ताज़ा खबर
 

बेबाक बोलः कातिल मुंसिफ- फिर ना-पाक

जब 2013 में सरबजीत सरहदे हिंद पहुंचे तो उनकी सांसें थम चुकी थीं।
आज कुलभूषण के मामले में गैरभरोसेमंद पाकिस्तान डरा रहा है क्योंकि हमें मालूम है, ‘मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है

भारत ने पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते की पहल हमेशा की। कायदे को नजरअंदाज कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान की सरजमीं पर कदम रखा। पर पाकिस्तान का रवैया कभी पाक न रहा। अभी बेगुनाह सरबजीत का मामला हो या 1971 के युद्ध-बंदियों का। शिमला में भुट्टो के धोखे में आकर तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने पाकिस्तान के 93 हजार युद्धबंदियों को छोड़ दिया। लेकिन पाकिस्तान ने भारत के 200 युद्ध-बंदी भी नहीं छोड़े। फौज के इशारों पर चलने वाली पाकिस्तानी हुकूमत भारत के भरोसे को तोड़ती रही है। अड़ियल पाकिस्तान कुलभूषण जाधव पर लगे आरोपपत्र और फांसी के आदेश की प्रति भी भारत को सौंपने से इनकार कर चुका है। पड़ोसी देश के पिछले सलूकों से पैदा हुई आशंकाओं के बीच जाधव की सकुशल वतन वापसी की उम्मीदों पर इस बार का बेबाक बोल।

जब 2013 में सरबजीत सरहदे हिंद पहुंचे तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। सरबजीत का परिवार जो उन्हें भारत लौटाने के लिए बरसों से संघर्ष कर रहा था, उसे यकीन ही नहीं हुआ कि इतनी लंबी लड़ाई के बाद मुर्दा सरबजीत की घर वापसी हो पाई। 2 मई 2013 को रात 12:45 बजे लाहौर के जिन्ना अस्पताल ने सरबजीत की मौत की पुष्टि कर दी थी। एक पत्नी, दो बेटियां और एक बहन के संघर्ष को, अपने अजीज के वतन वापसी के सपने को, एक इंसान के बुनियादी अधिकार को पाकिस्तान ने ताबूत में वापस भेजा। एक मामूली किसान सरबजीत शराब के नशे में सरहदे पाक में कदम रखता है और उसे रॉ का एजंट घोषित कर दिया जाता है। अभी तक खेत-खलिहान से वास्ता रखने वाले शख्स को लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद के बम हमलों का दोषी करार दिया जाता है। उसे उस मंजीत सिंह के किए की सजा दी जाती है, जिसका नाम उसने कभी सुना भी नहीं था। मीडिया में सारे फर्जीवाड़े सामने आने के बाद भी पाकिस्तानी अदालत सरबजीत को फांसी की सजा सुनाती है। पाकिस्तानी वकील अवैस शेख असली धमाके करने वाले मंजीत सिंह को कनाडा की सैर करते हुए ढूंढ़ निकाल चुके होते हैं। अंतरराष्टÑीय दबाव में सरबजीत की फांसी तो टाल दी जाती है लेकिन लाहौर की कोट लखपत जेल में उनपर जानलेवा हमला हो जाता है और कुछ दिनों बाद अस्पताल में उनकी मौत हो जाती है। सरबजीत पर ये हमले क्यों और कैसे हुए इस पर पाक सरकार ने कभी मुंह नहीं खोला। सरबजीत की बहन का आरोप है कि सरबजीत पर योजनाबद्ध तरीके से हमला हुआ था। उनकी हत्या की पूर्वनियोजित साजिश थी।

दो दशक बाद एक बेगुनाह किसान सरबजीत का शव जब भारत लौटा तो पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने दावा किया कि उनके शरीर के मुख्य अंग निकाल लिए गए थे और उनके शरीर के साथ छेड़खानी की गई थी। एक बेगुनाह पर सालों जुल्म ढाने के बाद उसके मुर्दा जिस्म के साथ छेड़खानी करने की मानसिकता को क्या नाम दिया जा सकता है?
सरबजीत के अलावा ऐसे बहुत से मामले हैं जो पाक के खाते में जुल्म, दगाबाजी की इंतहा दिखाते हैं। सरबजीत पर हुए जुल्म याद कर आज पूरा हिंदुस्तान कुलभूषण जाधव की सलामती को लेकर फिक्रमंद है। पाकिस्तान ने उन्हें ‘इलियास हुसैन मुबारक पटेल’ का जाली नाम दे रखा है। भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी जो इरान में अपना कारोबार चला रहे थे पाकिस्तान के दिखाए वीडियो में अपना जुर्म कबूलते नजर आ रहे हैं। पाक की फौज अदालत ने ‘जासूसी के जुर्म’ में इन्हें सजा-ए-मौत सुना दी है। पाकिस्तान दावा करता है कि उसने जुलाई 2016 में बलूचिस्तान से जाधव की गिरफ्तारी की है।

एक किसान सरबजीत को पाकिस्तान ने बम धमाके करने वाला घोषित कर दिया था और अब अपने दस्तावेजों में एक कारोबारी को दहशतगर्द साबित कर दिया। पाकिस्तान ने अपने डॉजियर में पूर्व नौसेना अधिकारी को हॉलीवुड अभिनेता सिलवेस्टर स्टोन के किरदार में नुमाया हुए ‘रैंबो’ का खिताब दिया है। पाकिस्तान का पूरा डॉजियर ही एक फिल्मी कहानी की तरह लगता है। इस पर यकीन करें तो एक मामूली इंसान दिखने वाले जाधव ‘सॉल्ट’ उर्फ एंजेलिना जोली की तरह ‘एकल विध्वंसकारी दस्ता’ (वन मैन डिमॉलिश स्क्वाड) है।
पाक की कहानी को मानें तो जाधव उर्फ एकल विध्वंसकारी दस्ते ने ग्वादर और तुरबत में हमले करवाए, बलूचिस्तान में पाकिस्तानी युवकों को भड़का कर उन्हें अलगाववादी बनने की राह पर ले गए, बलूचिस्तान की पाइपलाइन और क्वेटा में बम धमाके करवाए, जिवानी बंदरगाह के रडार पर हमले करवाए। और, अब इस फिल्मी कहानी को वह सबूत के तौर पर संयुक्त राष्ट्र में पेश करने की तैयारी में है।

अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए पाकिस्तान जाधव तक भारत की राजनयिक पहुंच देने से इनकार कर रहा है। राजदूत से मुलाकात करने देने की भारत की 14वीं अपील को भी पाकिस्तान खारिज कर चुका है। इसके बाद भारत ने पाक के साथ हर स्तर की वार्ता रोक दी है, जिसमें समुद्री सुरक्षा को लेकर 17 अप्रैल को होने वाली वार्ता भी शामिल थी। यह संतोषजनक है कि कुलभूषण जाधव को लेकर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और वाम से लेकर दक्षिण की राजनीति वाला भारत पूरी तरह से एकजुट है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, ‘यह तथ्य है कि भारत ने 14 बार राजनयिक मदद मुहैया कराए जाने की मांग की थी। हर बार इस मांग को ठुकराए जाने से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में विश्वसनीयता एवं वैधानिकता का अभाव है। इस मामले में पूरा देश एक है’।

आज के समय में कुलभूषण जाधव की सलामती पूरे हिंदुस्तान के लिए चिंता का विषय है, और इस मामले में भारत सरकार अपना सर्वश्रेष्ठ करेगी, इसका भी पूरा यकीन है। लेकिन लगातार जारी इन ना-पाक हरकतों के लिए पाकिस्तान का क्या किया जाए। पिछले तीन दशकों में भारत ने जब-जब रिश्ते सुधारने की कोशिश की है वह करगिल से लेकर पठानकोट और उड़ी तक दगा दे बैठा है। नई सरकार बनने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह नियम-कायदों को भूल बड़े दिल और बड़ी सोच के साथ पाकिस्तान की सरजमीं पर पहुंचे थे उसका लिहाज कर कुछ दिनों के लिए भी शराफत नहीं दिखा पाए। एक के बाद एक आतंकी हमले के बाद जब भारत सरकार ने लक्षित सैन्य हमले से चेतावनी दी तो भी इनकी अक्ल ठिकाने नहीं आई।

औद्योगिक रूप से अविकसित और छोटा देश (बनाना रिपब्लिक) पाकिस्तान आज भी अपने आवाम की बेहतरी को भुला भारत को नुकसान पहुंचाने का सपना पाले है। आतंकवादियों को मिली पाक हुकूमत की पनाह के कारण पाक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से लगातार पिछड़ता जा रहा है। अगर वह भारत के सैन्य ठिकानों पर आतंकवादी हमले करवाता है तो खुद उसके घर में मस्जिद के दर पर सूफी कव्वाल को मौत के घाट उतार दिया जाता है। उसकी सरजमीं पर स्कूल में पढ़ाई करने गए मासूम बच्चों को गोलियों से भून दिया जाता है। आतंकवादियों के हाथों स्कूलों में कत्ल किए जा रहे बच्चों को भूल उसके वजीरे-आजम संयुक्त राष्ट्र में कश्मीरी आतंकवादी बुरहान वानी को ‘इंतिफादा’ बता फिलस्तीनी क्रांतिकारी शहीदों का बगलगीर बनाने में व्यस्त रहते हैं।

पाकिस्तान ने सिलवेस्टर स्टोन की फिल्मों की तरह जिस तेजी से कुलदीप जाधव के मामले में फैसला सुनाया, वह तेजी मुंबई हमलों के गुनहगारों को लेकर क्यों नहीं दिखती है? 26/11 के हमलों में वहां की न्याय व्यवस्था की लंबी नींद कब टूटेगी? क्या इस मामले में इंसाफ देने के जिम्मेदारों को अभी तक ऐसी कोई हॉलीवुड फिल्म देखने को नहीं मिली जिससे वे फैसला लेने को प्रेरित हो जाएं। तो इसके लिए भारत सरकार को संयुक्त राष्ट्र से नहीं फिल्मकार स्टीवेन स्टीलबर्ग से मदद मांगनी चाहिए। क्योंकि सरबजीत से लेकर कुलभूषण तक पाकिस्तान के जिम्मेदारों की कहानी फिल्मी ही होती है।

नैतिकता और मानवीयता को भुला बैठे पाकिस्तान की सरजमीं से जब तक कुलभूषण जाधव को सकुशल वापस नहीं लाया जा सकेगा तब तक हिंदुस्तान की हुकूमत से लेकर आवाम तक का दिल डरा रहेगा। पाकिस्तान की पिछली करतूतें बताती हैं कि वह भरोसे के लायक नहीं है। जब सरबजीत को फांसी के फंदे तक आसानी से नहीं पहुंचाया जा सका तो दूसरा रास्ता निकाल लिया गया। आज कुलभूषण के मामले में गैरभरोसेमंद पाकिस्तान डरा रहा है क्योंकि हमें मालूम है, ‘मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है/क्या मेरे हक में फैसला देगा/जिंदगी को करीब से देखो/इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा/हमसे पूछो दोस्ती का सिला/दुश्मनों का भी दिल हिला देगा’। भारत के दोस्ती के पैगामों के बदले पाकिस्तान ने हमेशा से दिल दहलाने वाली दुश्मनी ही निभाई है। भारत सरकार उसके हर झूठ, चालाकी, मक्कारी की काट खोज सके फिलहाल तो हम यही उम्मीद करें।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.