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राजनीति: बंदी के बीच आर्थिक राहत

कोरोना प्रकोप से देश में बढ़ रही आर्थिक और रोजगार चुनौतियों का सामना करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण रणनीतिक कदम जरूरी हैं। जिन उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होने से लोगों का रोजगार जा रहा है, उन उद्योगों को सरकारी सहारा दिया जाना जरूरी है। सरकार को यह निगरानी रखनी होगी कि उद्योग-कारोबार अपने कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश पर न भेजें।

Author Published on: March 30, 2020 2:12 AM
बंदी से उद्योग धंधों पर काफी असर पड़ा है। इससे निपटने के लिए सरकार ने नई योजना बनाई है।

जयंतीलाल भंडारी
यकीनन कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी बंदी सराहनीय है। छब्बीस मार्च को कोरोना महामारी और देशव्यापी बंदी के बीच वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गरीब किसान महिला और अन्य प्रभावित वर्गों के सौ करोड़ से अधिक लोगों को राहत पहुंचाने के लिए घोषित एक लाख सत्तर हजार करोड़ रुपए का बहुआयामी पैकेज सराहनीय है। वित्तमंत्री ने देश की संकटग्रस्त कंपनियों के लिए बड़ी राहत का एलान किया है। इसके अलावा आयकर, जीएसटी और कंपनी मामलों के संबंध में राहत का भी एलान किया है।

देश की कंपनियों को विकल्प दिया गया है कि वे कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) का धन कोरोना प्रभावित लोगों के कल्याण पर खर्च कर सकती हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत के साथ बैठक करके प्रभावित उद्योगों और कर्मचारियों को वित्तीय सहयोग देने पर विचार-विमर्श किया है। सरकार ने फार्मेसी सहित कुछ उद्योगों के लिए राहत पैकेज घोषित किए हैं। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित कई आर्थिक और औद्योगिक संगठनों ने कोरोना से जंग में भारत के प्रयासों की सराहना की है।

देश में पूर्ण बंदी के कारण व्यावसायिक और वित्तीय गतिविधियों से चमकने वाले केंद्रों में सन्नाटा दिखाई दे रहा है। ऐसे में भविष्य की आर्थिक गतिविधियों का अनुमान लगाना अकल्पनीय हो गया है। अर्थशास्त्रियों का मत है कि कोरोना प्रकोप देश की अर्थव्यवस्था के लिए 2008 की वैश्विक मंदी से भी अधिक भयावह दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, यह भी अनुमान है कि 1930 के दशक में दुनिया में आई महामंदी से जिस तरह भारत प्रभावित हुआ था, लगभग वैसा ही प्रभाव कोरोना संकट का इस बार देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

चूंकि इस समय चीन भारत का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीन के साथ सबसे अधिक कारोबार प्रभावित हुआ है। चीन से आयातित कच्चे माल और वस्तुओं पर देश के कई उद्योग-कारोबार निर्भर हैं। ऐसे में दवा उद्योग, वाहन उद्योग, स्टील उद्योग, खिलौना कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, केमिकल्स, डायमंड आदि कारोबार मुश्किलों का सामना करते दिख रहे हैं। निस्संदेह देश के विमानन क्षेत्र पर कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर हुआ है। कई विमानन कंपनियों के वेतन में कटौती की गई है। देश के लोग विदेश नहीं जा पा रहे और विदेशी पर्यटक देश में नहीं आ पा रहे हैं।

इस बंदी की मार देश के खाद्य उद्योग पर भी पड़ रही है। मुर्गीपालन उद्योग को बड़ा नुकसान हो रहा है। देश का कपड़ा उद्योग कोरोना की चपेट में आ गया है। इसी तरह होटल कारोबार तेजी से घटा है। टिकाऊ उपभोक्ता सामान कारोबार को नुकसान झेलना पड़ रहा है। सिनेमा और मॉल बंद कर दिए गए हैं। इससे सिनेमा जगत और मॉल को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसी तरह निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। भारतीय कंपनियों के सामने नकदी का दबाव बढ़ गया है। भारत के शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई है।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पूर्ण बंदी ने देश के उद्योग-कारोबार को सबसे अधिक प्रभावित किया है। देश में सबसे अधिक रोजगार सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) सृजित करते हैं, देश के करीब साढ़े सात करोड़ ऐसे छोटे उद्योगों में करीब अठारह करोड़ लोगों को नौकरी मिली हुई है। पूर्ण बंदी के कारण उद्योगों के ठप होने से देश के कोने-कोने में दैनिक मजदूरी करने वालों को काम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश के कुल कार्यबल में असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी नब्बे फीसद है। साथ ही देश के कुल कार्यबल में बीस फीसद लोग रोजाना मजदूरी करने वाले हैं। इन सबके कारण देश में चारों ओर रोजगार संबंधी चिंताएं और अधिक उभरी हैं।

हालांकि बंदी के बीच प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से कर्मचारियों का वेतन न काटने की बात कही है, लेकिन कई उद्योग-कारोबार बुरी तरह प्रभावित होने के कारण अपने यहां कार्यरत कई कर्मचारियों को कम वेतन या अवैतनिक अवकाश देते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में कोरोना प्रकोप से देश में बढ़ रही आर्थिक और रोजगार चुनौतियों का सामना करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण रणनीतिक कदम जरूरी हैं। जिन उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होने से लोगों का रोजगार जा रहा है, उन उद्योगों को सरकारी सहारा दिया जाना जरूरी है। सरकार को यह निगरानी रखनी होगी कि उद्योग-कारोबार अपने कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश पर न भेजें।

यह भी जरूरी है कि बंदी के बाद सरकार द्वारा सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर तत्परता से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो। सरकार ने 14 मार्च को संसद में बताया कि रेलवे, रक्षा, डाक सहित अन्य सरकारी विभागों में करीब 4.76 लाख भर्तियां की जानी हैं। इनमें से यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए 1.34 लाख और रक्षा विभाग में 3.4 लाख खाली पदों को भरा जाना है। देश में रोजगार बढ़ाने के लिए निर्यात की संभावनाओं वाले उद्योगों को हर संभव प्रोत्साहन देकर, उनमें रोजगार के नए अवसर तेजी से निर्मित किए जाएं।

यह भी जरूरी है कि बंदी की अवधि खत्म होने के बाद सरकार द्वारा चीन सहित अन्य देशों में निर्यात के मौकों को मुठ्ठी में करने के लिए रणनीतिक कदम जरूरी होंगे। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय जब कोरोना से प्रभावित चीन कई वस्तुओं का निर्यात करने में सक्षम नहीं है, तब भारत चीन की अक्षमता का फायदा उठाते हुए वैश्विक निर्यात बाजार में खासकर इलेक्ट्रिक वस्तुएं, वाहन, आर्गेनिक केमिकल्स, चमड़ा जैसे क्षेत्रों में चीन का नया विकल्प बन सकता है।

देश को बढ़ती हुई रोजगार चुनौती से राहत दिलाने के लिए जरूरी है कि आगामी एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तवर्ष में रोजगार बढ़ाने की जो घोषणाएं की गई हैं, उनके क्रियान्वयन पर शुरू से ही ध्यान दिया जाए। कहा गया है कि राष्ट्रीय लॉजिस्टिक पॉलिसी जल्द जारी होगी। इसमें रोजगार पैदा करने, कौशल विकसित करने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को ज्यादा सक्षम बनाने पर जोर रहेगा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए अतिरिक्त धन आवंटित किया है। मछली पालन में अधिक रोजगार के लिए भारी प्रोत्साहन दिए गए हैं। यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि नए बजट के तहत देश में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए वित्तमंत्री प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दिखाई दी हैं। बजट के ऐसे प्रावधानों के उपयुक्त क्रियान्वयन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

हम आशा करें कि सरकार नए राहत पैकेज के तहत की गई घोषणाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगी और आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। हम आशा करें कि सरकार देश में सर्वाधिक रोजगार देने वाले छोटे उद्योगों को मुश्किलों से बचाने के लिए उपयुक्त नए आर्थिक पैकेज का एलान शीघ्र करेगी। राजकोषीय प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए राजकोषीय घाटे का स्तर जीडीपी के पांच फीसद तक लाने की डगर पर आगे बढ़ेगी। ऐसे रणनीतिक कदम आगे बढ़ाएगी, जिससे देश के उद्योगों और कारोबार सहित संपूर्ण अर्थव्यवस्था को आसन्न मंदी के दौर से बचाया जा सकेगा।

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