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राजनीतिः खुशी का यह कैसा इजहार

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार आदि उत्तर भारतीय राज्यों में हर्ष फायरिंग रूपी दबंगई और दिखावे की सामंती परंपरा एक लाइलाज मर्ज बन गई है। ऐसे मामलों में कुछ कानून तो हैं, जैसे लापरवाही से किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में धारा-336 के तहत मुकदमा दायर हो सकता है, लेकिन शादी जैसे शुभ कार्यों, विदाई पार्टी जैसे अन्य आयोजनों और रिश्तेदारी आदि की दुहाई देकर ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है।

Author May 14, 2018 4:04 AM
शादी के समय शोर-शराबा तो बैंड-बाजे और आतिशबाजी से भी खूब हो जाता है, पर जब तक हवाई फायरिंग जैसी धमाकेदार चीज न हो, लोगों को यह लगता ही नहीं है कि शादी जैसा आयोजन हुआ है।

खुशी हमेशा सामाजिकता का अहसास कराती है। खुशी के निजी मौके पर भी लोग चाहते हैं कि उसमें नाते-रिश्तेदार, दोस्त, परिचितों के अलावा पड़ोसी आदि हर वह शख्स शामिल हो जिससे थोड़ी-सी भी पहचान है। पर खुशी का एक आधुनिक चेहरा जानलेवा दबंगई के रूप में सामने आया है। यह दिखावे से प्रेरित है और निजी हर्षोल्लास के मौके को दूसरों की नजरों में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने की सामंती चाहत का प्रतिफल है। पहले यह दिखावा ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे तक सीमित था। धीरे-धीरे इसमें आतिशबाजी का अवगुण शामिल हुआ और पिछले करीब डेढ़ दशक में गोली-बंदूक भी शामिल हो गई। एक भयानक व्याधि बन गई इस नई परंपरा को हर्ष फायरिंग का नाम दिया गया है, जिसकी चपेट में आकर न जाने कितने निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है।

हाल का वाकया उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का है, जहां एक शादी में ऐन द्वार-पूजन के वक्त हर्ष फायरिंग के मकसद से लाई गई रिवाल्वर से एक व्यक्ति के हाथों अचानक गोलियां चल गईं जो दूल्हे के सीने में जा लगीं। दूल्हे की वहीं मौत हो गई। जिस व्यक्ति के हाथों गोलियां चलीं, उसके खिलाफ नामजद रिपोर्ट हुई कि वह इरादतन ऐसा करना चाहता था। उसे दूल्हे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया गया है। लेकिन हर जगह मामला हत्या का नहीं होता। खुशी में दिखावे के लिए किए जाने वाले धूम-धड़ाके में गोलीबारी करना एक रिवाज बन चुका है। इधर, इसकी एक बानगी बिहार के कटिहार जिले के पुलिस अधीक्षक के वायरल हुए वीडियो में दिखी, जिसमें अपनी ही विदाई पार्टी में वह जम कर हवाई फायरिंग कर रहे हैं। असल में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार आदि उत्तर भारतीय राज्यों में हर्ष फायरिंग रूपी दबंगई और दिखावे की सामंती परंपरा एक लाइलाज मर्ज बन गई है।

ऐसे मामलों में कुछ कानून तो हैं, जैसे लापरवाही से किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में धारा-336 के तहत मुकदमा दायर हो सकता है, लेकिन शादी जैसे शुभ कार्यों, विदाई पार्टी जैसे अन्य आयोजनों और रिश्तेदारी आदि की दुहाई देकर ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है। इस समस्या का एक पहलू यह है कि देश में छोटे हथियारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। संभवत: ऐसे हथियार गैरलाइसेंसी ज्यादा होते हैं। उनकी धरपकड़ इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि मामले ही दर्ज नहीं कराए जाते। छोटे हथियारों से की गई फायरिंग कितनी जानलेवा साबित हो रही है, इसका आंकड़ा चौंकाने वाला है।

वर्ष 2014 में छोटे हथियारों से की गई फायरिंग के कारण हुई दुर्घटनाओं में प्रति दिन दो लोगों की मौत हुई थी। यही नहीं, वर्ष 2005 से 2014 के बीच में हर्ष-फायरिंग जैसी घटनाओं में पंद्रह हजार से अधिक जानें गईं, जिनमें दो-तिहाई मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में हुर्इं। इस अवधि में उत्तर प्रदेश में दस हजार तीन सौ उन्नीस लोगों की मौत हुर्इं, जबकि मध्य प्रदेश में एक हजार एक सौ बारह, छत्तीसगढ़ में एक हजार पैंसठ मौतों का आंकड़ा सामने आया था। हरियाणा, झारखंड, असम, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार, पंजाब, तमिलनाडु और कर्नाटक आदि राज्यों में भी यह जानलेवा प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में हर्ष फायरिंग के कारण होने वाले हादसों की संख्या सबसे ज्यादा होना हैरानी की बात है।

वैसे तो ज्यादातर मौकों पर ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की धरपकड़ इसलिए नहीं हो पाती है, क्योंकि गोलीबारी करने वाला व्यक्ति मित्र, परिचित या रिश्तेदार की हैसियत से ही समारोह में शामिल होता है। उसे तो आयोजन की शान बढ़ाने वाले व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है। हर्ष फायरिंग के दौरान ऐसे व्यक्ति के हाथों कोई दुर्घटना हो जाए तो ऐसे मामलों की रिपोर्ट नहीं की जाती और मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। पर समस्या का दूसरा पहलू ज्यादा खौफनाक है। वह यह कि कई बार हादसों में घायल या मृत होने वाले लोगों में वे शामिल होते हैं, जिनका संबंधित शादी समारोह से कोई लेना-देना नहीं होता है। बारात निकलते वक्त सड़क किनारे से गुजरने वाले राहगीर या उस रास्ते में आने वाले घरों की छत या छज्जे से झांकते लोग हर्ष फायरिंग के दौरान चलाई गई गोली की चपेट में आ जाते हैं। वर्ष 2016 में कानपुर में एक तिलक समारोह के दौरान पड़ोस के घर के छज्जे से झांक रही किशोरी की तमंचे से कई गई हर्ष फायरिंग में मौत हो गई थी। जालौन में शादी समारोह में की गई हवाई फायरिंग में चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। उसी साल क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की शादी में भी हर्ष फायरिंग की गई। टीवी और अखबारों में इसकी चर्चा तो काफी हुई, पर किसी ने इसकी शिकायत नहीं दर्ज कराई।

ऐसी घटनाएं दो-तीन बातें स्पष्ट करती हैं। पहली बात यह है कि अब बंदूक, रिवाल्वर या तमंचे बड़ी आसानी से लोगों को हासिल हो रहे हैं। जरूरी नहीं है कि हर्ष फायरिंग का काम वैध यानी लाइसेंसी हथियार से ही किया जाए। कई बार इसमें अवैध हथियारों का इस्तेमाल होता है, जो ज्यादा घातक है। दूसरी अहम बात यह है कि हमारे समाज में दिखावे के साथ-साथ दबंगई भी बढ़ रही है। शादी समारोहों में महंगी आतिशबाजी किया जाना दिखावे और झूठे आडंबर का संकेत है, जिस पर अब तक कोई रोक नहीं लग पाई है। महंगे कपड़े-लत्ते, ज्वैलरी, कारों से लेकर साज-सज्जा तक में लोग खूब दिखावा करते हैं, मानो इसके बिना समाज में इज्जत नहीं बनेगी। समस्या का तीसरा पहलू है दबंगई का प्रदर्शन, जो हर्ष फायरिंग के रूप में ही सबसे ज्यादा दिखाई देता है। शादी के समय शोर-शराबा तो बैंड-बाजे और आतिशबाजी से भी खूब हो जाता है, पर जब तक हवाई फायरिंग जैसी धमाकेदार चीज न हो, लोगों को यह लगता ही नहीं है कि शादी जैसा आयोजन हुआ है।

आखिर इस समस्या का समाधान क्या है? वर्ष 2016 में दिल्ली की एक अदालत में अपनी बेटी खो चुके एक पिता ने समाज में खुशी के मौके पर की जाने वाली हर्ष फायरिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए दिशा-निर्देश जारी करने की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे चुका है कि शादियों के दौरान अथवा किसी अन्य आयोजन के दौरान हर्ष फायरिंग जैसी कोई घटना न हो। लेकिन हर्ष फायरिंग के कारण होने वाले अनगिनत हादसे साबित करते हैं कि इस बारे में अदालतों के निर्देशों की कोई परवाह नहीं की जा रही है। गंभीर बात यह है कि खुद प्रशासन भी ऐसे मामलों का स्वत: संज्ञान लेने से बचता है। उसे लगता है कि इससे लोग स्थानीय प्रशासन के खिलाफ हो जाएंगे। अगर प्रशासन ऐसे मामलों में कार्रवाई करे, तो उसे आम जनता से सराहना ही मिलेगी।

इसमें एक पक्ष जनता की जागरूकता का भी है। अगर लोगों को इस बारे में सचेत नहीं किया गया कि हर्ष फायरिंग एक गैरकानूनी कृत्य है, तो इससे कभी छुटकारा नहीं मिलेगा। इसके लिए राजनेताओं को भी पहल करनी होगी। हालांकि कई बार खुद राजनेता भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। इस तरह दिखावा करने या दबंगई का प्रदर्शन करने से कई लोगों के अहं की तुष्टि भले होती हो, पर है तो यह एक गैरकाननी कृत्य ही। यदि प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती बरते और जनता को इस बारे में सचेत करे, तो संभव है कि ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा।

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