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ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों (चार धाम) में से एक है। यह मंदिर केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, अनोखी वास्तुकला और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने और विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने आते हैं। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मंदिर से जुड़े कुछ रोचक रहस्यों और अनूठी परंपराओं के बारे में। (PTI Photo)
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हर दिन बदला जाता है मंदिर का ध्वज
जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज प्रतिदिन बदला जाता है। यह कार्य विशेष रूप से प्रशिक्षित सेवायत बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण के मंदिर के ऊंचे शिखर पर चढ़कर करते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को श्रद्धालु आस्था और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक मानते हैं। (ANI Photo) -
हर दिशा से एक जैसा दिखाई देता है सुदर्शन चक्र
मंदिर के सबसे ऊपरी भाग पर स्थापित सुदर्शन चक्र इसकी सबसे खास पहचान है। मान्यता है कि मंदिर को किसी भी दिशा से देखने पर यह चक्र ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह देखने वाले की ओर ही मुख किए हुए हो। इसकी अनोखी बनावट और ऊंचाई इसे मंदिर की सबसे आकर्षक विशेषताओं में शामिल करती है। (Photo Source: Jagannath Temple) -
दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में से एक
पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक रसोइयों में गिनी जाती है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है। मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की कृपा से महाप्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही बड़ी मात्रा में व्यर्थ जाता है। (ANI Photo) -
अनोखा है भोजन पकाने का तरीका
मंदिर की रसोई में भोजन मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी की आंच पर पकाया जाता है। इन बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है। मान्यता है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन सबसे पहले पक जाता है। यह अनूठी परंपरा लंबे समय से लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। (Photo Source: Jagannath Temple) -
लकड़ी की मूर्तियां और नवकलेवर की परंपरा
अधिकांश हिंदू मंदिरों में जहां पत्थर या धातु की मूर्तियां स्थापित होती हैं, वहीं जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं पवित्र लकड़ी से बनाई जाती हैं। निश्चित समय अंतराल पर नवकलेवर नामक विशेष अनुष्ठान के दौरान इन प्रतिमाओं को बदलकर नई प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। यह परंपरा जगन्नाथ संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। (PTI Photo) -
रथ यात्रा: आस्था और एकता का महापर्व
जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को भव्य लकड़ी के रथों में विराजमान कर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है। लाखों श्रद्धालु इन विशाल रथों को रस्सियों से खींचते हैं। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक मानी जाती है। (ANI Photo)
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