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राजनीतिः लक्ष्य और चुनौतियां

सरकार का मानना रहा है कि ढांचागत क्षेत्र में सुधार के बिना अर्थव्यवस्था को गति नहीं दी जा सकती। इसीलिए वित्त मंत्री ने नए साल के पहले दिन ही घोषणा की थी कि सरकार आगामी पांच वर्षों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं में एक सौ दो लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी। ऐसे में वित्त मंत्री ने नए बजट के तहत बंदरगाहों, राजमार्गों और हवाई अड्डों के निर्माण पर ज्यादा खर्च करने की योजना रखी है।

Author Published on: February 17, 2020 1:19 AM
सरकार आगामी पांच वर्षों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं में एक सौ दो लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी।

जयंतीलाल भंडारी
वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश होने के बाद अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार से बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। शेयर बाजार का ग्राफ भी सुधरता दिखाई दे रहा है। लेकिन देश के उद्योग-कारोबार की दशा बताने वाले औद्योगिक सूचकांक के जो आंकड़े आए हैं, वे चिंता पैदा करने वाले हैं। इसके अलावा कोरोना वायरस और वैश्विक सुस्ती का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ना निश्चित है। इसलिए नए वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी रहने के ही संकेत नजर आ रहे हैं। हालांकि वर्ष 2020-21 का आम बजट क्रय शक्ति बढ़ाने वाला लोक लुभावन उदार बजट माना जा सकता है। यह बजट मुश्किलों के दौर से गुजरते हुए विभिन्न वर्गों की उम्मीदों को पूरा करेगा, ऐसा सरकार का मानना है।

अर्थशास्त्रियों का भी मानना यही है कि बजट का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर होगा। बजट के तहत व्यक्तिगत आयकर की नई योजना और छूट, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ व कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभान्वित करके जहां आर्थिक सुस्ती का मुकाबला किया जा सकेगा, वहीं विकास दर बढ़ाई जा सकेगी। नए बजट में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का साढ़े तीन फीसद निर्धारित किया है, इससे अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी धनराशि अतिरिक्त खर्च करने की गुंजाईश बढ़ गई है।

बजट सबसे अधिक जोर खेती और किसानों के कल्याण पर दिया गया है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए तीन लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार को लग रहा है कि इतनी भारी-भरकम रकम खर्च कर सन 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिल सकेगी। बजट में किसानों के लिए सोलह बड़े एलान किए गए हैं। महत्त्वपूर्ण कदम यह है कि सौ जिलों में पानी की व्यवस्था के लिए बड़ी योजना चलाई जाएंगी, ताकि किसानों को पानी की दिक्कत ना आए। पीएम कुसुम योजना के जरिए किसानों के पंप को सौर पंपों से जोड़ा जाएगा। इस योजना में बीस लाख किसानों को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा पंद्रह लाख किसानों के ग्रिड पंप भी सौर पंप से जोड़े जाएंगे। किसानों को फसल में उर्वरकों के इस्तेमाल की जानकारी को बढ़ाया जाएगा। देश में मौजूद भंडारण गृह और शीत गृहों को नाबार्ड अपने अधीन लेगा और नए तरीके से इसे विकसित किया जाएगा। इसके अलावा और अधिक संख्या में भंडार गृह और शीत गृह बनाए जाएंगे। इसके लिए पीपीपी (सरकारी-निजी भागीदारी) मॉडल अपनाया जाएगा।

आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री ने सबसे ज्यादा ध्यान ग्रामीण मांग बढ़ाने पर दिया है। महिला किसानों के लिए धन्य लक्ष्मी योजना घोषित की गई है, जिसके तहत बीज से जुड़ी योजनाओं में महिलाओं को मुख्य रूप से जोड़ा जाएगा। कृषि उड़ान योजना शुरू की जाएगी। दूध, मांस, मछली सहित जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए विशेष रेल भी चलाई जाएगी। किसानों के लिए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पर फोकस किया जाएगा। जैविक खेती के जरिए आॅनलाइन बाजार को बढ़ाया जाएगा। दूध के उत्पादन को दोगुना करने के लिए सरकार की ओर से योजना चलाई जाएंगी।

सरकार का मानना रहा है कि ढांचागत क्षेत्र में सुधार के बिना अर्थव्यवस्था को गति नहीं दी जा सकती। इसीलिए वित्त मंत्री ने नए साल के पहले दिन ही घोषणा की थी कि सरकार आगामी पांच वर्षों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं में एक सौ दो लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी। ऐसे में वित्त मंत्री ने नए बजट के तहत बंदरगाहों, राजमार्गों और हवाई अड्डों के निर्माण पर ज्यादा खर्च करने की योजना रखी है। उन्होंने बजट में एलान किया कि ढाई हजार किलोमीटर एक्सप्रेस हाईवे, नौ हजार किलोमीटर आर्थिक गलियारा और दो हजार किलोमीटर सामरिक राजमार्ग बनाए जाएंगे। ये काम 2024 तक पूरे होंगे। वहीं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे, चेन्नई-बेंगलुरू एक्सप्रेस वे भी जल्दी बनकर तैयार होगा। अगर ये परियोजनाएं सिरे चढ़ जाती हैं और इन पर तेजी से काम होता है तो अर्थव्यवस्था में जान फूंकने में यह कारगर कदम साबित होगा।

प्रस्तावित बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, छोटे उद्योग-कारोबार और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों के लिए बजट आबंटन बढ़ाया गया है। नई शिक्षा नीति भी जल्द ही लागू करने की बात है। बजट में शिक्षा के लिए 99,300 करोड़ रुपए और कौशल विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा स्वरोजगार और स्टार्टअप के लिए आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। स्वरोजगार की दिशा में यह बड़ी पहल है जो बेरोजगारी की समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है।

इस बार के बजट की सबसे महत्त्वपूर्ण बात में देश के छोटे आयकरदाताओं, नौकरी पेशा और मध्यम वर्ग के अधिकांश लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाए गए कदम हैं। व्यक्तिगत आयकर की नई वैकल्पिक व्यवस्था पेश की गई है। कर सुधारों की दिशा में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है। आयकरदाताओं को लाभ पहुंचाना तो मकसद है ही, यह अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने का प्रयास भी है। हालांकि, सरकार ने आयकर की दरों में बदलाव शर्तों के साथ किया है। नए बदलाव के तहत कर छूट लेने के लिए निवेश पर मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि यह बजट छोटे आयकरदाताओं और निम्न मध्यम वर्ग के लिए लाभप्रद हो सकता है।

बजट का जोर उन उपायों पर केंद्रित है जो लोगों की क्रय शक्ति बढ़ा सकें। उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, तभी बाजार में जान आएगी और आर्थिक सुस्ती दूर होगी। बजट के पेश होने के चार दिन बाद भारत के विनिर्माण क्षेत्र का हाल बताने वाले परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआइ) और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का हाल बताने वाले सूचकांक ने बढ़त दिखाई। विनिर्माण क्षेत्र का सूचकांक आठ साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। दिसंबर 2019 में यह 52.7 पर था और जनवरी 2020 में 55.3 दर्ज किया गया। जबकि सेवा क्षेत्र सूचकांक जो दिसंबर 2019 में 53.3 था, वह जनवरी 2020 में बढ़ कर 55.5 अंक पर पहुंच गया। यह माना जाता है कि यदि यह सूचकांक 50 से ऊपर है, तो यह न केवल अर्थव्यवस्था विस्तार, उत्पादन व सेवा क्षेत्र वृद्धि का संकेत है, बल्कि अनुकूल बाजार, नई मांग, बिक्री, कच्चे माल की खपत और रोजगार बढ़ने का भी संकेत है।

हालांकि पिछले दिनों ऐसी रिपोर्टें भी आई हैं जिनमें भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन सुधरने का दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना 2020’ (डब्ल्यूईएसपी) रिपोर्ट में भारत की आर्थिक सुस्ती दूर करने और विकास दर संबंधी जो बात कही गई है, उससे यह साफ है कि वैश्विक सुस्ती के कारण ही अन्य देशों के साथ-साथ भारत की भी विकास दर घटी है, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। ऐसे में यदि भारत निवेश और खपत में वृद्धि करने के लिए अधिक राजकोषीय प्रोत्साहन व संरचनात्मक सुधारों की रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा तो वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर 6.6 फीसद के स्तर पर पहुंच सकती है। नए बजट के समक्ष बड़े विनिवेश लक्ष्य और ऊंची विकास दर जैसी चुनौतियां हैं। बजट में घोषित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार को नए वित्त वर्ष की शुरुआत से ही जुट जाना होगा और योजनाओं पर तेजी से अमल करना होगा। तभी आर्थिक सुस्ती से निपटा जा सकेगा।

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