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धर्मक्षेत्रे संघक्षेत्रे की ओर बढ़ता देश

यह वाकई सोचने पर मजबूर करता है कि भारी जनादेश से चुने गए 325 विधायकों में से भाजपा के पास क्या एक भी नेता इस लायक नहीं था जो उत्तर प्रदेश की कमान संभाल सके।
Author April 15, 2017 03:03 am
यूपी सीएम योगी अदित्यनाथ

यह वाकई सोचने पर मजबूर करता है कि भारी जनादेश से चुने गए 325 विधायकों में से भाजपा के पास क्या एक भी नेता इस लायक नहीं था जो उत्तर प्रदेश की कमान संभाल सके। अगर इन सबमें से कोई भी नेता इस काबिल नहीं था तो क्या यह माना जाए कि भाजपा के जितने भी विधायक चुन कर जनता ने प्रदेश की विधानसभा में भेजे हैं वो शासन चलाने लायक नही हैं। अब वक्त आ गया है कि धीरे-धीरे देश को हिंदुत्व के रास्ते पर लाया जा सके। जिसका उदाहरण उत्तराखंड के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से समझा जा सकता है। ये दोनों व्यक्ति संघ में प्रचारक के तौर पर काम कर चुके हैं।  विकास के रथ पर सवार होकर उत्तर प्रदेश की जनता के बीच वोट मांगने गई भाजपा का विकासरूपी रथ सत्ता प्राप्त करते ही भगवा रंग धारण कर गया। अब यह लगने लगा है कि किसी भी राज्य में भाजपा के चुनाव जीतने पर संघ के ही किसी व्यक्ति को राज्य के मुखिया के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इसी कड़ी को और मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का नाम अब देश के राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के भीतरी खानों में चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि भागवत इसे खारिज कर चुके हैं। भागवत तो वैसे भी व्यावहारिक नाम नहीं दिख रहा, लेकिन यह तयशुदा सा लग रहा है कि कोई संघ की पृष्ठभूमि का व्यक्ति ही राष्ट्रपति पद के लिए चुना जाएगा।

संघ का तो लक्ष्य ही देश को हिंदू राष्ट्र अर्थात संघक्षेत्रे बनाने का है। और उसी नक्शेकदम पर चलते हुए उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ योगी को तो उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया है। हालांकि देश के जानेमाने विधिवेत्ता और पद्म विभूषण फली सैम नरीमन ने आदित्यनाथ योगी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुने जाने को लेकर एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने मोदी से पूछा कि क्या यह हिंदू राष्ट्र बनने की शुरुआत है। नरीमन ने कहा, ‘संविधान खतरे में है। उत्तर प्रदेश में बड़ी चुनावी जीत के बाद एक महंत को प्रधानमंत्री के कहने पर मुख्यमंत्री बना दिया गया’।

एक निजी न्यूज चैनल को दिए गए प्रधानमंत्री के साक्षात्कार का एक अंश मुझे याद आ रहा है, जिसमें एंकर द्वारा भाजपा की ओर से गलत और भड़काऊ बयानबाजी करने वाले नेताओं को लेकर सवाल किया गया था। उन तमाम नेताओं में आज के उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का भी जिक्र था तो जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि आप ऐसे बयान देने वाले लोगों को अपने कार्यक्रमों में दिखाना या स्थान देना बंद कर दीजिए। लेकिन प्रधानमंत्री साहब, आज तो आपने ही ऐसे नेताओं को राजपाट सौंप कर मीडिया को इन्हें दिखाने पर मजबूर कर दिया है। राजनीति के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों में भी संघक्षेत्रे कायम करने के लिए संघ लगातार प्रयासरत है। इसी के तहत दिल्ली में आरएसएस की इकाई प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित ज्ञान संगम नाम की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से तकरीबन 721 शिक्षाविद और विशेषज्ञ आए थे। इनमें 51 केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी शामिल थे। जिसमें मोहन भागवत ने भी शिरकत की और कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारतीय दृष्टिकोण के लिहाज से एक ऐसा अकादमिक तंत्र तैयार करना है जो सरकार के दायरे में रहकर काम करे। मैं मुकेश भारद्वाज जी की बात से सहमत हूं कि देश धर्मक्षेत्रे संघक्षेत्रे की ओर अग्रसर है।
– गौरव कुमार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय

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