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राजनीतिः छोटी बचत से बड़ी उम्मीदें

अब तक सोने और संपत्ति में निवेश लोगों की पहली पसंद माना जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों क्षेत्रों में ही निवेश कम आकर्षक हो गए हैं। इसका बड़ा कारण दोनों क्षेत्रों के लिए कर संबंधी नियमों को सख्त बना दिया जाना है। पिछले तीन-चार वर्षों से रियल एस्टेट में नए सरकारी नियमों की सख्ती से बेनामी संपत्तियों की खरीद-बिक्री काफी हद तक लगाम लगी है। इसका असर यह हुआ कि रियल एस्टेट में मंदी-सी छा गई है।

जयंतीलाल भंडारी

हाल में ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब मुश्किल दौर से निकल चुकी है। भारतीय अर्थव्यवस्था जी-20 देशों में सबसे आगे है। पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में मांग बढ़ रही है। औद्योगिक गतिविधियों में सुधार हो रहा है। घरेलू निवेश बढ़ रहे हैं। शेयर बाजार में उछाल दिखाई दे रहा है। ऐसे में वर्ष-2018 और 2019 में भारत की विकास दर साढ़े सात फीसद रहने का अनुमान है। इसी तरह राष्ट्रीय बचत संस्थान (एनएसआइ) ने भारत में बदलते निवेश की प्रवृत्ति पर जारी रिपोर्ट-2018 में कहा है कि देश के लोग अब सोना खरीदने और रियल एस्टेट में निवेश की जगह म्युचुअल फंडों और शेयर बाजार में तुलनात्मक रूप में बड़ा निवेश कर रहे हैं। देश का शेयर बाजार निरंतर नई ऊंचाइयां छू रहा है। ऐसे में अर्थविशेषज्ञों का कहना है कि देश में बचत के निवेश का नया परिदृश्य देश के लिए शुभ आर्थिक संकेत है।

गौरतलब है कि अब तक सोने और संपत्ति में निवेश लोगों की पहली पसंद माना जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों क्षेत्रों में ही निवेश कम आकर्षक हो गए हैं। इसका बड़ा कारण दोनों क्षेत्रों के लिए कर संबंधी नियमों को सख्त बना दिया जाना है। पिछले तीन-चार वर्षों से रियल एस्टेट में नए सरकारी नियमों की सख्ती से बेनामी संपत्तियों की खरीद-बिक्री काफी हद तक लगाम लगी है। इसका असर यह हुआ कि रियल एस्टेट में मंदी-सी छा गई है। चार-पांच साल पहले की तरह कीमतें बढ़ नहीं रही हैं। इसलिए इस क्षेत्र में निवेशकों के कदम धीमे पड़ गए हैं। इसी तरह पिछले कुछ वर्षों में सोने में निवेश भी पहले जैसा लाभप्रद नहीं रहा है।

इसलिए अच्छी कमाई करने वाले और आधुनिक जीवनशैली वाले नौकरी पेशा और उद्यमी युवाओं का सोने की खरीद से मोहभंग हो रहा है और वे अच्छा लाभ देने वाले म्युचुअल फंड और शेयर बाजार की ओर आगे बढ़ रहे हैं। अब सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी नहीं दिखने से गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में भी निवेशकों की दिलचस्पी घटी है। इतना ही नहीं, गोल्ड ईटीएफ से वर्ष 2017-18 में 835 करोड़ रुपए की निकासी की गई है। चूंकि 2014-15 से वर्ष 2017-18 तक म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में औसतन 14-15 फीसद सालाना रिटर्न मिला है, जबकि इस अवधि में सोने से मिलने वाला औसतन रिटर्न करीब साढ़े आठ फीसद ही रहा है।

निश्चित रूप से लगातार अच्छे रिटर्न के कारण म्युचुअल फंड और शेयर बाजार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अगस्त-2018 में सूचकांक लगातार अड़तीस हजार अंकों की ऊंचाई पर दिखाई दिया है। रियल एस्टेट और सोना खरीदने की बजाय, म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में बढ़ता निवेश अर्थव्यवस्था की महत्त्वपूर्ण जरूरत है। अर्थविशेषज्ञों का कहना है कि भारत में शेयर बाजार अभी और तेजी से बढ़ेगा। भारत क्रय शक्ति के आधार पर दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और उसकी अर्थव्यवस्था एक खरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। इस समय बड़ी संख्या में भारतीय कारोबारियों के पास नए उद्यम शुरू करने या चालू उद्यम को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है और बैंक अब फंसे हुए कर्ज के मामलों को देखते हुए नए कर्ज देने में काफी सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे में उद्यमियों को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए शेयर बाजार के विस्तार की नई संभावनाएं बनी हुई हैं।

देश में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज घटा है। फिर भी छोटे निवेशक अपने निवेश की सुरक्षा के मद्देनजर डाकघर बचत जमा, राष्ट्रीय बचत पत्र, सार्वजनिक भविष्य निधि, किसान विकास पत्र, वरिष्ठ नागरिक लघु बचत योजना और सुकन्या समृद्घि योजना जैसी छोटी बचत योजनाओं की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2011-12 में जहां छोटी बचत योजनाओं के समूह राष्ट्रीय लघु बचत निधि (एनएसएसएफ) में कुल निवेश महज इकत्तीस अरब रुपए था, वहीं यह 2017-18 में 1550 अरब रुपए के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। पिछले छह वर्षों में इसमें करीब पचास गुना की बढ़ोतरी हुई है। गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल-2017 से लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में तिमाही आधार पर बदलाव किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कोई ग्यारह छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में लगातार कमी आई है। हालांकि जुलाई-2018 से सरकार ने सितंबर-2018 तक के लिए छोटी बचत योजनाओं पर दी जाने वाली ब्याज दर में वृद्धि नहीं की है। ऐसे में सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), किसान विकास पत्र (केवीपी), सुकन्या समृद्धि खाता, एक से पांच साल की अवधि के लिए मियादी जमा पर ब्याज दर पूर्वस्तर पर ही बनी हुई हैं।

इसी प्रकार अपनी बचत को सुरक्षित रखने के मद्देनजर जो छोटे निवेशक बैंकों में बचत जमा रखते हैं, वे भी जमा पर तेजी से ब्याज घटने के कारण चिंतित हैं। बैंकों में सावधि जमा पर सामान्यता छह से सात फीसद का सालाना ब्याज ही मिल रहा है। देश के अधिकांश बैंकों में पचास लाख रुपए तक की जमा वाले बचत बैंक खाते पर ब्याज दर साढ़े तीन से चार फीसद ही है। वर्ष 2017-18 में बैंकों में बचत और सावधि जमा में रिकॉर्ड गिरावट आई है। बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों का बैंकों में बचत जमा करने के लिए रुझान कम होने का कारण बैंकों से आकर्षक रिटर्न नहीं मिलना है। बैंकों में रुपया जमा करने के बजाय छोटी बचत योजनाओं और शेयर बाजार की ओर बढ़ता हुआ रुख इस बात का भी संकेत है कि बैंकों में बढ़ते डूबत कर्ज (एनपीए) और घोटालों की बढ़ती घटनाओं के कारण बैंकों पर लोगों का भरोसा डगमगा रहा है।

देश में घरेलू निवेश और बढ़ाने के लिए जरूरी है कि निवेश का माहौल सुधारने के लिए और अधिक प्रयास किए जाएं। देश में कारोबार के मद्देनजर शेयर बाजार को और अधिक अनुकूल बनाया जाए। शेयर बाजार की ऊंचाई के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में छोटे निवेशकों के हितों और उनकी पूंजी की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना जरूरी है। इस साल मई से जुलाई के तीन महीनों में स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के शेयरों यानी छोटे शेयरों की कीमतों में चालीस फीसद से ज्यादा की जो अप्रत्याशित गिरावट आई है, उससे अनुचित व्यापार व्यवहार के उल्लंघन का संदेह पैदा होता है। चूंकि छोटे शेयरों में छोटे निवेशकों का काफी पैसा लगा है, इसलिए ऐसी तेज गिरावट की सेबी द्वारा सख्त जांच कराई जानी चाहिए और भविष्य के लिए ऐसे कदम सुनिश्चित किए जाने चाहिए जिससे शेयर बाजार अनुचित व्यापार व्यवहार से बच सके।

छोटे और ग्रामीण निवेशकों की दृष्टि से शेयर बाजार की प्रक्रिया को और सरल बनाना होगा। देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छोटे निवेशकों की तादाद तेजी से बढ़ानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को आकर्षक बनाया जाए। अगस्त-2018 में जब रिजर्व बैंक ने कर्ज पर ब्याज दर बढ़ा दी है तब छोटी बचत योजनाओं पर भी एक अक्टूबर से दिसंबर-2018 तक की तिमाही के लिए ब्याज दर बढ़ा कर छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले रिटर्न को लाभप्रद बनाया जाना चाहिए। निश्चित रूप से एक ऐसे समय में जब तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी निवेश की जरूरत है, तब हमें छोटी बचत योजनाओं, म्युचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश की चमकीली संभावनाओं को साकार करने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना होगा। ऐसा किए जाने से देश के छोटे-बड़े निवेशकों की पूंजी उत्पादक निवेश के रूप में अर्थव्यवस्था की बढ़ती हुई जरूरतों के लिए काम में आ सकेगी।

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