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अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना दुनिया भर के लाखों लोग देखते हैं। हाल ही में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) द्वारा घोषित नए नियमों ने ग्रीन कार्ड आवेदकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। नए नियम के अनुसार, जो लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका जाते हैं, उन्हें ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए अपने देश वापस जाकर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलेट से प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। (Photo Source: Pexels)
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कानून में बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन इसका असर लाखों लोगों पर पड़ सकता है। खासतौर पर उन देशों के नागरिकों पर, जहां से सबसे ज्यादा लोग अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्राप्त करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं उन टॉप 10 देशों के बारे में, जिनके नागरिकों को सबसे ज्यादा अमेरिकी ग्रीन कार्ड मिलते हैं। यह आंकड़े 2023 के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी रिकॉर्ड पर आधारित हैं। (Photo Source: Pexels)
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मेक्सिको (1,80,530)
ग्रीन कार्ड पाने के मामले में मेक्सिको पहले स्थान पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह पारिवारिक स्पॉन्सरशिप और अमेरिका से भौगोलिक नजदीकी है। बड़ी संख्या में मैक्सिकन परिवार पहले से अमेरिका में बसे हुए हैं, जिससे परिवार आधारित इमिग्रेशन लगातार बढ़ता रहता है। (Photo Source: Pexels) -
क्यूबा (81,600)
क्यूबा के नागरिकों को विशेष कानूनी प्रावधान ‘क्यूबन एडजस्टमेंट एक्ट’ का लाभ मिलता है। इसके तहत क्यूबा से आने वाले लोगों के लिए स्थायी निवास प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। फ्लोरिडा में बसे बड़े क्यूबाई समुदाय का भी इसमें बड़ा योगदान है। (Photo Source: Pexels) -
भारत (78,070)
भारत रोजगार आधारित इमिग्रेशन में सबसे मजबूत देशों में से एक है। भारतीय प्रोफेशनल्स बड़ी संख्या में H-1B वीजा के जरिए अमेरिका पहुंचते हैं और बाद में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। टेक्नोलॉजी, आईटी और मेडिकल सेक्टर में भारतीयों की भारी मांग है। हालांकि भारतीय आवेदकों को लंबी वेटिंग और बैकलॉग का सामना करना पड़ता है। (Photo Source: Pexels) -
डोमिनिकन रिपब्लिक (68,870)
इस देश से अमेरिका जाने वाले ज्यादातर लोग परिवार आधारित इमिग्रेशन के जरिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करते हैं। न्यूयॉर्क जैसे शहरों में बसे डोमिनिकन समुदाय नए आवेदकों को स्पॉन्सर करते हैं। (Photo Source: Pexels) -
चीन (59,260)
चीन के नागरिक शिक्षा, रिसर्च, बिजनेस और निवेश के जरिए बड़ी संख्या में अमेरिका पहुंचते हैं। EB-5 निवेश कार्यक्रम और रिसर्च सेक्टर में चीनी नागरिकों की मजबूत मौजूदगी ग्रीन कार्ड संख्या बढ़ाने में मदद करती है। (Photo Source: Pexels) -
फिलीपींस (49,200)
फिलीपींस लंबे समय से अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में अहम भूमिका निभा रहा है। हजारों नर्स और मेडिकल प्रोफेशनल्स हर साल अमेरिका जाकर स्थायी निवास प्राप्त करते हैं। परिवार आधारित आवेदन भी यहां बड़ी संख्या में होते हैं। (Photo Source: Pexels) -
वियतनाम (36,000)
वियतनाम के नागरिकों को मुख्य रूप से परिवार पुनर्मिलन यानी फैमिली रीयूनिफिकेशन के जरिए ग्रीन कार्ड मिलता है। अमेरिका में बसे वियतनामी परिवार अपने रिश्तेदारों को स्पॉन्सर करते हैं। (Photo Source: Pexels) -
अफगानिस्तान (30,300)
अफगानिस्तान की संख्या में हाल के वर्षों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। इसका मुख्य कारण स्पेशल इमिग्रेंट वीजा (SIV) और मानवीय सहायता कार्यक्रम हैं। अमेरिका ने कई अफगान नागरिकों को विशेष सुरक्षा और रेजिडेंसी दी है। (Photo Source: Pexels) -
ब्राजील (28,880)
ब्राजील से आने वाले एंटरप्रेन्योर और एक्सपर्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। EB-1 और EB-2 नेशनल इंटरेस्ट वेवर जैसी श्रेणियों में ब्राजीलियाई नागरिकों को लाभ मिल रहा है। (Photo Source: Pexels) -
एल साल्वाडोर (26,210)
एल साल्वाडोर के लोगों के लिए पारिवारिक संबंध और विशेष सुरक्षा कार्यक्रम ग्रीन कार्ड का प्रमुख रास्ता हैं। अमेरिका में बसे साल्वाडोरियन समुदाय अपने परिवार के सदस्यों को लगातार स्पॉन्सर करते हैं। (Photo Source: Pexels) -
किन देशों पर पड़ेगा नए नियम का सबसे ज्यादा असर?
एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत, मेक्सिको, चीन और फिलीपींस जैसे देशों के नागरिकों को पहले से ही ग्रीन कार्ड बैकलॉग के कारण कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। यदि यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) का नया नियम लागू होता है, तो इन देशों के आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान अपने देश लौटना पड़ सकता है, जिससे समय और अनिश्चितता दोनों बढ़ सकती हैं। हालांकि, हर केस अलग होगा और अंतिम फैसला आवेदक की वीजा कैटेगरी, स्टेटस और इमिग्रेशन इतिहास पर निर्भर करेगा। (Photo Source: Pexels)
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