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राजनीति: रोबोट युग में रोजगार का संकट

भारत की पैंसठ फीसद आबादी पैंतीस साल से कम आयु की है, इसलिए युवा आबादी उच्च गुणवत्ता और कौशल प्रशिक्षित होकर मशीनों की बढ़ती चुनौतियों के बीच भी दुनिया के लिए उपयोगी और भारत के लिए आर्थिक कमाई का प्रभावी साधन सिद्ध हो सकती है।

आधुनिक मशीन से गेहूं की कटाई करते किसान। फाइल फोटो।

जयंतीलाल भंडारी

दुनिया में प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही एक बड़ा संकट रोजगार का भी खड़ा हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि तकनीक के विकास और मशीनीकरण ने दुनिया को बदल डाला है, लेकिन इसका दूसरा चिंताजनक पहलू यह भी है कि मशीनी विकास से लोगों का काम भी छिनता गया है। और आज तो हम रोबोट युग में है। रोबोटों के बढ़ते उपयोग ने इस चिंता को और गहरा दिया है कि आने वाले वक्त में क्या इंसान उत्पादन में किसी भी रूप में भागीदार नहीं रह जाएगा।

हाल में भविष्य के रोजगार परिदृश्य को लेकर प्रकाशित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की (डब्ल्यूईएफ) रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच साल यानी 2025 तक दुनिया में करीब साढ़े आठ करोड़ नौकरियां इंसानों से मशीनों के पास जा सकती हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब नौ करोड़ सत्तर लाख ऐसी नई नौकरियों की भूमिकाएं भी विकसित होंगी, जिनसे इंसान और मशीनों के बीच सामंजस्य बन सकेगा। रोबोट के बढ़ते प्रयोग के कारण आगामी पांच-दस वर्षों में दुनिया भर में परंपरागत नौकरियां खत्म होने लगेंगी। कोविड-19 के कारण दुनिया भर में डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीक की अहमियत बढ़ी है।

इससे भी रोजगार क्षेत्र में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस समय दुनिया में उपभोक्ताओं की प्राथमिकता में रोबोट की अहमियत लगातार बढ़ रही है। जापान जैसे देशों में तो घरेलू काम तक में रोबोट इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में कोविड-19 के बाद रोबोट वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा हो जाएंगे, इसमें कोई शक नहीं। जिन देशों में कार्यशील युवाओं की कमी है, उन देशों में रोबोट अत्यधिक लाभप्रद होंगे। लेकिन भारत जैसे अधिक कार्यशील आबादी वाले देशों में रोबोट के बढ़ने से रोजगार और नौकरियां जाने का खतरा बढ़ता जाएगा।

दुनिया की अर्थव्यवस्था में मशीनों यानी रोबोट की अहमियत कितनी बढ़ गई है, इसका अंदाजा अमेरिका के बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार रोबोट का वैश्विक बाजार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2010 में दुनिया में रोबोट का बाजार करीब पंद्रह अरब डॉलर मूल्य का था, जो इस साल यानी 2020 में करीब तियालीस अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अनुमान है कि 2025 तक यह सड़सठ अरब डॉलर का हो जाएगा। इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा कार्यरत रोबोट जिन देशों के पास है, उनमें चीन, जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जर्मनी प्रमुख हैं।

दुनिया में विभिन्न प्रकार के रोबोटों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। सामान्यतया रोबोट दो तरह के होते हैं- इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) रोबोट और सर्विस रोबोट। इंडस्ट्रियल रोबोट औद्योगिक एवं कारोबार इकाइयों में काम करते हैं, जबकि सर्विस रोबोट सर्विस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सेवा संबंधी काम करते हैं, जिनमें पेशेवर कामकाज वाले रोबोट, घरेलू काम में प्रयोग होने वाले रोबोट शामिल होते है। दुनिया में कोरोना वायरस से निपटने और अधिक से अधिक लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए रोबोटों का बखूबी उपयोग किया गया है। यह मशीनों के नए युग का संकेत है।

दुनिया में औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले रोबोट की संख्या 2018 में करीब चौबीस लाख थी, जो 2022 में बढ़ कर करीब चालीस लाख तक पहुंचने का अनुमान है। औद्योगिक रोबोट चीन में सबसे ज्यादा हैं। वर्ष 2018 में चीन में करीब साढ़े छह लाख औद्योगिक रोबोट थे। चीन में प्रत्येक दस हजार कर्मचारियों पर सात सौ बत्तीस रोबोट काम कर रहे हैं। जबकि भारत में 2018 में कारखानों में करीब तेईस हजार रोबोट कार्यरत थे। पूरी दुनिया में औद्योगिक रोबोट के मामले में भारत ग्यारहवें स्थान पर है। भारत में औद्योगिक क्षेत्र में प्रत्येक दस हजार कर्मचारियों पर चार रोबोट काम कर रहे हैं।

दुनिया में औद्योगिक रोबोटों की तुलना में पेशेवर और घरेलू काम में मदद करने वाले रोबोटों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ल्ड रोबोटिक्स-2019 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में 2.71 लाख पेशेवर सेवा देने वाले रोबोट बिके थे और वर्ष 2022 तक यह संख्या दस लाख को पार सकती है। इसी तरह वर्ष 2018 में एक करोड़ तिरसठ लाख रोबोट घरेलू उपयोग वाले बिके थे। अनुमान है कि 2022 तक इनकी बिक्री बढ़ कर करीब छह करोड़ के पार निकल सकती है। इसी तरह वर्ष 2018 में मनोरंजन साधन वाले इकतालीस लाख रोबोट बिके थे। माना जा रहा है कि इनकी संख्या बढ़ कर वर्ष 2022 में करीब साठ लाख हो सकती है। वर्ष 2018 में चिकित्सा संबंधी उपयोग वाले पांच हजार एक सौ रोबोट बिके थे, साल 2022 तक इनकी संख्या बीस हजार से भी अधिक हो सकती है।

रोबोटों के बढ़ रहे इस्तेमाल से दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारत का रोजगार बाजार अधिक प्रभावित होगा। ऐसे में हमें देश की विकास नीति में रोबोट की भूमिका पर भी विशेष विचार मंथन करने की जरूरत है। देश के विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र से है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब दुनिया रोबोट के इस्तेमाल की ओर बढ़ रही है तो भारत का विनिर्माण क्षेत्र भी उससे बहुत दूरी बना कर नहीं रह सकता। आइटी जैसे क्षेत्रों में भी रोबोट के महत्त्व से इंकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे में जहां एक ओर देश में जरूरी क्षेत्रों में उपयुक्त संख्या में रोबोट का उपयोग किया जाए, वहीं दूसरी ओर सरकार को रोबोट के बढ़ते उपयोग से पैदा होने वाली रोजगार चिंताओं पर ध्यान देते हुए देश की नई पीढ़ी को रोबोट जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उच्च कौशल से प्रशिक्षित करने सहित रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति भी बनानी होगी। मशीनों का मुकाबला करने और रोजगार बढ़ाने के लिए देश में उच्च कौशल प्रशिक्षण की बहुत जरूरत है। उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर उपयुक्त ध्यान देकर रोजगार की चुनौतियों के बीच रोजगार की नई संभावनाओं को साकार किया जा सकता है।

विश्व बैंक की रोजगार रहित विकास नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नौजवानों की बढ़ती तादाद को ध्यान में रखते हुए हर साल इक्यासी लाख नई नौकरियां और रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है। इतने रोजगार के अवसर और नौकरियां जुटाने के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सार्वजनिक व निजी निवेश में भारी वृद्धि करनी होगी। विश्व बैंक का कहना है कि दुनिया के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि दर तेजी से घटने के कारण कामकाजी आबादी कम हो गई है। भारत की पैंसठ फीसद आबादी पैंतीस साल से कम आयु की है, इसलिए युवा आबादी उच्च गुणवत्ता और कौशल प्रशिक्षित होकर मशीनों की बढ़ती चुनौतियों के बीच भी दुनिया के लिए उपयोगी और भारत के लिए आर्थिक कमाई का प्रभावी साधन सिद्ध हो सकती है।

देश में अब डिजिटल रोजगार भी बढ़ रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की नई पीढ़ी के मौके बढ़ते जा रहे हैं। यह जरूरी है कि रोजगार में नए मौकों और तेज वृद्धि के लिए भारत को कारोबार, उत्पादन और निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। साथ ही, भारतीय बाजार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। देश में प्रतिभाशाली नई पीढ़ी के द्वारा बढ़ते हुए नवाचार, नए छोटे कारोबार, शोध और विकास, आउटसोर्सिंग और कारोबार संबंधी अनुकूलताओं के कारण दुनिया की शीर्ष वित्तीय और वाणिज्यिक कंपनियां भारत की ओर देख रही हैं। ऐसे में भारतीय बाजार में नए दौर के रोजगारों की संभावनाएं प्रबल हैं।

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