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दूसरी लहर के असर

इस वक्त कई राज्यों में आंशिक बंदी के कारण एमएसएमई प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें एक बार फिर से ब्याज राहत की जरूरत पड़ सकती है। कोरोना प्रभावित राज्यों में एमएसएमई को बिके हुए माल का पर्याप्त भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इससे कार्यशील पूंजी की कमी हो गई है। अगर सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए तो कई उद्योगों के सामने एनपीए श्रेणी में आ जाने का खतरा है।

Corona crisisसांकेतिक फोटो।

जयंतीलाल भंडारी

देश कोरोना की दूसरी लहर के कारण गंभीर संकट में है। इसका असर अर्थव्यवस्था से लेकर समाज के सभी हिस्सों पर पड़ा है। आबादी का हर तबका संक्रमण की मार झेल रहा है। इससे उपजे हालात ने जीवन जोखिम में डाल दिया है। नौकरीपेशा लोगों से लेकर रोज कमाने-खाने वालों तक की स्थिति दयनीय हो चुकी है।

महामारी के दुष्प्रभावों ने छोटे-बड़े कारोबारों तक की कमर तोड़ कर रख दी। ऐसे में निश्चित रूप से करोड़ों लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है। वैसे यह सब साल भर से चला आ रहा था। हालांकि कुछ महीने पहले संकेत मिलने लगे थे कि हालात अब काबू में आ रहे हैं। लेकिन दूसरी लहर ने और तगड़ा झटका दे दिया। अब महामारी के साथ महंगाई भी लोगों को रुला रही है। ऐसे में घरों का बजट बुरी तरह से बिगड़ गया है। मोटा अनुमान बताता है कि कोरोना से तबाह अर्थव्यवस्था ने करोड़ों लोगों को गरीबी में धकेल दिया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल में लोगों की आमदनी पर काफी असर पड़ा है। सबसे ज्यादा मध्य वर्ग की आमदनी घटी है। संकटपूर्ण हालात से निपटने के लिए अधिकतर लोगों को बैंकों में जमा अपनी बचत से काम चलाने को मजबूर होना पड़ास क्योंकि उनके पास और कोई उपाय नहीं रह गया था। यही खतरा फिर मंडराने लगा है। आमदनी में एक बार फिर बड़ी गिरावट आने और निजी क्षेत्र के महंगे स्वास्थ्य संबंधी खर्च की वजह से मध्य वर्ग गरीब तबके में शामिल होने से सिर्फ कुछ कदम ही दूर है। गौरतलब है कि अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर ने एक अध्ययन में भारत के मध्य वर्ग की संख्या में कमी आने की बात कही है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक महामारी के कारण उपजे आर्थिक संकट से एक साल के दौरान भारत में मध्य वर्ग के लोगों की संख्या करीब दस करोड़ से घट कर साढ़े छह करोड़ रह गई है और साढ़े तीन करोड़ लोग गरीबी के दलदल में चले गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन दस से बीस डॉलर यानी करीब सात सौ रुपए से डेढ़ हजार रुपए प्रतिदिन कमाने वाले को मध्यम वर्ग में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन में कोरोना संक्रमण के कारण पिछले एक वर्ष में मध्यम आय वर्ग की संख्या करीब एक करोड़ ही घटी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय परिवारों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है।

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाला सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्योग क्षेत्र (एमएसएमई) भी दयनीय हालत में है। दूसरी लहर से निपटने के लिए एक बार फिर से कई राज्यों में पूर्णबंदी और आंशिक बंदी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इससे देश की विनिर्माण गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। उत्पादन श्रृंखला फिर बाधित होने लगी है। इससे छोटे उद्योग-कारोबारों की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

हालांकि कोरोना की पहली लहर के कारण लाखों छोटे उद्यमी तो अभी तक भी आर्थिक व रोजगार संबंधी परेशानियों से उबर नहीं पाए हैं, और ऐसे में फिर दूसरी लहर ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डेटा कंपनी- डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने महामारी के कारण भारत के छोटे उद्योगों के संकट पर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि बयासी प्रतिशत छोटे उद्योग-कारोबार कंपनियों पर महामारी का बुरा असर पड़ा है।

सबसे अधिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की छोटी कंपनियां प्रभावित हुई हैं। सर्वे में कहा गया है कि पिछले एक साल के दौरान भारत महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देश के रूप में उभरा है। अब दूसरी लहर के मामले बढ?े के साथ विभिन्न राज्यों में बंदी और कड़े प्रतिबंध जैसे कदमों का आर्थिकी पर भारी असर पड़ा है। आमदनी घटने के साथ मांग गायब हो गई है। सर्वे में शामिल सत्तर प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें कोविड-19 पूर्व के मांग के स्तर पर पहुंचने के लिए करीब एक साल लगेगा। इसी तरह 22 अप्रैल को रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में कोरोना की दूसरी लहर भारतीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी की राह में बड़ी बाधा बन गई है।

आय पर असर पड़ने से मध्य वर्ग संकट में है। जहां घर से काम की वजह से करों में छूट के कुछ माध्यम कम हो गए, वहीं बड़ी संख्या में लोगों के लिए डिजिटल तकनीक, ब्रॉडबैंड, बिजली का बिल जैसे खर्चों के भुगतान बढ़ने से आमदनी पर असर पड़ा है। बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्थाओं से संबंधित बदलावों ने भी खर्च को बढ़ाया है। लाखों लोगों ने घर, वाहन या दूसरी जरूरतों के लिए जो कर्ज ले रखे हैं, उनकी किस्तें चुकाना भारी पड़ रहा है।

हालांकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और शेयर बाजार को प्रोत्साहन देने के लिए बजट में कई प्रोत्साहन सुनिश्चित किए हैं। लेकिन इस बजट में छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। कोरोना के कारण बने आर्थिक हालात का मुकाबला करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मध्य वर्ग को कोई विशेष राहत नहीं मिली है।

यहां यह भी महत्त्वपूर्ण है कि पिछले एक वर्ष में मध्य वर्ग के सामने एक बड़ी चिंता बचत योजनाओं और बैंकों में सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दर घटने संबंधी भी रही है। सरकार ने एक अप्रैल 2021 से कई बचत योजनाओं पर ब्याज दर और घटा दी थी, लेकिन अचानक ही यह फैसला वापस भी ले लिया। सरकार द्वारा बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाते हुए बैंक जमा पर ब्याज चार से घटा कर साढ़े तीन फीसद सालाना कर दिया गया था।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजनाओं पर देय ब्याज 7.4 फीसदी से घटा कर 6.5 फीसदी कर दिया गया था। राष्ट्रीय बचत पत्र पर देय ब्याज 6.8 फीसदी से घटा कर 5.9 फीसदी और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर देय ब्याज 7.1 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया गया था। ब्याज की दरों में कमी से देश की उस बड़ी आबादी की आय बुरी तरह प्रभावित हो रही है जिसकी आमद का एकमात्र जरिया लघु बचतों पर निवेश से मिलने वाला ब्याज ही होता है।

एमएसएमई को संकट से उबारने के लिए जरूरी है कि सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की पेचीदगियों को खत्म करे। छोटे और मझौले उद्योगों को फिर से खड़ा करने के लिए प्रोत्साहन और करों में राहत की सख्त जरूरत है और यह वक्त की मांग भी है। जब इस क्षेत्र के उद्योदों में जान आएगी तभी मध्य वर्ग को कारोबारी शक्ति मिलेगी। इस वक्त कई राज्यों में आंशिक बंदी के कारण एमएसएमई प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें एक बार फिर से ब्याज राहत की जरूरत पड़ सकती है। कोरोना प्रभावित राज्यों में एमएसएमई को बिके हुए माल का पर्याप्त भुगतान नहीं मिल पा रहा है।

इससे कार्यशील पूंजी की कमी हो गई है। अगर सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए तो कई उद्योगों के सामने एनपीए श्रेणी में आ जाने का खतरा है। मालूम हो कि सरकार ने खुदरा कर्ज लेने वालों समेत एमएसएमई को पिछले वित्त वर्ष में कोरोना काल में मार्च से अगस्त के छह माह के लिए कर्ज की किस्तों और ब्याज के भुगतान के लिए समय दिया था। तब करीब तीस फीसद एमएसएमई ने इस सुविधा का फायदा उठाया था।

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