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राजनीतिः एक अनथक योद्धा

उनकी चिंता के केंद्र में संगठन और कार्यकर्ता हैं, तो सरकार और जनता भी है। यही कारण है कि केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकार के प्रति जन-जन का विश्वास बन पाया है। सरकार और जनता के बीच संगठन और कार्यकर्ता कैसे सफल और प्रभावी समन्यवयकारी भूमिका निभा सकता है, यह उनके अध्यक्षीय कार्यकाल की बहुत बड़ी उपलब्धि रही है। उनके निर्णय ‘अपना-तुपना से दूर’ और ‘तेरा तुझको अर्पण’ के पवित्र विचार को समर्पित रहे हैं।

अमिट स्थान भारतीय जनमानस में आज गृहमंत्री के रूप में अमित शाह ने बनाया है।

प्रभात झा

चाणक्य जैसी राजनीतिक सिद्धहस्तता, विस्मार्क जैसी संगठन कुशलता और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति अब्राहम लिंकन जैसी अटूट निष्ठा के चलते सरदार पटेल ने भारत ही नहीं, विश्व के राजनीतिक इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त किया। पांच सौ बासठ छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण किया। वे विश्व के एकमात्र राजनेता हैं, जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में राज्यों का एकीकरण करने का अदम्य साहस दिखाया। आज वही स्थान भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और देश के वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह का है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के निर्णायक नेतृत्व में सदियों से उलझे राम जन्मभूमि विवाद और दशकों से अनसुलझे अनुच्छेद 370 से देश को निजात दिलाया। अदम्य साहस, असीम शक्ति, मानवीय समस्याओं के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ जिस प्रकार स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल ने निर्भय होकर नवजात स्वतंत्र भारत की कठिनाइयों का समाधान अद्भुत सफलता के साथ किया और भारतीय जनमानस में अमिट स्थान बनाया, वही अमिट स्थान भारतीय जनमानस में आज गृहमंत्री के रूप में अमित शाह ने बनाया है।

अमित शाह जुलाई, 2014 में मात्र उनचास वर्ष की आयु में भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनके संगठन कौशल और कार्यक्षमता को पहचानते हुए ही 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बना कर अस्सी सांसदों वाले उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। भाजपा ने उत्तर प्रदेश की अस्सी लोकसभा सीटों में से तिहत्तर सीटें जीती। पहली बार लोकसभा के चुनाव में भाजपा को दो सौ बयासी सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिला। उनके नेतृत्व में पार्टी और विचारधारा का निरंतर विस्तार हुआ। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में पार्टी की सरकार बनी, दक्षिण में पार्टी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।

अवसर सबको मिलता है, लेकिन अपने-अपने कार्यकाल में क्या किया, वही इतिहास में दर्ज होता है। सभी लोग अवसर को परिश्रम और पराक्रम में नहीं बदल पाते हैं। भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह ने पार्टी के दस करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा। महासंपर्क अभियान और मिस्ड कॉल सर्विस चलाया। पार्टी की सदस्य संख्या ग्यारह करोड़ तक पहुंच गई। भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई। उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में एक समय ऐसा भी आया जब देश के अड़सठ प्रतिशत भूभाग पर भाजपा और भाजपा गठबंधन की सरकार थी। पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा या भाजपा गठबंधन की सरकार होगी। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 403 में से 325 सीटों पर जीत। इस जीत ने तो राजनीतिक पंडितों तक को भी अचंभित कर दिया था।

एक समय था जब देश के पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा कभी सरकार में शामिल नहीं हो पाती थी। अमित शाह के अध्यक्ष रहते हुए न केवल पहली बार पूर्वोत्तर में भाजपा की सरकार बनी, बल्कि ‘सप्त बहनें’ कही जाने वाले सातों राज्यों में भाजपा सरकार में शामिल हुई। असम और त्रिपुरा में लगभग कई दशक से सत्तासीन राजनीतिक पार्टियों को हटा कर भाजपा के मुख्यमंत्री बने। अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी भाजपा के मुख्यमंत्री बने। वहीं मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम में भी भाजपा सरकार में शामिल हुई। दक्षिण में कर्नाटक में सरकार बनी, पहली बार 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक सीट पर विजय प्राप्त की। अमित शाह ने उत्तर भारत की राजनीतिक पार्टी कही जाने वाली भाजपा को अखिल भारतीय पार्टी बनाया। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को पुन: पूर्ण बहुमत मिला। भाजपा की सीट 2014 की दो सौ बयासी से बढ़ कर 2019 में तीन सौ तीन हो गई।

‘कार्यकर्ता, कार्यालय, कार्य, कार्यक्रम और कोष’ आधारिक राजनीतिक संस्कृति के साथ आगे बढ़ कर अमित शाह ने भाजपा को भारत में अजेय राजनीतिक पार्टी बनाया। चक्रीय प्रवास, क्षेत्रीय बैठकें, कोर ग्रुप की नियमित बैठकें, जिला कार्यालय निर्माण प्रकल्प, कार्यालय आधुनिकीरण प्रकल्प, जनसंवाद ई-ग्रंथालय और डॉक्यूमेंटेशन, सदस्य्ता अभियान, प्रशिक्षण महाभियान, संवाद तथा समन्वय, मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष उत्सव जैसे नूतन कार्य प्रयोगों से उन्होंने भारतीय जनमानस का भाजपा और भाजपा कार्यकर्ता के साथ एक जुड़ाव कायम किया, जो अन्य राजनीतिक पार्टियों की सोच के परे है। अध्यक्ष पद ग्रहण करने के तत्काल बाद उन्होंने पार्टी के संविधान में संशोधन कर सदस्यता अभियान को नया और प्रभावी स्वरूप दिया। संगठन पर्व के तहत सदस्यता अभियान को गति दी गई और पचास से भी अधिक प्रकार के अलग-अलग कार्यक्रम पार्टी द्वारा आयोजित किए गए।

अमित शाह अक्सर अपने भाषणों में कहा करते हैं कि ‘भाजपा एक राजनीतिक पार्टी होने के साथ-साथ एक विचारधारा है, एक आंदोलन है।’ अध्यक्ष के नाते उन्होंने इसे चरितार्थ भी किया। नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना, उन्हें प्रशिक्षित करना, विचारधारा के प्रति समर्पण को कायम रखना, संगठन मंत्री का भी प्रशिक्षण, कोष की पवित्रता के लिए चेक से भुगतान लेना। परिश्रमी और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे लाना और उन्हें महत्त्वपूर्ण दायित्व देना, कार्यकर्ता और संगठन के महत्त्व को शीर्ष प्राथमिकता में रखना, घोषणापत्र की घोषणाओं को चरितार्थ करना। उनकी चिंता के केंद्र में संगठन और कार्यकर्ता हैं, तो सरकार और जनता भी है। यही कारण है कि केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकार के प्रति जन-जन का विश्वास बन पाया है। सरकार और जनता के बीच संगठन और कार्यकर्ता कैसे सफल और प्रभावी समन्यवयकारी भूमिका निभा सकता है, यह उनके अध्यक्षीय कार्यकाल की बहुत बड़ी उपलब्धि रही है। उनके निर्णय ‘अपना-तुपना से दूर’ और ‘तेरा तुझको अर्पण’ के पवित्र विचार को समर्पित रहे हैं।

प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, भाजपा के प्रति जनविश्वास और अमित शाह की सांगठनिक कुशलता के फलस्वरूप मई 2019 में भाजपा को अपार जनसमर्थन मिला। प्रधानमंत्री ने अमित शाह को सरकार में अपना सहयोगी बनाने का निर्णय लिया। 30 मई, 2019 को अमित शाह केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए और देश के गृहमंत्री बने। गृहमंत्री के रूप में उन्होंने भारत के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल के सत्तर वर्षों से लंबित अधूरे कार्यों को एक वर्ष से भी कम अवधि में पूरा कर दिखाया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना, देश में एक निशान एक विधान और एक प्रधान को साकार करना, नागरिकता संशोधन कानून लागू कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदुओं को भारत में आश्रय देना, तीन तलाक को समाप्त कर देश की मुसलिम महिला की अस्मिता की रक्षा करना और सदियों से आस्था और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतिक राम मंदिर बनने के मार्ग को शांति और सौहार्द के साथ प्रशस्त करना, गृहमंत्री के रूप में अमित शाह की ये उपलब्धियां हैं। भारत के राजनीतिक इतिहास में उनका ऐसा अमिट स्थान बन गया है, वर्तमान ही नहीं आने वाली पीढ़ियों को भी गर्व होगा।

आज कोरोना महामारी के काल में प्रधानमंत्री की एक बड़ी शक्ति अमित शाह हैं। जहां एक ओर कार्यालय के बंद कमरे में बैठ कर देश के कोने-कोने का व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करते रहे हैं, वहीं राजधानी दिल्ली में स्थिति बिगड़ने पर स्वयं अस्पतालों का दौरा करने का साहसिक कदम उठाया। इस दौरान वे स्वयं भी अस्वस्थ हो गए। वे शीघ्र स्वस्थ हुए। राष्ट्रहित और जनहित के फैसले लेने में वे न टूटे और न झुके, सदैव आगे बढ़ते रहे। उनकी यह जीवटता अनथक जारी है।
(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, ये उनके निजी विचार हैं।)

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