-
16 अप्रैल 1853 का दिन भारतीय इतिहास में एक अहम मील का पत्थर माना जाता है। इसी दिन भारत में पहली बार पैसेंजर ट्रेन चली थी, जिसने देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था की नींव रखी। (Photo Source: Pexels)
-
भारत की पहली यात्री ट्रेन तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) के बोरी बंदर (आज का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) से ठाणे तक चलाई गई थी। यह ट्रेन लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंची थी। (Photo Source: Pexels)
-
400 यात्रियों के साथ शुरू हुई ऐतिहासिक यात्रा
इस ऐतिहासिक ट्रेन में करीब 400 यात्री सवार थे। ट्रेन में कुल 14 डिब्बे लगे थे और इसे तीन भाप इंजन- साहिब, सिंध और सुल्तान द्वारा खींचा गया था। यह भारत में रेलवे युग की शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा दी। (Photo Source: @mumbaiheritage/X) -
क्यों खास है यह दिन?
16 अप्रैल को हर साल भारतीय रेलवे के स्थापना दिवस के रूप में भी याद किया जाता है। इस दिन को भारत में रेल परिवहन की शुरुआत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। (Photo Source: Pexels) -
यह सिर्फ एक ट्रेन यात्रा नहीं थी, बल्कि एक ऐसे बदलाव की शुरुआत थी जिसने भारत को एक सूत्र में बांधने का काम किया। दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने में रेलवे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (Photo Source: Pexels)
-
दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में शामिल
आज भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक है और चौथे स्थान पर आता है। हर दिन लाखों यात्री भारतीय रेल के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। (Photo Source: Pexels) -
यह न केवल देश का प्रमुख परिवहन साधन है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है। भारतीय रेलवे आज करीब 13 लाख कर्मचारियों के साथ दुनिया के सबसे बड़े एंप्लॉयर्स में से एक है और देश के आर्थिक ढांचे की रीढ़ बन चुका है। (Photo Source: Pexels)
(यह भी पढ़ें: अलग-अलग देशों के कैलेंडर, जानिए कैसे बदलती है नए साल की तारीख)