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चंदन की लकड़ी दुनिया की सबसे महंगी और कीमती लकड़ियों में से एक मानी जाती है। हिंदू धर्म में इसे बेहद ही पवित्र माना जाता है। देवी-देवताओं की पूजा, हवन और शिवलिंग के अभिषेक में चंदन की लकड़ी, लेप और इत्र का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। माना जाता है नियमित रूप से माथे पर चंदन लगाने से मन सात्विक और विचार सकारात्मक होते हैं। (Photo Source: Freepik)
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चंदन को दुनिया की सबसे कीमती और सुगंधित लकड़ियों में से एक माना जाता है। इसकी लकड़ी और जड़ों से निकलने वाला प्राकृतिक तेल अपनी खास खुशबू के कारण प्रसिद्ध है। लेकिन चंदन के पेड़ को आप ऐसे ही नहीं काट सकते हैं। इसके काटने के कुछ नियम हैं। अगर बिना नियम आप पेड़ काटते हैं तो जेल की भी हवा खानी पड़ सकती है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ रोचक जानकारी। (Photo Source: Freepik)
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चंदन का पेड़ धीरे-धीरे बढ़ने वाला पौधा होता है। यह एक अर्ध-परजीवी पौधा होता है। यानी यह अपनी पोषण जरूरतें खुद नहीं करता, बल्कि पास में लगे दूसरे पौधों की जड़ों से भी कुछ पोषक तत्व प्राप्त करता है। इसलिए चंदन के साथ नीम, करंज, अरहर, अकासिया, कैसिया, पोंगामिया जैसे पौधे लगाए जाते हैं। (Photo Source: Pexels)
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कितने सालों में तैयार होता है चंदन का पेड़
चंदन का पेड़ धीरे-धीरे बढ़ता है। आमतौर पर चंदन का पेड़ 12 से 15 वर्ष में अच्छी तरह तैयार हो जाता है। हालांकि, अधिक तेल के लिए कई किसान 15 से 20 वर्ष तक का इंतजार करते हैं। (Photo Source: Pexels) -
भारत में खेती
भारत में चंदन की खेती कर्नाटक में सबसे अधिक होती है। मैसूर चंदन पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी इसकी खेती होती है। (Photo Source: Pexels) -
काटने का नियम
चंदन का पेड़ निजी भूमि पर बिना परमिट के काटना या बेचना गैरकानूनी है। चंदन का पेड़ काटने के लिए राज्य के वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। पेड़ को काटने से पहले स्थानीय वन विभाग में आवेदन करना होता है। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में ही पेड़ की कटाई की जाती है। काटे गए चंदन के हर लट्ठे पर एक क्रमांक अंकित किया जाता है। वहीं, एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने या बेचने के लिए वन विभाग द्वारा ‘ट्रांजिट पास’ जारी किया जाता है। (Photo Source: Pexels) -
कहां-कहां होता है इस्तेमाल
चंदन की लकड़ी का इस्तेमाल सदियों से इत्र, अगरबत्ती, धार्मिक अनुष्ठानों, आयुर्वेदिक दवाओं, साबुन, सौंदर्य प्रसाधनों और लग्जरी हस्तशिल्प बनाने में किया जाता है। भारत में सबसे अधिक प्रसिद्ध सफेद चंदन है, जिसे उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है। (Photo Source: Freepik) -
चंदन के पेड़ में अच्छी गुणवत्ता वाली हृदय लकड़ी में ही सबसे अधिक सुगंध और तेल पाया जाता है और सबसे अधिक कीमत ऐसी ही पेड़ की होती है। भारत का सफेद चंदन दुनिया की सबसे बेहतरीन चंदन प्रजातियों में गिना जाता है। इसके अलावा चंदन का पेड़ जितना पुराना होता है, उसकी लकड़ी की गुणवत्ता और सुगंध उतनी ही बेहतर मानी जाती है। (Photo Source: Freepik)
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