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राजनीति: मंदी से उबरने की चुनौती

तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार को खर्च के मोर्चे पर ज्यादा उपाय करने होंगे। त्योहारी बिक्री से उपभोक्ताओं का मनोबल तो बढ़ा है, लेकिन अंतिम उपभोग व्यय पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अभी भी 11.3 फीसद कम है। रोजगार सृजन में तेजी आने, सभी मजदूरों और कामगारों के काम पर लौटने, कोरोना की दवाई या टीके के बाजार में आने से इसमें और भी तेजी आएगी।

Economyसांकेतिक फोटो।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार हुआ और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में संकुचन पहली तिमाही के 23.9 फीसद की तुलना में सुधर कर 7.5 फीसद रह गया। यह सुधार मौद्रिक नीति समिति के अनुमान शून्य से 9.8 फीसद कम और भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान शून्य से 8.6 फीसद से बेहतर है।

हालांकि, दूसरी तिमाही में कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ, लेकिन बंदी को चरणबद्ध तरीके से खोलने की वजह से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई, जिससे जीडीपी वृद्धि दर में बढोतरी हुई। इसके अलावा सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में भी गिरावट में कमी आई। पहली तिमाही में जीवीए शून्य से 22.8 फीसद कम रहा था, जो दूसरी तिमाही में घटता हुआ सात फीसद पर आ गया।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पूर्णबंदी के नकारात्मक असर से अब मुक्ति मिल रही है। जीडीपी का आकलन हर तिमाही में किया जाता है और साल के अंत में पूरे साल के समग्र जीडीपी के आंकड़े जारी किए जाते हैं, वहीं जीवीए से किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल परिणाम और आय का पता चलता है। जीवीए से इस बात का सूचक है कि तय अवधि में व्यय और कच्चे माल की कीमत को अलग करने के बाद कितने रुपए के सामान और सेवा का उत्पादन हुआ। इससे यह भी पता चलता है कि किस क्षेत्र, उद्योग या क्षेत्र में कितना उत्पादन हुआ।

अर्थव्यवस्था में सुधार कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों से आया है। कृषि क्षेत्र में दूसरी तिमाही में 3.4 फीसद की दर से वृद्धि हुई। पहली तिमाही में भी इस क्षेत्र में इसी दर से वृद्धि हुई थी। सबसे ज्यादा सुधार उद्योग क्षेत्र में दर्ज किया गया। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में सिर्फ 2.1 फीसद की गिरावट आई, जबकि पहली तिमाही में 38.1 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी।

निर्माण क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि हुई। पूर्व के आंकड़ों से पता चलता है कि निर्माण क्षेत्र में वृद्धि पहली तिमाही से दूसरी तिमाही में हमेशा कम रहती है, लेकिन कोरोना काल में दूसरी तिमाही में पहली तिमाही से बेहतर परिणाम रहे हैं। इस अवधि में निर्माण क्षेत्र में वृद्धि होना आश्चर्यजनक है, क्योंकि आमतौर पर मानसून में निर्माण कार्य बंद रहते हैं।

विनिर्माण क्षेत्र में पांच लाख उनयासी हजार छह सौ तिरासी रुपए का जीवीए वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 के जीवीए से अधिक है। बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगिता वाली सेवाओं में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह उम्मीद बंदी है कि आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था में और सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।

लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिनमें वृद्धि के संकेत अभी बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। जैसे सेवा क्षेत्र। इस क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 11.4 फीसद की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में यह गिरावट शून्य से 20.6 फीसद नीचे थी। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार आदि क्षेत्रों में भी सुधार हुआ, लेकिन उम्मीदों के मुताबिक नहीं। वित्तीय सेवा, बीमा, रक्षा आदि क्षेत्रों में भी गिरावट दर्ज की गई।

दूसरी तिमाही में सेवा क्षेत्र का आकार राशि में 17.19 लाख करोड़ रुपए का रहा, जबकि वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में राशि में इसका आकार 17.35 लाख करोड़ रुपए था। इस तरह दूसरी तिमाही में सेवा क्षेत्र का राशि में आकार वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही से सिर्फ पंद्रह हजार करोड़ रुपए कम रहा। सेवा क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार को अभी कई कदम उठाने की जरूरत है।

अर्थव्यवस्था में निजी खपत का पहलू बड़ी भूमिका निभाता है। दूसरी तिमाही में निजी खपत में वृद्धि हुई। हालांकि, वर्ष दर वर्ष के आधार पर इस मोर्चे पर वृद्धि दर शून्य से 11.3 फीसद कम रही। सरकार द्वारा किए जाने वाले पूंजीगत खर्च में वृद्धि दर शून्य से नीचे 22.2 फीसद रही। हालांकि निजी उपभोग वित्त वर्ष 2020 की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ दो सौ अंक कम है। कच्चे तेल की कीमत के नरम रहने से आयात लगातार संकुचन की स्थिति में है।

निर्यात में सुधार हुआ है, लेकिन सुधार की गति बहुत ज्यादा तेज नहीं है। इसलिए व्यापार घाटे पर कोई खास सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। हाल में भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्तूबर के लिए क्षेत्रवार ऋण वृद्धि का आंकड़े जारी किए हैं। इनके अनुसार उद्योग को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि दर में इजाफा हुआ है।

हालांकि यह वृद्धि पिछले साल के सितंबर महीने से कम है, लेकिन तालाबंदी के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए इन आंकड़ों को उत्साहजनक माना जा सकता है। सबसे अधिक ऋण वृद्धि वैयक्तिक ऋण क्षेत्र में दर्ज की गई है। अक्तूबर में घर, वाहन और दूसरे वैयक्तिक ऋण की भी मांग बढ़ रही है।

कोरोना काल में कारपोरेट कंपनियां अपने खर्च को कम करने पर भी विशेष जोर दे रही हैं। सीमेंट, उपभोक्ता वस्तु आदि क्षेत्रों में कर्मचारियों पर होने वाले खर्च में छह फीसद तक की कटौती की गई है, जबकि वित्त वर्ष 2020 में कर्मचारियों के खर्च में पांच फीसद की कटौती की गई थी।

छोटी कंपनियां, जिनका कारोबार पांच सौ करोड़ रुपए या उससे कम है, अपने खर्च में आक्रामक तरीके से कटौती कर रही हैं। इन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में पच्चीस फीसद तक की कटौती की हैं। उदाहरण के तौर पर 1800 छोटी कंपनियां, जिनका कारोबार 50 करोड़ तक है ने अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में औसतन 11.5 फीसद की कटौती की है।

जीडीपी के साथ-साथ सरकार ने वित्तीय आंकड़ों को भी जारी कर दिया है। राजकोषीय घाटा अक्तूबर 2020 के बजटीय अनुमान का 119.7 फीसद है। कुल प्राप्तियां बजटीय अनुमान का लगभग इकतीस फीसद है। सरकार द्वारा एकत्र किया गया राजस्व संग्रह 5.75 लाख करोड़ रुपए रहा।

गैर-कर राजस्व, जिसमें उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, सीजीएसटी आदि कर राजस्व शामिल हैं, 1.16 लाख करोड़ रुपए रहा। यह बजटीय अनुमान का 30.2 फीसद है और अक्तूबर में इसमें पूर्व के महीनों की तुलना में वृद्धि हुई है। लेकिन विनिवेश से अब तक केवल 6,178 करोड़ रुपए मिल पाए हैं जो बजट अनुमान 1.20 लाख करोड़ रुपए बहुत कम हैं। सरकार ने अक्तूबर महीने में डेढ़ लाख करोड़ रुपए ब्याज के रूप में भुगतान किया है, जो वित्त वर्ष 2020 की समान अवधि में 2.0 लाख करोड़ रुपए रहा था।

आंकड़े बताते हैं कि कोरोना से उत्पन्न आर्थिक दुष्परिणाम कम होने लगे हैं। जीडीपी में सुधार आना इसी बात का संकेत है। दूसरी तिमाही में निवेश उम्मीद से बेहतर रहा है, लेकिन निजी खर्च में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है। दूसरी तिमाही में सरकार द्वारा भी अपेक्षित खर्च नहीं किया जा सका है।

तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार को खर्च के मोर्चे पर ज्यादा उपाय करने होंगे। त्योहारी बिक्री से उपभोक्ताओं का मनोबल तो बढ़ा है, लेकिन अंतिम उपभोग व्यय पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अभी भी 11.3 फीसद कम है। रोजगार सृजन में तेजी आने, सभी मजदूरों और कामगारों के काम पर लौटने, कोरोना की दवाई या टीके के बाजार में आने से इसमें और भी तेजी आएगी। समग्रता में दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि को पंख लगे हैं, जिसे और प्रोत्साहन देने की जरूरत है। मौजूदा परिप्रेक्ष्य में उम्मीद की जा सकती है कि तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्घि में और भी तेजी आएगी और विकास दर सकारात्मक होगी।

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