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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे के दौरान एक खास गिफ्ट ने सोशल मीडिया पर अचानक सुर्खियां बटोर लीं। पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की। मेलोनी ने इस गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “थैंक यू फॉर द गिफ्ट।” इसके बाद इंटरनेट पर एक बार फिर वही पुराना सवाल ट्रेंड करने लगा, “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” (Photo Source: @GiorgiaMeloni/X)
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पारले प्रोडक्ट्स की सफलता की कहानी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ‘मेलोडी’ टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स की सफलता की कहानी भी चर्चा में आ गई है। करीब 100 साल पुरानी यह भारतीय कंपनी आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय बिस्किट और कन्फेक्शनरी ब्रांड्स में गिनी जाती है। (Photo Source: parleproducts.com) -
इटली की पीएम मेलोनी द्वारा शेयर किए गए वीडियो को पारले ने भी अपने इंस्टाग्राम पेज @parlecandyculture पर शेयर किया। कंपनी ने मजेदार अंदाज में कैप्शन लिखा, “अब इटली भी पूछेगा… मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” और @parleproducts पर भी वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “स्वीटनिंग रिलेशनशिप्स सिन्स 1983.” (Photo Source: Pexels)
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1983 में लॉन्च हुई थी ‘मेलोडी’ टॉफी
भारत की लोकप्रिय चॉकलेट टॉफी ‘मेलोडी’ को देश की दिग्गज बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनी पारले प्रोडक्ट्स बनाती है, जिसने इसे साल 1983 में बाजार में उतारा था। अपनी अनोखी चॉकलेट और कैरेमल के स्वाद के कारण Melody ने 1980 और 90 के दशक में भारतीयों के बीच खास पहचान बनाई और आज भी यह लोगों की पसंदीदा टॉफियों में शामिल है। ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?’ जैसे मशहूर विज्ञापन ने इसकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। -
1929 में हुई थी पारले प्रोडक्ट्स की शुरुआत
‘मेलोडी’ टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स की शुरुआत 1929 में हुई थी। इसकी स्थापना मोहनलाल दयाल चौहान ने की थी, जो मूल रूप से गुजरात के वलसाड जिले के पारडी के रहने वाले थे। वह शुरुआत में मुंबई में रेशम और सिलाई के काम से जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने बेकरी और फूड बिजनेस में कदम रखा। (Photo Source: parleproducts.com) -
स्वदेशी आंदोलन से मिली प्रेरणा
1920 के दशक में चल रहे स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर मोहनलाल चौहान ने विदेशी फूड प्रोडक्ट्स को भारतीय विकल्प देने का फैसला किया। इसी उद्देश्य से वह जर्मनी गए, जहां उन्होंने कन्फेक्शनरी बनाने की आधुनिक तकनीक सीखी और मशीनरी के साथ भारत लौटे। (Photo Source: parleproducts.com) -
इसके बाद उन्होंने मुंबई के विले पारले इलाके में फैक्ट्री स्थापित की। फैक्ट्री जिस इलाके में थी, उसी के नाम पर कंपनी का नाम ‘पारले’ पड़ गया। शुरुआत में इस फैक्ट्री में केवल 12 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन धीरे-धीरे कंपनी के उत्पाद लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। (Photo Source: parleproducts.com)
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परिवार ने मिलकर खड़ा किया बड़ा कारोबार
मोहनलाल चौहान के पांच बेटे- मानेकलाल, पीतांबर, नरोत्तम, कांतिलाल और जयंतीलाल भी इस कारोबार में शामिल हो गए। उस दौर में भारतीय बाजार में यूरोपीय कैंडी और टॉफियों का दबदबा था, लेकिन चौहान परिवार ने भारतीय स्वाद और कम कीमत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। कहा जाता है कि चौहान परिवार खुद दुकानों पर जाकर अपनी बनाई ऑरेंज कैंडी और टॉफियां बेचता था। धीरे-धीरे पारले भारतीय परिवारों का भरोसेमंद नाम बन गया। (Photo Source: @Ramesh_JChauhan/X) -
पारले-जी ने दिलाई वैश्विक पहचान
1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण शुरू किया और ब्रिटिश आर्मी को सप्लाई का लाइसेंस भी मिला। आजादी के बाद कंपनी ने अपने ग्लूकोज बिस्किट को विदेशी ब्रांड्स के भारतीय विकल्प के रूप में पेश किया। बाद में यही बिस्किट ‘पारले-जी’ के नाम से दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड्स में शामिल हो गया। (Photo Source: Unsplash) -
सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में भी बनाई पहचान
1977 में जब भारत सरकार ने कोका-कोला को देश से बाहर किया, तब चौहान परिवार ने सॉफ्ट ड्रिंक बिजनेस में कदम रखा। इसी दौरान गोल्ड स्पॉट, थम्स अप और फ्रूटी जैसे ब्रांड्स लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। (Photo Source: parleproducts.com) -
आज भी चौहान परिवार के हाथ में कंपनी की कमान
आज पारले प्रोडक्ट्स का संचालन चौहान परिवार के पास ही है। कंपनी की कमान विजय चौहान के हाथों में है, जो इसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वहीं शरद चौहान और राज चौहान भी कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। (Photo Source: Pexels) -
पारले के लोकप्रिय ब्रांड्स
पारले प्रोडक्ट्स आज बिस्किट और कन्फेक्शनरी की दुनिया का बड़ा नाम बन चुका है। कंपनी के लोकप्रिय ब्रांड्स में पारले-जी, मोनाको, क्रैकजैक, मैरी, 20-20, मैंगो बाइट, पॉपिन्स, किस्मी, मेलोडी और कई अन्य उत्पाद शामिल हैं। (Photo Source: parleproducts.com) -
देशभर में फैले हैं मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट देश के कई राज्यों में मौजूद हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार और कर्नाटक शामिल हैं। हरियाणा के बहादुरगढ़ और बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्लांट कंपनी के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में गिने जाते हैं। (Photo Source: Pexels)
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