-
केंद्रीय बजट सरकार की आर्थिक रणनीति, कर नीति, सामाजिक कल्याण योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक क्षेत्रों में खर्च की प्राथमिकताएं भी इसी के माध्यम से तय होती हैं। भारत का संघ बजट हर वर्ष वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है, आमतौर पर 1 फरवरी को। इस साल का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को पेश करेंगी। (Photo Source: Express Archive)
-
यह बजट ‘Viksit Bharat@2047’ विजन के अनुरूप टैक्स रिलीफ, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और लॉन्ग टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। बता दें, बजट को संसद से पारित कराने के लिए बजट सत्र (Budget Session) आयोजित किया जाता है। आइए जानते हैं कि इस सत्र के दौरान बजट पर चर्चा, जांच और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया किन-किन चरणों से गुजरकर में पूरी होती है-
(Photo Source: Express Archive) -
बजट की प्रस्तुति (Presentation of the Budget)
बजट सत्र की शुरुआत केंद्रीय बजट की प्रस्तुति से होती है। वित्त मंत्री लोकसभा में बजट भाषण देते हैं, जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियां, आय-व्यय का विवरण और प्रमुख घोषणाएं शामिल होती हैं। इसके बाद बजट दस्तावेज दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, के पटल पर रखे जाते हैं। (Photo Source: PTI) -
सामान्य चर्चा (General Discussion)
इस चरण में लोकसभा के सदस्य बजट पर व्यापक चर्चा करते हैं। इसमें बजट की नीतियों, प्राथमिकताओं और सिद्धांतों पर बहस होती है। हालांकि, इस चरण में न तो बजट पर मतदान होता है और न ही कोई कट मोशन पेश किया जा सकता है। चर्चा के अंत में वित्त मंत्री सदन को जवाब देते हैं। (Photo Source: ANI) -
विभागीय स्थायी समितियों द्वारा जांच (Scrutiny by Departmental Committees)
सामान्य चर्चा के बाद बजट को विभिन्न विभागीय स्थायी समितियों के पास भेजा जाता है। प्रत्येक समिति अपने-अपने मंत्रालय की अनुदान मांगों (Demands for Grants) की गहन जांच करती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 3 से 4 सप्ताह तक चलती है, जब संसद अवकाश पर रहती है। समितियां अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती हैं। (Photo Source: ANI) -
अनुदानों पर मतदान (Voting on Demands for Grants)
इस चरण में लोकसभा मंत्रालयों की अलग-अलग अनुदान मांगों पर मतदान करती है। केवल लोकसभा को ही इन मांगों पर मतदान का अधिकार होता है। समेकित निधि (Consolidated Fund of India) से जुड़े वे खर्च, जो ‘चार्ज्ड एक्सपेंडिचर’ होते हैं, मतदान के दायरे में नहीं आते। (Photo Source: ANI) -
विनियोग विधेयक का पारित होना (Passing of Appropriation Bill)
अनुदान मांगें पारित होने के बाद विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) लाया जाता है। इसके माध्यम से सरकार को समेकित निधि से धन निकालने की कानूनी अनुमति मिलती है। यह विधेयक पारित हुए बिना सरकार कोई भी व्यय नहीं कर सकती। (Photo Source: PTI) -
वित्त विधेयक का पारित होना (Passing of Finance Bill)
अंतिम चरण में वित्त विधेयक (Finance Bill) पेश किया जाता है, जिसमें करों और राजस्व से संबंधित प्रस्तावों को कानूनी रूप दिया जाता है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत मनी बिल होता है। लोकसभा से पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह वित्त अधिनियम (Finance Act) बन जाता है। (Photo Source: ANI)
(यह भी पढ़ें: केंद्रीय बजट कैसे बनता है? किन अनुच्छेदों में छिपा है बजट का ढांचा)