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अंतरिक्ष की दुनिया से आई नई तस्वीरों ने लोगों की जिज्ञासा को फिर से बढ़ा दिया है। नासा के Artemis II मिशन द्वारा ली गई ये चांद और पृथ्वी की खूबसूरत तस्वीरें हैं। इन तस्वीरों में चांद का वह भी हिस्सा नजर आ रहा है जिसे, लोग पृथ्वी से नहीं देख पाते हैं। आइए जानते हैं इस मिशन के बारे में कुछ रोचक जानकारी और डालते हैं अंतरिक्ष की मनमोहक तस्वीरों पर एक झलक: (Photo Source: NASA / Facebook)
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नासा के Artemis II मिशन के दौरान चार अंतरिक्ष यात्रियों ने सोमवार (6 अप्रैल) को पृथ्वी से 252,756 मील (406,771 किलोमीटर) की दूरी तय की। ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के चारों ओर घूमते हुए नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 के नाम था, जिसने 1970 में 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की थी। हालांकि उस मिशन में तकनीकी खराबी के कारण अंतरिक्ष यान को तय रास्ते से ज्यादा दूर जाना पड़ा था। (Photo Source: NASA / Facebook)
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इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के उस हिस्से को देखने का मौका मिला, जो हमेशा पृथ्वी से दूर रहता है। ओरियन कैप्सूल के अंदर से ली गई तस्वीरों को नासा ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है। (Photo Source: NASA / Facebook)
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इस दौरान अंतरिक्ष यात्री अपने ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंदर से बाहर झांकते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही अपने फोन में भी चांद की फोटो क्लिक करते नजर आएं। (Photo Source: NASA / Facebook)
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आइए डालते हैं नासा द्वारा साझा की गई इस मिशन के दौरान की तस्वीरों पर एक झलक। (Photo Source: NASA / Facebook)
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नासा की वेबसाइट के अनुसार यह ओरियन स्पेसक्राफ्ट से ली गई एक खास तस्वीर है, जो Artemis II मिशन के दौरान 6 अप्रैल 2026 को चंद्रमा के पास से गुजरते समय ली गई है। यह तस्वीर चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी के अर्थसेट (जैसे सूरज डूबता दिखता है, वैसे ही पृथ्वी चंद्रमा के क्षितिज के पीछे डूबती दिख रही है) की है। पृथ्वी हल्के नीले रंग की दिखाई दे रही है और उस पर सफेद बादल घूमते नजर आ रहे हैं। पृथ्वी का जो हिस्सा अंधेरे में है, वहां रात का समय चल रहा है। वहीं, जहां उजाला है वहां दिन का समय है। तस्वीर में चंद्रमा की सतह दिखाई दे रही है, जिसमें Ohm क्रेटर नाम का बड़ा गड्ढा दिख रहा है। इस गड्ढे के किनारे सीढ़ीनुमा है और बीच में ऊंची चोटियां हैं। नासा के अनुसार ये चोटियां तब बनती हैं जब उल्कापिंड के टकराने पर चंद्रमा की सतह पिघलकर ऊपर उछल जाती है और बीच में उठ जाती है। (Photo Source: NASA Website)
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नासा की वेबसाइट पर साझा की गई जानकारी के अनुसार यह तस्वीर भी 6 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस II मिशन के दौरान क्रू द्वारा ली गई चंद्रमा की है। इसमें चंद्रमा का वह हिस्सा दिखाई दे रहा है जहां दिन और रात की सीमा (टर्मिनेटर) होती है। इस क्षेत्र में सूरज की रोशनी बहुत तिरछे कोण से पड़ती है, जिससे चंद्रमा की सतह पर लंबी और गहरी छाया बनती हैं। यह तस्वीर मिशन के छठे दिन, जब अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के पास उड़ान भर रहे थे, तब ली गई। (Photo Source: NASA Website)
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ऑर्टेमिस II मिशन के दौरान ली गई यह तस्वीर चंद्रमा के किनारे के ऊपर पृथ्वी डूबती हुई (Earthset) दिखाई दे रही है। यह तस्वीर चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से ली गई, जिसमें चंद्रमा की सतह के बड़े बेसिन, क्रेटर की कतारें और पीछे पृथ्वी दिखाई दे रही है। (Photo Source: NASA Website)
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इस तस्वीर में चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढकता हुआ दिखाई दे रहा है। अंतरिक्ष यात्रियों के नजरिए से चंद्रमा का आकार इतना बड़ा नजर आ रहा है कि उसने सूर्य को पूरी तरह ढक दिया है, जिससे लगभग 54 मिनट तक पूर्ण सूर्य ग्रहण जैसा दृश्य बना। यह समय पृथ्वी से दिखने वाले ग्रहण से काफी ज्यादा लंबा था। सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ घेरा दिखाई दे रहा है, जिसे कोरोना कहते हैं। यह सूर्य के बाहरी वातावरण का हिस्सा है। इस दौरान तारे भी दिखाई दे रहे हैं। साथ ही चंद्रमा पर पृथ्वी की रोशनी की हल्की चमक भी दिखाई दे रही है। (Photo Source: NASA Website)
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नासा के इस मिशन के दौरान ली गई इस तस्वीर में सामने ओरियन यान और पीछे चंद्रमा दिख रहा है, जिसमें ओरिएंटेल बेसिन के जरिए चंद्रमा के पास वाले और दूर वाले दोनों हिस्सों का अंतर साफ नजर आ रहा है। चंद्रमा के नीचे बीच की ओर ओरिएंटेल बेसिन नजर आ रहा है, जो लगभग 600 मील चौड़ा बड़ा टकराव से बना क्रेटर है और पहाड़ों से घिरा हुआ है। ओरिएंटेल के बाईं ओर जो चंद्रमा का हिस्सा नजर आ रहा है वह दूर का है, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। वहीं, दाईं ओर वाला हिस्सा चंद्रमा के सामने वाला है, जो पृथ्वी से रोज दिखाई देता है। (Photo Source: NASA Website)
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इस तस्वीर की बात करें तो यह चंद्रमा के सबसे पुराने और बड़े बेसिन के किनारे की है, जहां दिन-रात की सीमा के कारण गड्ढों और सतह की बनावट साफ दिखाई दे रही है। इस तस्वीर में साउथ पोल-ऐटकेन बेसिन के पूर्वी किनारे का बहुत अधिक गड्ढों वाला इलाका दिखाई दे रहा है। यह क्षेत्र अरबों साल पुराने चंद्रमा के भूवैज्ञानिक इतिहास की झलक दिखाता है। (Photo Source: NASA Website)
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यह चंद्रमा के वाविलोव क्रेटर की नजदीकी तस्वीर है, जिसमें दिन रात की सीमा पर बनी लंबी छायाओं के कारण सतह के गड्ढे और उबड़-खाबड़ इलाके साफ नजर आ रहे हैं। (Photo Source: NASA Website)
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इस तस्वीर में पृथ्वी चंद्रमा के पीछे दिखाई दे रही है। यह फोटो अर्थसेट से लगभग छह मिनट पहले ली गई थी। इसमें पृथ्वी अर्धचंद्र आकार में दिखाई दे रही है और सूर्य की रोशनी दाईं ओर से पड़ रही है। पृथ्वी का जो हिस्सा अंधेरे में है, वहां रात का समय है। वहीं, जहां हल्का नीला रंग नजर आ रहा है वहां दिन है। साथ ही तस्वीर में चंद्रमा की ऊबड़-खाबड़ सतह पर छोटी-छोटी गड्ढों की कतारें दिख रही हैं, जिन्हें द्वितीयक क्रेटर चेन कहा जाता है। यह संरचनाएं तब बनती हैं जब किसी बड़े टकराव के दौरान उछला हुआ मलबा आसपास गिरकर छोटे-छोटे गड्ढे बना देता है। (Photo Source: NASA Website)
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ऑर्टेमिस II मिशन के दौरान सफल चंद्रमा फ्लाईबाय के बाद ये 7 अप्रैल 2026 को मिल्की वे की ली गई शानदार तस्वीर है। इस फोटो में आसमान तारों से भरा हुआ दिखाई दे रहा है और आकाशगंगा मिल्की वे साफ नजर आ रही है। (Photo Source: NASA /X)
वीडियो में देखें: जब चांद के पीछे गया Artemis II, धरती से टूटा था संपर्क, कैसे बीते वो पल?