ताज़ा खबर
 

डिजिटल आतंकवाद की चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल इंडिया भारत की तकदीर बदलेगा, पर इसके दुरुपयोग को रोकने का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए।

प्रतीकात्मक चित्र

पिछले कुछ समय से भारत में आइएस यानी इस्लामिक स्टेट की गतिविधियां एकाएक बढ़ी हैं। आइएस से जुड़े कई आतंकी गिरफ्तार किए गए। लखनऊ में आइएस से प्रभावित एक आतंकी को पुलिस ने मार गिराया। आइएस से प्रभावित आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से कई खुलासे हुए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है। नींद उड़ने का मुख्य कारण आतंकियों द्वारा डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल है। पकड़े गए आतंकियों को किसी भी आतंकी संगठन ने अपने प्रशिक्षण शिविर में कड़ा प्रशिक्षण नहीं दिया था। पकड़े गए आतंकी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सीरिया जैसे देशों के किसी आतंकी शिविर में प्रशिक्षण लेकर नहीं आए थे। गिरफ्तार आतंकी डिजिटल तकनीक के माध्यम से आतंकी संगठनों के संपर्क में आए। डिजिटल तकनीक के सहारे ही उन्हें प्रशिक्षित किया गया।

यही खुलासे डिजिटल इंडिया के सामने डिजिटल आतंकवाद की नई चुनौती लेकर आए हैं। भारत सरकार ने कुछ समय पहले ही इसकी गंभीरता को समझा था। तभी सार्क सदस्यों के बीच डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग का मामला उठाया था। पिछले साल इस्लामाबाद में सार्क देशों के गृहमंत्रियों की बैठक में खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवादियों के संपर्क पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की थी कि सोशल मीडिया और अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकी का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल को रोकने के लिए कदम उठाए। आतंकी सैफुल्लाह की मौत के बाद कई खुलासे हुए हैं। सैफुल्लाह आइएस का आॅनलाइन निर्देशित-प्रभावित आतंकी था। सैफुल्लाह के पिता ने माना कि उसका बेटा आॅनलाइन जेहाद का शिकार हुआ।

HOT DEALS
  • Honor 7X 64 GB Blue
    ₹ 15398 MRP ₹ 17999 -14%
    ₹0 Cashback
  • Apple iPhone SE 32 GB Gold
    ₹ 19959 MRP ₹ 26000 -23%
    ₹0 Cashback

सैफुल्लाह वाट्स ऐप और अन्य डिजिटल तरीकों से आइएस के संपर्क में था। चिंता की बात है कि डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग रोकने की तकनीक में भारत काफी पीछे है। जनता भी सोचने को विवश है। क्योंकि इंटरनेट क्रांति ने जहां भारत में आम लोगों को काफी सुविधा दी है, तो इससे देश की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने की कोशिश की जा रही है। भारत में अभी तक आइएस की गतिविधियां इंटरनेट तकनीक से ही चल रही हैं। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में आइएस की गतिविधियां डिजिटल तकनीक पर आधारित हैं। आइएस से प्रभावित भारतीय युवा सीरिया और इराक में सक्रिय आइएस के कमांडरों से संपर्क में हैं।

भविष्य में यह चुनौती और बढ़ेगी। क्योंकि आइएस पूरे विश्व में आॅनलाइन आतंकी तैयार कर रहा है। वैसे आइएस पूरी दुनिया में तीन तरीके से आतंकी तैयार कर रहा है। पहला, सीरिया और इराक में गहन प्रशिक्षण देकर आतंकी तैयार किए जा रहे हैं। जबकि आॅनलाइन निर्देश देकर आतंकी तैयार करने का एक दूसरा तरीका आइएस के पास है। इससे अलग आॅनलाइन प्रभावित आतंकियों की एक टीम भी दुनिया में तैयार हो रही है, जो किसी कमांडर से निर्देश नहीं लेते हैं। हालांकि आतंक फैलाने के लिए आॅनलाइन तकनीकों का सहयोग तीनों तरह के आतंकी ले रहे हैं। सीरिया या इराक में प्रशिक्षित आतंकी भी वहां से निकलने के बाद कमांडरों से आॅनलाइन निर्देश लेते हैं। वहीं प्रभावित आतंकी आतंकी संगठनों के आॅनलाइन साहित्य का सहारा लेकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। इस साहित्य से ही वे विस्फोटक तैयार करने से लेकर विस्फोट करने तक की तकनीक सीख रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए डिजिटल दुनिया के माध्यम वाट्सऐप, फेसबुक, टेलीग्राम बहुत बड़ी चुनौती बन गए हैं। इसके माध्यम से आतंकी सीरिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों में मौजूद आइएस, अलकायदा और अन्य आतंकी संगठनों के कमांडरों से जुड़ गए हैं। आतंकी अलकायदा और आइएस के आॅनलाइन साहित्य और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। हाल ही में हैदराबाद में आइएस से प्रभावित आतंकी इब्राहिम याजदानी को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। वह टेलीग्राम पर सीरिया स्थित आइएस के कमांडरों से निर्देश ले रहा था। सुरक्षा एजेंसियों की चिंता है कि जिन डिजिटल माध्यमों से याजदानी आइएस से जुड़ा था, उन्हें रोकने का उपाय उनके पास नहीं है। वाट्सऐप से लेकर टेलीग्राम तक पर लिए जा रहे निर्देशों की रिकार्डिंग सुरक्षा एजेंसियां नहीं कर सकती हैं। भारत सरकार डिजिटल धन स्थानांतरण को बढ़ावा दे रही है। लेकिन भविष्य में इसका भी दुरुपयोग होने की संभावना है।

सुरक्षा एजेंसियों को इसकी चिंता है। क्योंकि आतंकी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। आतंकी संगठनों ने बिट क्वाइन का इस्तेमाल इस दिशा में शुरू कर दिया है। बिट क्वाइन एक प्रकार की डिजिटल करंसी है। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में बनाया जाता है और इसी रूप में इसे रखा भी जाता है। यह एक ऐसी करंसी है, जिस पर किसी देश की सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। रुपए या डॉलर की तरह इसकी छपाई नहीं की जाती। इसे कम्प्यूटर के जरिए बनाया जाता और इसमें आॅनलाइन भुगतान होता है। इसे डिजिटल या ‘गुप्त मुद्रा’ का नाम भी दिया गया है। इसके लिए कोई केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं है। लोग कठिन गणना और गुप्त कोडिंग के जरिए खुद अपनी मुद्रा जमा करते और फिर खर्च करते हैं। मुद्रा जमा करने को माइनिंग कहा जाता है। इसका इस्तेमाल पूरी दुनिया में आतंकी संगठन कर रहे हैं। यही नहीं, नशीले पदार्थों की तस्करी से लेकर हथियारों की तस्करी में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल इंडिया भारत की तकदीर बदलेगा, पर इसके दुरुपयोग को रोकने का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए।

भारत डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को रोकने की तकनीक में पीछे है। यहां अफवाह उड़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक आतंकियों ने डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल अफवाह उड़ाने के लिए किया। जम्मू-कश्मीर में छह महीने चले हंगामे के दौरान डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधियों ने किया। पूर्वोत्तर में विभिन्न संगठन बंद के आयोजन से लेकर अफवाह उड़ाने में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। मजबूरी में सरकार को इन राज्यों में महीनों तक इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी। इसका सीधा असर सरकार के डिजिटल कामकाज पर भी पड़ा। इसका असर बैंकिग व्यवस्था पर भी पड़ा। भारत में दूरसंचार के क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं। भारत 4 जी के युग में है। इसका सीधा लाभ देश की जनता को मिला है। लेकिन आतंकियों, गैंगेस्टरों ने 4 जी का दुरुपयोग भी शुरू कर दिया है। पंजाब में हाल ही में नाभा जेल से भागने वाले आतंकियों और गैंगेस्टरों ने जेल के अंदर 4 जी सिम का इस्तेमाल किया था।

वे 4 जी सिम से अपने बाहरी सहयोगियों से संपर्क में थे। जबकि जेल के बाहर लगा जैमर 4 जी सिम को जाम करने में विफल था। उसमें 4 जी सिम को जाम करने की क्षमता नहीं थी। अलकायदा और आइएस का आॅनलाइन आतंकवाद यूरोप पिछले कुछ सालों से देख रहा है। भारत को समय रहते सतर्क होने की जरूरत है। पूरे यूरोप से युवाओं की भीड़ सीरिया और इराक आइएस के आॅनलाइन अभियान से प्रभावित होकर पहुंची थी। सैकड़ों युवक और युवतियां आइएस के आॅनलाइन जेहाद से प्रभावित होकर तुर्की के रास्ते सीरिया का रुख किया था। ऐसी कुछ घटनाएं भारत में भी नजर आर्इं। अभी हालत यह है कि आतंकी संगठनों के आॅनलाइन साहित्य पर जाने वाले लोगों की संख्या का अंदाजा भी सुरक्षा एजेंसियां नहीं लगा सकती हैं। आइएस के अमाक और दबिक ने आॅनलाइन आतंकवाद को बढ़ाया है। अलकायदा भी आॅनलाइन साहित्य चला रहा है। इसमें विस्फोटक तैयार करने से लेकर विस्फोट करने तक की तकनीक समझाई जा रही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App