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शशिकला बन सकती हैं तमिलनाडु की सीएम, जयललिता की भतीजी ने कहा- यह सेना के तख्तापलट जैसा

ताजा घटनाक्रम से साफ है कि एक बार फिर से सियासी उल्ट फेर हो सकता है।

शशिकला नटराजन। (पीटीआई फाइल फोटो)

पिछले साल दिसंबर में जयललिता के मृत्यु की रस्सा-कस्सी के बाद जब पनीरसेलवम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने तब ऐसा लग रहा था जैसे तमिलनाडू में सियासी उथल-पुथल शांत हो चुकी है लेकिन ताजा घटनाक्रम से साफ है कि एक बार फिर से सियासी उल्ट फेर हो सकता है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री पद पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर सूत्रों को माने तो सत्ताधारी एअाईएडीएमके के विधायक रविवार (5फरवरी) को आयोजित होने वाली बैठक में दिवंगत जयललिता की करीबी सहयोगी शशिकला से सीएम पद संभालने का अनुरोध कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक तमिलनाडु के कार्यकारी राज्यपाल सी विद्यासागर राव से एअाईएडीएमके पार्टी के तरफ से समय भी मांगा गया है। 6 से 9 फरवरी के बीच में किसी समय राज्यपाल से मिलकर पार्टी नए मुख्यमंत्री के नाम का एेलान कर सकती है।

ये सेना के तख्तापलट जैसा
जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार ने शशिकला की संभावित ताजपोशी पर टिप्पणी करते हुए इसे सेना के तख्तापलट से तुलना की है। आजतक से दीपा ने कहा कि इस बात की उम्मीद काफी पहले से थी। अपनी निजी राय व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘दीपा तमिलनाडु का एक हिस्सा है तमिलनाडु के लोग यह फैसला स्वीकार नहीं करेंगे। तमिलनाडु के लोगों के लिए ऐसी बुरी स्थिति की कल्पना नहीं की थी। यह बहुत ही गलत निर्णय होगा बिल्कुल सेना के तख्तापलट जैसा। वे लोकतांत्रिक ढंग से चुनकर नहीं आई हैं। इससे पहले दीपा ने कहा था कि जयललिता की जगह कोई और बर्दाश्त नहीं होगा।

जयललिता की तरह दिखने वाली उनकी भतीजी दीपा जयकुमार ने राजनीति में अपनी बुआ के नक्शेकदम पर चलने का फैसला किया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपा ने कहा था, मैं 24 फरवरी को बुआ के जन्मदिन पर अपने पॉलिटिकल रोडमैप का एलान करूंगी। मैं उनकी जगह किसी और को बर्दाश्त नहीं कर सकती। चीजें अब बिगड़ रही हैं, पार्टी कैडर्स की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है। मुझे लेकर चल रही अफवाहें बदनाम करने की कोशिश है, लोग सच्चाई नहीं जानते। शशिकला के परिवार ने झूठे दावे किए हैं कि बुआ उनकी सलाह लेकर काम करती थीं। दीपा जयललिता के बड़े भाई जयकुमार की बेटी हैं। जयकुमार का भी निधन हो चुका है।

जयललिता के निधन के बाद पन्नीरसेल्वम को कार्यकारी मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था वहीं शशिकला को पार्टी की कमान सौंपते हुए महासचिव का पद दिया गया था। इसके बाद काफी विरोध भी हुआ लेकिन शशिकला महासचिव बनीं रहीं थी। पनीरसेल्वम जयललिता के बेदह नजदीकी थे और जब से जयललिता की तबियत खराब हुई थी तब से ओ पन्नीरसेल्वम ही उनका काम संभाल रहे थे। उनके निधन के एक दिन पहले पन्नीरसेल्वम को सीएम पद की शपथ भी दिलवाई गई थी। जब भी जयललिता को किसी वजह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी, उन्होंने पन्नीरसेल्वम पर ही भरोसा जताया था।

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