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इटली दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से रोम के प्रतिष्ठित कोलोसियम (Colosseum) के पास हुई मुलाकात ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर खींच लिया है। करीब 2,000 साल पुराना यह विशाल एम्फीथिएटर न केवल रोम की पहचान है, बल्कि यह प्राचीन रोमन सभ्यता की वास्तुकला, संस्कृति और शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। आज भी कोलोसियम दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है और हर साल लाखों पर्यटक इसकी भव्यता देखने पहुंचते हैं। (PTI Photo)
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क्या है कोलोसियम का इतिहास?
कोलोसियम का निर्माण लगभग 80 ईस्वी में रोमन सम्राट टाइटस के शासनकाल में पूरा हुआ था। इसका आधिकारिक नाम फ्लेवियन एम्फीथिएटर (Flavian Amphitheatre) था, क्योंकि इसका निर्माण सम्राट वेस्पासियन ने शुरू कराया था, जो फ्लेवियन वंश से थे। उस समय इसे आम जनता के मनोरंजन के लिए बनाया गया था और यहां ग्लैडिएटर मुकाबले, पशु शिकार, नाटकीय प्रस्तुतियां और नकली नौसैनिक युद्ध आयोजित किए जाते थे। -
का आनंद लेते थे। माना जाता है कि अपने चरम पर यह स्टेडियम 50,000 से 80,000 दर्शकों को समायोजित कर सकता था।
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इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना
कोलोसियम आज भी अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में सराहा जाता है। इसे पत्थर, कंक्रीट और लोहे की क्लैम्प्स से बनाया गया था। इसकी ऊंचाई लगभग 48 मीटर है और इसका आकार अंडाकार (elliptical) है। (PTI Photo) -
इसकी सबसे खास बात इसकी उन्नत डिजाइन थी, जिसमें दर्शकों के तेजी से प्रवेश और निकास के लिए कई मेहराबदार रास्ते और गलियारे बनाए गए थे। आधुनिक स्टेडियमों की डिजाइन भी कहीं न कहीं इसी संरचना से प्रेरित मानी जाती है।
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जमीन के नीचे छिपा था रहस्यमयी संसार
कोलोसियम के नीचे हाइपोजियम (Hypogeum) नामक भूमिगत सुरंगों और कमरों का जाल था। यहीं ग्लैडिएटर और जंगली जानवर अपने प्रदर्शन से पहले इंतजार करते थे। विशेष लिफ्टों और ट्रैप डोर्स की मदद से उन्हें अचानक एरीना में लाया जाता था, जिससे दर्शकों के लिए रोमांच और बढ़ जाता था। -
भूकंपों और समय की मार के बावजूद आज भी खड़ा है
सदियों के दौरान कई भूकंपों ने कोलोसियम को नुकसान पहुंचाया। इसके कई हिस्सों के पत्थर बाद में रोम के चर्चों और महलों के निर्माण में इस्तेमाल किए गए। बावजूद इसके, यह संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है और प्राचीन रोम की विरासत की गवाही देती है। साल 2007 में कोलोसियम को दुनिया के ‘न्यू सेवन वंडर्स’ यानी नए सात अजूबों में शामिल किया गया था। -
फिल्मों और पॉप कल्चर में भी खास पहचान
कोलोसियम केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है। हॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म ‘ग्लेडिएटर’, ‘रोमन हॉलिडे’, ‘द वे ऑफ द ड्रैगन’, ‘जम्पर’, ‘गॉडज़िला x कोंग: द न्यू एम्पायर’ समेत कई फिल्मों में इसे दिखाया गया है। इसके अलावा कईं भारतीय फिल्मों में भी कोलोसियम नजर आया है। यह आज भी प्राचीन रोम की भव्यता और शक्ति का वैश्विक प्रतीक बना हुआ है। -
अगर आप रोम जा रहे हैं, तो ये टिप्स आएंगे काम
अगर आप कोलोसियम घूमने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह जल्दी या शाम को जाना सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि इस समय भीड़ और गर्मी दोनों कम होती हैं। -
अधिकांश टिकटों में रोमन फोरम (Roman Forum) और पैलेटाइन हिल (Palatine Hill) की एंट्री भी शामिल होती है, जो कोलोसियम के पास ही स्थित हैं। अगर आप इसके इतिहास को गहराई से समझना चाहते हैं, तो अंडरग्राउंड चैंबर्स वाली गाइडेड टूर लेना बेहतर रहेगा। आरामदायक जूते पहनना न भूलें, क्योंकि पूरे क्षेत्र में काफी पैदल चलना पड़ता है।
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इतिहास और आधुनिक दुनिया के बीच एक पुल
कोलोसियम ने रोमन सम्राटों का दौर देखा, युद्ध और आक्रमण झेले, भूकंप सहे और अब आधुनिक कूटनीतिक मुलाकातों का भी साक्षी बन रहा है। पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह ऐतिहासिक स्मारक केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि आज भी वैश्विक संस्कृति और संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। (ANI Photo)
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