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हर साल 1 मई को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। यह दिन कामगारों और श्रमिकों के अधिकारों, उनके योगदान और उनके संघर्षों को सम्मान देने के लिए समर्पित है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दिन की असली कहानी अमेरिका के शिकागो में हुए हेमार्केट कांड से जुड़ी है, जिसने श्रमिक आंदोलन को वैश्विक पहचान दिलाई। (Photo Source: Pexels)
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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत 19वीं सदी के औद्योगिक दौर से जुड़ी हुई है। उस समय फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। उनसे 10 से 16 घंटे तक काम लिया जाता था, मजदूरी कम होती थी और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते थे। यहां तक कि बच्चों से भी कठोर श्रम कराया जाता था। (Photo Source: Pexels)
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इन हालातों के खिलाफ मजदूरों ने संगठित होकर आवाज उठानी शुरू की। यूनियन बनीं और एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ, जिसका सबसे बड़ा लक्ष्य था-8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे अपने लिए। इसी मांग को लेकर 1 मई 1886 को अमेरिका में बड़े स्तर पर हड़ताल और प्रदर्शन शुरू हुए। (Photo Source: Pexels)
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हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए और शिकागो इस आंदोलन का केंद्र बन गया, जहां लगभग 30-40 हजार मजदूर हड़ताल पर थे। 3 मई 1886 को शिकागो की मैककॉर्मिक हार्वेस्टिंग मशीन कंपनी के बाहर मजदूरों का प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच झड़प हो गई और पुलिस फायरिंग में कई मजदूर मारे गए। (Photo Source: Wikimedia Commons)
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इस घटना ने पूरे शहर में आक्रोश फैला दिया। इसी के विरोध में 4 मई 1886 को शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में एक सभा बुलाई गई। यह सभा पूरी तरह शांतिपूर्ण थी, जहां मजदूर नेता 8 घंटे काम की मांग और पुलिस हिंसा के खिलाफ भाषण दे रहे थे। बारिश के बावजूद सैकड़ों लोग इस सभा में शामिल हुए। (Photo Source: Wikimedia Commons)
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जब सभा समाप्त होने वाली थी और पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आगे बढ़ना शुरू किया, तभी अचानक एक अज्ञात व्यक्ति ने पुलिस की ओर बम फेंक दिया। इस धमाके में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। (Photo Source: Pexels)
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बम धमाके के तुरंत बाद हालात बेकाबू हो गए। पुलिस ने भीड़ पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस हिंसा में कई मजदूरों और पुलिसकर्मियों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। यह घटना इतिहास में हेमार्केट कांड के नाम से दर्ज हो गई। (Photo Source: Wikimedia Commons)
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घटना के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और कई मजदूर नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। आठ अराजकतावादी नेताओं पर साजिश का आरोप लगाया गया, हालांकि इनमें से कई लोग घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं थे। (Photo Source: Unsplash)
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इस मामले में चले मुकदमे को आज भी विवादास्पद माना जाता है। पर्याप्त सबूतों के अभाव के बावजूद 7 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि एक को 15 साल की जेल हुई। 11 नवंबर 1887 को चार आरोपियों को फांसी दे दी गई। बाद में इन्हें ‘हेमार्केट शहीद’ कहा गया। (Photo Source: Unsplash)
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इस फैसले की दुनियाभर में आलोचना हुई और इसे न्याय की बड़ी विफलता माना गया। 1893 में इलिनॉय के गवर्नर ने बचे हुए आरोपियों को माफ कर दिया और माना कि उनके साथ अन्याय हुआ था। हेमार्केट कांड का प्रभाव सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। इस घटना ने पूरी दुनिया में मजदूरों को एकजुट किया और उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाया। (Photo Source: Pexels)
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हेमार्केट घटना के तीन साल बाद, 1889 में पेरिस में आयोजित सेकंड इंटरनेशनल ने 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया। इस निर्णय के पीछे उद्देश्य था उन मजदूरों को श्रद्धांजलि देना जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और जान गंवाई। (Photo Source: Pexels)
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इसके बाद धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों ने 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में अपनाया। आज यह दिन भारत समेत कई देशों में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है और रैलियों, सभाओं और कार्यक्रमों के जरिए श्रमिकों के अधिकारों पर जोर दिया जाता है। (Photo Source: Pexels)
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भारत में मजदूर दिवस पहली बार 1923 में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में मनाया गया था। इसे लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान के नेता सिंगारवेलु चेट्टियार ने शुरू किया था। तब से यह दिन भारतीय श्रमिकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। (Photo Source: Pexels)
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आज के समय में मजदूर दिवस का महत्व और भी बढ़ गया है। यह हमें याद दिलाता है कि आज जो अधिकार हमें मिले हैं, जैसे 8 घंटे का कार्यदिवस, न्यूनतम वेतन और श्रम कानून वे लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम हैं। (Photo Source: Unsplash)
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हालांकि, आज भी असंगठित क्षेत्र के मजदूर, प्रवासी श्रमिक और दिहाड़ी कामगार कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में मजदूर दिवस सिर्फ इतिहास याद करने का दिन नहीं, बल्कि वर्तमान में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर भी है। (Photo Source: Pexels)
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