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राजनीति: खत्म करना होगा चीन का बाजार

विनिर्माण क्षेत्र में भारत के लिए प्रबल संभावनाएं हैं। अगर भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बना लेता है और विदेशी कंपनियों को मौका देता है तो इस क्षेत्र में चीन को आसानी से टक्कर दी जा सकती है और वहां से होने वाले आयात को एकदम खत्म किया जा सकता है।

भारत और चीन के संबंधों में तनाव के बीच भारत ने कई चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाया है। इसका असर भी दिख रहा है।

पिछले कुछ महीनों से पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने जो आर्थिक कदम उठाए हैं, उनका दूरगामी प्रभाव पड़ना निश्चित है। यह इसलिए भी जरूरी हो गया कि भारत चीन के लिए बड़ा बाजार है और यहां उसके आर्थिक हित भी कम नहीं हैं।

उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर बड़ी परियोजनाओं तक में चीन की हिस्सेदारी है। इसलिए चीन को आर्थिक झटका देकर भी उसे काबू करने की रणनीति पर भारत तेजी से काम कर रहा है। इसी के तहत भारत ने चीन के कई सामान और ऐप प्रतिबंधित किए हैं और कई परियोजनाओं से उसे बाहर का रास्ता दिखाया है। भारत के इन कदमों का कुछ असर तो अब दिखने भी लगा है। भारत में चीन से आयात में गिरावट आई है और दूसरी ओर चीन को होने वाला निर्यात बढ़ने लगा है।

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष (2020) अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत में चीन से होने वाले आयात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 29.20 फीसद की गिरावट आई है। चीन को आर्थिक चुनौती देने के लिए सरकार द्वारा टिक-टॉक सहित दो सौ चौबीस चीनी ऐप पर प्रतिबंध, चीनी सामान के आयात पर नियंत्रण, चीनी सामान पर शुल्क बढ़ाने की रणनीति, देश में चीनी सामान का बहिष्कार, सरकारी विभागों में चीनी उत्पादों की जगह यथासंभव स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की प्रवृत्ति और पूर्णबंदी में खरीद में कमी जैसे विभिन्न कारण चीन से आयात में बड़ी गिरावट की वजह रही हैं।

यह कोई मामूली बात नहीं है कि एक ओर जब चीन से भारत में आयात घट रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत से चीन को निर्यात बढ़ने लगा है। अप्रैल-जुलाई, 2020 के बीच भारत से चीन को होने वाले निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 30.70 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना आपदा के बाद अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया जैसे कई देशों ने चीन से दूरियां बना ली हैं।

जाहिर है, इसका असर चीन के साथ होने वाले व्यापार पर भी पड़ेगा। ऐसे में चीन ने भारत से अधिक मात्रा में कच्चे माल का आयात किया है। इससे यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल नहीं है कि इस वक्त चीन से आयात घटने और निर्यात बढ़ने का जो परिदृश्य उभरा है, वह आगे भी बने रहने की संभावना है।

चीन से आयात की जाने वाली कई वस्तुओं को भारत अगर अपने यहां बनाना शुरू कर देता है और उससे ज्यादातर चीजों का आयात बंद कर देता है तो भारत के लिए यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम तो होगा ही, चीन के लिए भी आर्थिक चुनौती बढ़ जाएगी।

सरकार चीन से आयात की जाने वाली कई वस्तुओं एवं सेवाओं के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के हरसंभव प्रयास में जुटी है। यही वक्त की मांग भी है। जैसे खिलौना उद्योग को ही लें। वैश्विक खिलौना उद्योग करीब सात लाख करोड़ रुपए का है, लेकिन भारत की इसमें हिस्सेदारी काफी कम है। ऐसे में खिलौना उद्योग को प्रोत्साहन देकर इसे आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

यह न सिर्फ चीन के लिए भारी नुकसान होगा, बल्कि भारत के लिए वैश्विक खिलौना कारोबार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ा अवसर भी हो सकता है। स्थानीय स्तर पर खिलौना उद्योग बढ़ने से भारत छोटे उद्योगों को काफी मदद मिलेगी। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से चीनी वस्तुओं के आयात को नियंत्रित करते हुए देश में कुटीर और लघु उद्योगों को पुनर्जीवित करके बड़ी संख्या में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

ऐसे कई उत्पाद हैं जो बाहर से देश में आ जाते हैं और इसकी वजह से ईमानदार करदाताओं की ओर से व्यर्थ खर्च होता है। उनके विकल्प का निर्माण भारत में आसानी से किया जा सकता है और देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

भारत के ऐसे कई मजबूत आर्थिक पक्ष हैं, जिनके आधार पर वह चीन को आसानी से आर्थिक रूप से पटखनी दे सकता है। इसके लिए भारत को वैश्विक निवेश, वैश्विक कारोबार और वैश्विक निर्यात बढ़ाने के उपाय करने होंगे। कोविड-19 के फैलाव के बाद चीन से काफी सारी विदेशी कंपनियों ने कारोबार समेटा है और इसका नतीजा यह हुआ कि चीन से भारी विदेशी निवेश निकल कर दूसरे देशों में जा रहा है। यह एक ऐसा अवसर है जब भारत चीन छोड़ कर जाने वाली विदेशी कंपनियों को अपने यहां अवसर दे।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी को लेकर चीन के प्रति बनी नाराजगी से चीन में कार्यरत कई वैश्विक कंपनियां अपनी निर्माण इकाइयों को पूरी तरह या आंशिक रूप से चीन से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी में हैं। ऐसी कंपनियों जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, ई-कॉमर्स, वाहन, फूड प्रोसेसिंग और कपड़ा क्षेत्रों की कई दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कारोबार को भारत में स्थानांतरित करने में रुचि दिखाई है।
विनिर्माण क्षेत्र में भारत के लिए प्रबल संभावनाएं हैं।

अगर भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बना लेता है और विदेशी कंपनियों को मौका देता है तो इस क्षेत्र में चीन को आसानी से टक्कर दी जा सकती है और वहां से होने वाले आयात को एकदम खत्म किया जा सकता है। विनिर्माण क्षेत्र में भारत आर्थिक मापदंडों के आधार पर अभी भी चीन से आगे है। भारत ने विश्व की एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के तौर पर पहचान बनाई है।

इतना ही नहीं, इस समय सरकार देश के विभिन्न उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग में आने वाले रसायनों के आयात को कम करने के लिए देश में ही उनके उत्पादन की तैयारी कर रही है और इसके लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेटिव- पीएलआइ) शुरू की गई है। इसके तहत आगामी पांच वर्षों में पच्चीस हजार करोड़ रुपए निवेश करने की योजना है। अभी भारत अपने दवा उद्योग, कीटनाशक और कुछ अन्य प्रमुख उद्योगों में उपयोग में आने वाले करीब अस्सी से नब्बे फीसद रसायन चीन से ही खरीदता है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ा कर हम स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर तक ले जा सकते हैं। अगर हम पेट्रोलियम उत्पाद, गूगल, फेसबुक जैसी सूचना तकनीक कंपनियों को छोड़ दें, तो अधिकांश क्षेत्रों में हमारे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बनने की पूरी संभावनाएं रखते हैं। इस समय दुनिया में दवाओं सहित कृषि, प्रसंस्करित खाद्य, वस्त्र और परिधान, ज्वेलरी, चमड़ा और चमड़े का सामान, कालीन और मशीनें व कलपुर्जे जैसी कई वस्तुओं की भारी मांग है। ऐसे में इन क्षेत्रों में भारत अपना बड़ा बाजार बना सकता है।

देश में जिन उद्योगों का उत्पादन बहुत कुछ आयातित कच्चे माल और आयातित वस्तुओं पर निर्भर है, उनके कच्चे माल के उत्पादन के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी, ताकि जरूरी कच्चा माल भी भारत में ही तैयार किया जा सके। इसके अलावा आत्मनिर्भरता के रास्ते में एक बड़ी चुनौती देश में आपूर्ति शृंखला सेवाओं को आसान बनाने और इसके लिए नए उपयुक्त बुनियादी ढांचे से भी संबंधित है।

अगर भारत चीन से आयात होने वाले कच्चे माल में से आधा भी अपने यहां तैयार करना शुरू कर देता है, तो यह कम बड़ी उपलब्धि नहीं होगी। चीन के साथ संबंधों में जिस तरह का उतार-चढ़ाव आ रहा है और यह भी साफ है कि उसकी पूरी हमदर्दी पाकिस्तान के साथ है, ऐसे में भारत को जल्द से जल्द अब चीन पर से निर्भरता खत्म करनी होगी।

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