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पिछले कुछ समय से पेंगुइन काफी चर्चा में है। ये एक जली पक्षी है जो उड़ नहीं पाते हैं। ये पानी में आसानी से तेज तैर और गोता लगा सकते हैं। पेंगुइन ठंडे और बर्फीले क्षेत्रों में रहते हैं। ये बेहद ही कम तापमान में रह सकते हैं। इनकी एक प्रजाति एम्परर पेंगुइन है जो -50 डिग्री सेल्सियस तक में रह सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे इतने ठंड में ये जिंदा रहते हैं? (Photo: Pexels)
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अंटार्कटिका में मुख्य रूप से पेंगुइन की चार प्रजातियां पाई जाती हैं- एम्परर, एडेली, जेंटू और चिनस्ट्रैप पेंगुइन। इनमें एम्परर पेंगुइन सबसे खास हैं, क्योंकि ये -50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी जीवित रह सकते हैं। (Photo: Pexels)
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पेंगुइन इस क्षमता के बारे में ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया में समुद्री और अंटार्कटिक अध्ययन संस्थान की विशेषज्ञ जेन यंगर ने समझाया है। (Photo: Pexels)
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पूरी दुनिया में पेंगुइन की लगभग 17 से 19 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में फैली हुई हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के छोटे ब्लू पेंगुइन से लेकर अंटार्कटिका के एम्परर पेंगुइन, सब-अंटार्कटिका द्वीपों के किंग पेंगुइन और अफ्रीकी पेंगुइन शामिल हैं। जो भूमध्य रेखा के उत्तर दिशा में मिलने वाली एकमात्र प्रजाति है। (Photo: Pexels)
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दक्षिणी गोलार्ध के बड़े हिस्से में बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई नजर आती है जहां केवल वही जीव जिंदा रह पाते हैं जो ठंड के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। दक्षिणी गोलार्ध में अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप आते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं एम्परर पेंगुइन कैसे -50 डिग्री सेल्सियस में जिंदा रहते हैं। (Photo: Pexels) धरती का सबसे दुखी जानवर कौन सा है? जरूर सुना होगा नाम लेकिन पता नहीं होगा
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एम्परर पेंगुइन न सिर्फ -50 डिग्री सेल्सियस की कड़कड़ाती ठंड में जिंदा रहते हैं बल्कि धरती के सबसे खराब मौसम में प्रजनन भी करते हैं। ये पेंगुइन की सभी प्रजातियों में सबसे बड़े होते हैं। (Photo: Pexels)
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प्रजनन के दौरान इनका वजन 40 किलो तक हो सकता है। ये अप्रैल में प्रजनन शुरू करते हैं, ताकि उनके बच्चे वसंत ऋतु में पैदा हों। वहीं, अंडे मई के आसपास देते हैं और न पेंगुइन करीब चार महीने तक सर्दियों में अंडे को सेते हैं। इस दौरान तापमान -30 डिग्री से भी नीचे चला जाता है और बर्फीले तूफानों में -60 डिग्री तक पहुंच सकता है। (Photo: Pexels)
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एम्परर पेंगुइन के शरीर पर चार परतों में घने और मोटे पंख होते हैं। इसके साथ ही इनके शरीर में मोटी चर्बी की लेयर होती है जो इन्हें ठंडी हवा और बर्फ से बचाने में मदद करती है। इसके साथ ही इनकी चोंच, फ्लिपर, पैर और पंजे छोटे होते हैं जिससे शरीर से गर्मी का नुकसान कम हो जाता है। इनका धड़ और छोटे अंग शरीर में गर्मी को बनाए रखने में मदद करते हैं। (Photo: Pexels)
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इसके साथ ही एम्परर पेंगुइन के शरीर में खास रक्त संचार प्रणाली होती है जो नाक जैसे हिस्सों से भी गर्मी का नुकसान कम करने में मदद करती है। (Photo: Pexels)
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अंडों को सेते समय नर एम्परर पेंगुइन हजारों की संख्या में एक-दूसरे से सटकर खड़े रहते हैं। इसे हडलिंग व्यवहार कहा जाता है। इससे शरीर की गर्मी बची रहती है और बाहर का तापमान -30 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर जाने पर इसके शरीर का तापमान बेहतर रहता है। एक झुंड में पांच हजार तक पेंगुइन हो सकते हैं। (Photo: Pexels)
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इस लेख के अनुसार पेंगुइन बारी-बारी से अपनी जगह बदलते रहते हैं ताकि हर एक को गर्मी मिल सके। इसे पूरे समय नर पेंगुइन कुछ भी नहीं खाते हैं। इस दौरान ये शरीर में जमा चर्बी से ही ऊर्जा लेते हैं। (Photo: Pexels) ये हैं धरती के 10 सबसे खुशहाल जानवर