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दुनिया तेजी से वायरलेस तकनीक की ओर बढ़ रही है। जिस तरह आज Wi-Fi बिना तार के इंटरनेट पहुंचाता है, उसी तरह अब वैज्ञानिक बिना तार के बिजली पहुंचाने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसी दिशा में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। वैज्ञानिकों ने हवा के जरिए बिजली ट्रांसमिट करने में सफलता हासिल की है। (Photo Source: Pexels)
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फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स, लेजर और रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक का इस्तेमाल करके बिजली को बिना तार के हवा में भेजने का सफल प्रदर्शन किया। इस तकनीक को ‘अकोस्टिक वायर’ यानी ध्वनि आधारित अदृश्य तार कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में इससे घरों, फैक्ट्रियों और IoT डिवाइसेज में बिना प्लग और वायर के बिजली पहुंचाई जा सकेगी। (Photo Source: Pexels)
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कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस तकनीक में हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासोनिक साउंड वेव्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो हवा में एक खास रास्ता तैयार करती हैं। इसी अदृश्य रास्ते के जरिए छोटे इलेक्ट्रिक स्पार्क्स को सुरक्षित तरीके से भेजा जाता है। इसके साथ लेजर और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम भी जोड़े जाते हैं, जो ऊर्जा को नियंत्रित तरीके से रिसीवर तक पहुंचाते हैं। (Photo Source: Pexels) -
वैज्ञानिकों के अनुसार यह ‘फ्री-फ्लोटिंग बिजली’ नहीं है, बल्कि ‘फिल्ड-गाइडेड एनर्जी’ है। यानी ऊर्जा को एक तय दिशा में कंट्रोल करके भेजा जाता है। अल्ट्रासोनिक वेव्स हवा की घनत्व संरचना को बदलती हैं, जिससे बिजली के लिए एक अस्थायी मार्ग तैयार होता है। (Photo Source: Pexels)
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किन संस्थानों ने किया यह प्रयोग?
इस रिसर्च में फिनलैंड की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने हिस्सा लिया। यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और यूनिवर्सिटी ऑफ ओउलू के वैज्ञानिकों ने निजी टेक कंपनियों के साथ मिलकर इस प्रयोग को अंजाम दिया। इसके अलावा आल्टो यूनिवर्सिटी ने भी वायरलेस पावर ट्रांसफर से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्ययन किए हैं। (Photo Source: Pexels) -
आल्टो यूनिवर्सिटी के शोध में यह पाया गया कि मैग्नेटिक लूप एंटेना की मदद से कम दूरी तक बिजली को काफी दक्षता के साथ वायरलेस तरीके से ट्रांसफर किया जा सकता है। यह रिसर्च भविष्य की वायरलेस चार्जिंग तकनीक के लिए आधार तैयार कर रही है। (Photo Source: Pexels)
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क्या यह तकनीक पूरी तरह नई है?
वायरलेस चार्जिंग कोई नई बात नहीं है। आज स्मार्टफोन और कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज पहले से ही वायरलेस चार्ज होते हैं। लेकिन फिनलैंड का यह प्रयोग इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें ध्वनि, प्रकाश और रेडियो तरंगों को एक साथ इस्तेमाल कर बिजली को हवा में ट्रांसफर किया गया है। (Photo Source: Pexels) -
हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और फिलहाल केवल छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या सेंसर को पावर देने तक सीमित है। लंबी दूरी पर अधिक मात्रा में बिजली भेजना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। (Photo Source: Pexels)
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क्या भविष्य में खत्म हो जाएंगे बिजली के तार?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल पारंपरिक बिजली ग्रिड और तारों की जगह लेना संभव नहीं है। बड़े स्तर पर बिजली सप्लाई के लिए वायर इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी जरूरी रहेगा। लेकिन यह तकनीक भविष्य में स्मार्ट होम्स, रोबोटिक्स, मेडिकल इम्प्लांट्स और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है। (Photo Source: Pexels) -
उदाहरण के तौर पर, भविष्य में ऐसे घर हो सकते हैं जहां मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइसेज कमरे में प्रवेश करते ही अपने आप चार्ज होने लगें। फैक्ट्रियों में बिना केबल के मशीनों को ऊर्जा दी जा सकेगी और मेडिकल क्षेत्र में शरीर के अंदर लगे उपकरणों को बिना सर्जरी के चार्ज किया जा सकेगा। (Photo Source: Pexels)
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विज्ञान की दुनिया में क्यों अहम है यह खोज?
यह प्रयोग इस धारणा को चुनौती देता है कि बिजली के लिए हमेशा तार जरूरी होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक ऊर्जा ट्रांसफर के नए रास्ते खोल सकती है। हालांकि अभी इसे बड़े पैमाने पर लागू होने में कई साल लग सकते हैं, लेकिन फिनलैंड की यह उपलब्धि वायरलेस पावर टेक्नोलॉजी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। (Photo Source: Pexels)
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