रहे हैं। नेपाल की भाषाएं हिंदी की विभाषाएं ही हैं। बर्मा और भूटान की स्थिति भी कुछ ऐसे ही है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में जो उर्दू और बांग्ला प्रचलित हैं। उन्हें यदि देवनागरी में लिख दिया जाए तो वे हिंदी से भिन्न प्रतीत नहीं होंगी। जावा, सुमात्रा और इंडोनेशिया में जो उर्दू बोली जाती है, उसे देवनागरी में लिखा जाए तो वह हिंदी ही है। दुबई की अधिकांश जनता न केवल हिंदी समझती है, बल्कि बोलती भी है।

विज्ञान और तकनीक के युग के साथ हिंदी कदमताल करती दिखाई दे रही है। जब भी भाषा का विस्तार और विकास होता है, तब उसमें एक दृष्टि और जुड़ जाती है और वह है रोजगार की संभावना। आज हिंदी भाषा के बढ़ते चलन और वैश्विक रूप ने रोजगार की अनेक संभावनाओं को उजागर किया है। इसकी विविध क्षेत्रों में स्वीकृति और प्रयोजनीयता बढ़ने से नई दृष्टि से हिंदी को देखा जा रहा है। निश्चित ही इस दृष्टि में बाजार का बहुत बड़ा योगदान है। ज्ञानार्जन की अभिलाषा के कारण अनुवाद प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है। भारतीय संविधान द्वारा खड़ी बोली को राजभाषा स्वीकार किए जाने के साथ हिंदी का परंपरागत स्वरूप और अध्ययन व्यावहारिक हो गया है। हर जीवित भाषा में वैज्ञानिक, तकनीकी और उद्यमिता की संभावनाएं होती हैं, उसकी प्रयोजनीयता की भी संभावनाएं होती हैं। यह संभावनाएं हिंदी में भी हैं।

हिंदी में आज कई तरह से रोजगार के मौके सामने आए हैं। सभी सरकारी अधिकारियों को दफ्तरों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी का उपयोग अनिवार्य बनाया गया है। आदेश, नियम, अधिसूचना, प्रतिवेदन, प्रेस-विज्ञप्ति, निविदा, अनुबंध व विभिन्न प्रारूपों को हिंदी में बनाना और जारी करना अनिवार्य है। इसका सीधा-सा अर्थ है कि केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के सभी विभागों, उपविभागों में हिंदी अधिकारी, अनुवादक, प्रबंधक, उप-प्रबंधकों के रूप में रखे जा रहे हैं। सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में हिंदी अधिकारी के पद बनाए गए हैं।

निजी क्षेत्र में भी बैंकिंग कारोबार बढ़ाने के लिए उपनगरों व ग्रामीण इलाकों में स्थानीय लोगों को भर्ती कर उन्हें स्थानीय भाषा में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा अनुवाद आज सबसे बड़ा रोजगार बनता जा रहा है। न केवल साहित्यिक किताबों बल्कि मीडिया, फिल्म, जनसंपर्क, बैंकिंग क्षेत्र, विज्ञापन आदि सभी जगहों पर अनुवाद करने वालों की काफी मांग है। टीवी पर तमाम चैनलों के मूल अंग्रेजी कार्यक्रम हम रोज हिंदी में देखते हैं। दर्शकों और पाठकों को यह सुविधा अनुवाद के जरिए ही मिलती है। इसीलिए आज अंग्रेजी और अन्य भाषाओं से हिंदी में अनुवाद की बहुत मांग है।

विज्ञापन आज के मानवीय जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों ने विज्ञापन के व्यवसाय में एक तरह की क्रांति पैदा कर दी है, जिसका बोध हमें विगत वर्षों में विज्ञापन पर लगातार बढ़ते जा रहे भारी-भरकम खर्च से पता चलता है। भारत में विज्ञापन का कारोबार हजारों करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इसमें भी हिंदी में विज्ञापनों का बाजार तेजी से बढ़ा है। खासतौर से उत्तर भारत के राज्यों जो पूरी तरह से हिंदी भाषी राज्य कहे जाते हैं, विज्ञापन बाजार पर हिंदी का ही कब्जा है। कारोबार के हिसाब से देखें तो देश भर में आठ सौ से ज्यादा मान्यता प्राप्त विज्ञापन एजेंसियां हैं। आज भारतीय विज्ञापन उद्योग ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी एक अलग पहचान बना ली है, भले ही यहां तक पहुंचने में उसे एक लंबा सफर तय करना पड़ा हो। इसलिए विज्ञापन की दुनिया में ही कई क्षेत्र हैं जिसमें हमेशा ही रोजगार के नए अवसर बनते रहते हैं और अब हिंदी भाषियों के लिए काफी संभावनाएं सामने आई हैं।

हिंदी का अध्ययन करने वाले छात्रों के बीच पत्रकारिता रोजगार के एक आकर्षक विकल्प के रूप में सामने आया है। इस समय सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले समाचार पत्रों और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले समाचार चैनलों में दो तिहाई से अधिक हिंदी भाषा के ही हैं। समाचार चैनलों और अखबारों के अलावा भी हिंदी के अनेक चैनल और पत्र-पत्रिकाएं हैं जो योग्य उम्मीदवारों को मौका दे रहे हैं। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, समाचार चैनलों आदि में रोजगार के अनेक अवसर मिलते हैं। फील्ड में रिपोर्टर, प्रेस फोटोग्राफर, संपादकीय विभाग में उपसंपादक, कॉपी राइटर, उदघोषक के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा रेडियो जॉकी एक ऐसा कॅरियर है जिसमें आपकी आवाज देश-दुनिया में सुनी जाती है। ब्लॉग लेखन भी इन्हीं विकल्पों का एक शानदार उदाहरण है।

आॅनलाइन हिंदी शिक्षण के कई निजी पाठ्यक्रम स्वरोजगार की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रयासों के रूप देखे जा रहे हैं। संचार-सूचना प्रौद्योगिकी में दिनों-दिन बढ़ रही हिंदी की उपयोगिता और अनिवार्यता अधिक से अधिक कार्य-सक्षम युवाओं को रोजगार दिला रही है। आॅनलाइन खरीद और मार्केटिंग और विकीपीडिया के लिए हिंदी में लेखन सृजनात्मक संतुष्टि के साथ वित्तीय लाभ का अवसर भी दे रहा है।

बड़े-बड़े उद्योग समूहों का कामकाज भले ही अंग्रेजी में चलता हो, लेकिन इन कारपोरेट दफ्तरों में हिंदी भी पूरे सम्मान के साथ मौजूद है। अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य है, लेकिन हिंदी जानने वालों के लिए खास जगह और तरक्की के सुनहरे मौके हैं। ज्यादातर जनसंपर्क कंपनियां ही कॉरपोरेट म्युनिकेशन यानी जनसंपर्क का काम करती हैं। यह जानकर हैरानी होगी कि 2016 में देश में जनसंपर्क कंपनियों का कारोबार 1120 करोड़ का रहा है और 2020 तक बढ़ कर 2100 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। जाहिर है, हिंदी वालों के लिए यह एक सुनहरा क्षेत्र है। इसलिए इसमें कोई संशय नहीं कि हिंदी में है दम और इस हिंदी के दम पर हम दुनिया में परचम लहरा सकते हैं।

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