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काजू दुनिया के सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में से एक हैं। इनका स्वाद हल्का मीठा, बनावट मुलायम और पोषण भरपूर होता है। यही वजह है कि इन्हें स्नैक से लेकर मिठाइयों, सब्जियों और कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि काजू को पेड़ से तोड़ने के बाद सीधे खाया नहीं जा सकता। इसे खाने योग्य बनाने के लिए कई जटिल और सावधानीभरी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। (Photo Source: Pexels)
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पेड़ पर उगने से लेकर आपकी थाली तक पहुंचने तक हर काजू की लंबी यात्रा होती है, जिसमें कटाई, सुखाना, खोल हटाना, सफाई और छंटाई जैसे कई चरण शामिल होते हैं। आइए जानते हैं काजू की खेती और प्रोसेसिंग का पूरा सफर। (Photo Source: Pexels)
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काजू दूसरे मेवों की तरह नहीं उगते
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि काजू भी बादाम या अखरोट की तरह पेड़ पर गुच्छों में उगते होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। काजू एक रसदार फल, जिसे ‘कैश्यू एप्पल’ कहा जाता है, उसके नीचे बाहर की ओर जुड़े होते हैं। सबसे खास बात यह है कि एक काजू एप्पल से केवल एक ही काजू मिलता है। यानी थोड़ी-सी मात्रा में काजू तैयार करने के लिए बड़ी संख्या में फलों की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि इसकी प्राकृतिक उपज सीमित रहती है। (Photo Source: Pexels) -
काजू का छिलका प्राकृतिक रूप से जहरीला होता है
बहुत कम लोग जानते हैं कि पेड़ से तोड़ा गया कच्चा काजू सीधे खाने योग्य नहीं होता। इसके बाहरी खोल में कैश्यू नट शेल लिक्विड (CNSL) नाम का एक रसायन होता है, जो त्वचा के संपर्क में आने पर जलन, फफोले और केमिकल बर्न जैसी समस्या पैदा कर सकता है। (Photo Source: Pexels) -
इसी वजह से काजू को खाने लायक बनाने से पहले उसके छिलकों को भूनना, भाप देना या गर्म करके उसमें मौजूद जहरीले तेल को निष्क्रिय किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान काम करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण और दस्तानों की आवश्यकता पड़ती है, जिससे प्रोसेसिंग की लागत बढ़ जाती है। (Photo Source: Pexels)
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छिलके निकालना बेहद मुश्किल और समय लेने वाला काम है
काजू का असली दाना बहुत नाजुक होता है। अगर खोल निकालते समय थोड़ा भी दबाव ज्यादा पड़ जाए तो दाना टूट सकता है। चूंकि पूरे और बिना टूटे काजू की कीमत ज्यादा होती है, इसलिए इन्हें बेहद सावधानी से निकाला जाता है। दुनिया के कई काजू उत्पादक देशों में आज भी बड़ी संख्या में श्रमिक हाथों से या खास उपकरणों की मदद से एक-एक काजू का खोल हटाते हैं। इसके बाद दाने पर लगी पतली भूरी परत भी हाथों से साफ की जाती है। (Photo Source: Pexels) -
एक किलो काजू तैयार करने में कई चरणों से गुजरना पड़ता है
काजू उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई प्रक्रियाओं से गुजरता है, जैसे- पेड़ से फल तोड़ना, काजू को फल से अलग करना, सुखाना, भूनना या स्टीम देना, खोल निकालना, पतली परत हटाना, गुणवत्ता के अनुसार छंटाई करना, और पैकिंग करना। इन सभी चरणों में समय, श्रम और गुणवत्ता जांच की जरूरत होती है। प्रोसेसिंग के दौरान कई दाने टूट भी जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन कम हो जाता है। (Photo Source: Pexels) -
कुछ ही देशों में होती है बड़े पैमाने पर खेती
काजू की खेती केवल उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) जलवायु वाले इलाकों में ही अच्छी तरह होती है। भारत, वियतनाम, आइवरी कोस्ट, तंजानिया, नाइजीरिया और कुछ अन्य अफ्रीकी देश इसके प्रमुख उत्पादक हैं। अगर किसी साल मौसम खराब हो जाए, सूखा पड़ जाए, अधिक बारिश हो या फसल में बीमारी फैल जाए, तो उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में बाजार में काजू की कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय परिवहन लागत और श्रमिकों की उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करती है। (Photo Source: Pexels) -
बड़े और साबुत काजू ज्यादा महंगे होते हैं
सभी काजू एक जैसी कीमत पर नहीं बिकते। जो काजू आकार में बड़े, सफेद और पूरी तरह साबुत होते हैं, उन्हें प्रीमियम ग्रेड माना जाता है और उनकी कीमत सबसे अधिक होती है। वहीं टूटे हुए या छोटे काजू सस्ते होते हैं और इनका इस्तेमाल मिठाइयों, नमकीन, करी, बेकरी उत्पादों और अन्य व्यंजनों में किया जाता है। (Photo Source: Pexels) -
बढ़ती मांग भी कीमत बढ़ा रही है
आज दुनिया भर में हेल्दी स्नैकिंग और प्लांट-बेस्ड डाइट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। काजू का इस्तेमाल ट्रेल मिक्स, वेगन चीज, प्लांट-बेस्ड दूध, मिठाइयों, करी और कई हेल्दी रेसिपी में किया जाता है। मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा। यही कारण है कि बाजार में काजू की कीमत ऊंची बनी रहती है। (Photo Source: Pexels) -
क्या काजू अपनी कीमत के लायक हैं?
पोषण के लिहाज से काजू बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इनमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई तरह के नुकसान से बचाने में भी मदद करते हैं। हालांकि इनमें कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। (Photo Source: Pexels)
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