ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः मान्यता का बोझ

उन्हें विदेश में रहते हुए कई साल हो गए थे। वहां वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। इस बार जैसे ही वे भारत आए तो परिवार के लोगों ने उनके विवाह के लिए अखबार में विज्ञापन दे दिया।
Author August 11, 2017 02:43 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

प्रेरणा मालवीया

उन्हें विदेश में रहते हुए कई साल हो गए थे। वहां वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। इस बार जैसे ही वे भारत आए तो परिवार के लोगों ने उनके विवाह के लिए अखबार में विज्ञापन दे दिया। उसमें साफ लिखा गया कि हमें सजातीय और समकक्ष वधु ही चाहिए। अखबार में विज्ञापन प्रकाशित होते ही घर में फोन की घंटी घनघनाने लगी। रिश्ते की बातचीत के दौरान लड़के के पिता ने कहा कि हम खुले विचारों के हैं, पढ़े-लिखे हैं।

इस दौरान आए रिश्तों में से एक जगह उनकी तलाश रुकी। लड़की भी पांच साल विदेश में काम करके आई है और फिलहाल पुणे में किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में ऊंची तनख्वाह पर काम कर रही है। शादी की बात लगभग तय हो गई। लेकिन कुंडली मिलान के दौरान पता चला कि लड़की उम्र में लड़के से तीन महीने बड़ी है। इस बात को परिवार के सभी सदस्यों ने तूल दिया और सारी बातें यहीं आकर थम-सी गर्इं। लड़के ने घोषणा कर दी कि वह अपने से बड़ी उम्र की लड़की से शादी नहीं करेगा। उन सबकी दलील थी कि बड़ी लड़की घर में अपनी मनमानी चलाती है, किसी का कहा नहीं मानती है; इसलिए लड़की तो उम्र में लड़के से कम ही होनी चाहिए। कुछ पल के लिए सबके मन में ऊहापोह हुई, लेकिन सब कुछ मनोनुकूल होने के बावजूद सिर्फ उम्र की वजह से वह रिश्ता होते-होते रह गया। फिर कई और जगह रिश्ते की बात चली, मगर मामला कुछ आगे बढ़ नहीं पाया। कुछ दिनों बाद लड़के की छुट्टियां खत्म हो गर्इं और वह वापस अमेरिका चला गया।

लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार मेरे घर और आसपास के लोगों के बीच चर्चा का विषय यही बात बनी हुई है। एक तरफ तो हम कहते हैं कि हम पढ़े-लिखे, समझदार और खुले विचारों के हैं। फिर अपनी जिंदगी से जुड़े ऐसे फैसले क्यों सामने आते हैं? यह बात कहां से आई कि अगर लड़की उम्र में बड़ी हुई तो घर में उसकी मर्जी चलेगी? लड़की की लंबाई भी लड़के से कम होनी चाहिए। किसी अध्ययन या शोध में तो यह बात निकल कर आई नहीं, फिर भी लोग इतनी मजबूती से ऐसा क्यों कह देते हैं! दूसरे लोग कैसे इस तरह के निर्णय में अपनी सहमति जता देते हैं!

इस बारे में मैंने परिवार और अन्य मित्रों से बातचीत की तो उनका भी यही कहना था कि शादी में लड़की तो लड़के से छोटी ही होनी चाहिए। लेकिन जब मैंने इसका कारण पूछा तो वे बगलें झांकने लगे। किसी के पास भी इसका कोई उत्तर नहीं था। बस सबके मुंह पर एक ही बात कि ऐसा ही होता है, हम तो यही देखते आए हैं, होना भी यही चाहिए, हमने भी ऐसा किया…! ऐसी बातों के हवाले से हम कितनी सारी मान्यताएं बना लेते हैं और अपने आसपास सुनते भी रहते हैं। यह बात तब और हैरान करती है जब अपने को पढ़ा-लिखा और खुले विचारों वाला मानने वाले समझदार लोग भी ऐसा कहते हैं। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से ऊंची शिक्षा की डिग्रियां लेकर विकसित देशों में शीर्ष आइटी कंपनी में कार्यरत ऐसे लोग कभी तो सारे सामाजिक रीति-रिवाज को कठघरे में खड़ा कर देते हैं और कभी इतनी छोटी-सी बात पर शादी से इनकार कर देते हैं। इस तरह का दोहरा व्यवहार समझ से परे लगता है। ऐसे लोग कुछ जानी-मानी हस्तियों के अपने से बड़ी उम्र की लड़की की शादी की बात आने पर ‘उनकी बात अलग है’ की दलील पेश करते हैं।

कुछ कार्यशालाओं के दौरान मैंने जब इस तरह की बात छेड़ी और उन पर चर्चा शुरू की कुछ लोग बात खत्म होने से पहले ही कहते कि अब ये सब बातें कुछ मायने नहीं रखतीं। इस तरह की घटनाएं केवल गांवों में होती हैं क्योंकि वहां के लोग पढ़े-लिखे नहीं है, अभी वहां तक जागरूकता नहीं पहुंची है। ऐसा बोल कर वे अपने पढ़े-लिखे होने का दंभ भरते। इस बात पर मेरा एक उत्तर तैयार रहता कि अगर हम रविवार के अखबार में वैवाहिकी वाला पन्ना पलटें तो हकीकत का पता चल जाता है, जिसमें तथाकथित पढ़े-लिखे लोग सजातीय रिश्ते, गोरी पढ़ी-लिखी और सुंदर कन्या की मांग को शर्त के तौर पर पेश करते हैं।

मेरा आशय पढ़े-लिखे या गांव-शहर के लोगों में फर्क करना नहीं, बल्कि इस बात को रेखांकित करना है कि हम चीजों को देखते किस तरह से हैं। कई बार हम जो होने का गुमान भरते हैं, वास्तव में हम वह होते नहीं हैं। कहते हैं कि पढ़ाई-लिखाई से व्यक्ति की समझ का विकास होता है, वह तार्किक बनता है। लेकिन अगर खूब पढ़ने-लिखने के बाद भी हमारी मान्यताओं में कोई बदलाव नहीं आए तो इसका मतलब यह है कि इसकी जड़ शिक्षा में नहीं, कहीं और है। संस्कृति की दुहाई देकर हम अपनी परंपराओं में मौजूद पूर्वग्रहों और कमियों को सही नहीं ठहरा सकते।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.