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इस वक्त कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। संसद तक कूच करने के लिए जंतर-मंतर पर भारी संख्या में सीजेपी के समर्थक इकट्ठा हुआ, इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इस प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें आप प्रदर्शन का हाल देख सकते हैं। (Photo Source: Indian Express)
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अमूमन ज्यादातर प्रदर्शन नई दिल्ली में स्थित जंतर मंतर से शुरू होते हैं। इस वक्त यह जगह इस लिए चर्चा में है, क्योंकि पिछले 31 दिनों से ये कॉकरोच जनता पार्टी के लिए प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जंतर-मंतर का क्या मतलब है, कैसे पड़ा ये नाम और किसने बनवाया था। आइए तस्वीरों के जरिए जानते है जंतर-मंतर के बारे में कुछ रोचक जानकारी। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB)
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देश में कितने जंतर मंतर हैं
आगे बढ़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि देश में कितने जंतर मंतर हैं। दरअसल, भारत में जंतर मंतर की कुल पांच खगोलीय वेधशालाएं बनीं। हालांकि, इनमें से आज केवल चार वेधशालाएं ही मौजूद हैं। मथुरा की वेधशाला को साल 1857 से पहले नष्ट कर दिया गया था। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB) -
कैसे पड़ा जंतर-मंतर नाम और अर्थ
बताया जाता है कि पहले इसे यंत्र-मंत्र कहा जाता था। यह संस्कृत और हिंदी के शब्दों से मिलाकर बना है। इसका मूल रूप यंत्र-मंत्र माना जाता है। यहां मंत्र का अर्थ सूत्र, गणना या परिकलन से है। कई इतिहासकारों का मानना है कि स्थानीय बोलचाल में यंत्र का उच्चारण बदलकर ‘जंतर’ और मंत्र का ‘मंतर’ हो गया, जिससे जंतर मंतर नाम प्रचलित हुआ। आसान शब्दों में जंतर मंतर का अर्थ समझें तो इसका मतलब हुआ ‘गणना करने वाला यंत्र’। (Photo Source: Indian Express) -
किसने बनवाया था जंतर मंतर
आज खगोलीय जानकारी जुटाने के लिए तमाम तरह के यंत्र और मशीन बने हुए। लेकिन, कल्पना कीजिए कि जब इतनी आधुनिकता नहीं हुआ करती थी तब भी हमारे पूर्वजों को ब्रह्मांड के बारे में जानकारी थी। जंतर मंतर इसका जीता-जागता उदाहरण है। बता दें कि जंतर मंतर पत्थरों से बने खगोलीय उपकरणों का एक समूह है, जिसे बिना किसी दूरबीन के केवल आंखों से आकाशीय पिंडों का अध्ययन और गणना करने के लिए बनाया गया था। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB) -
भारत में 1726 से 1735 के बीच जो पांच जंतर-मंतर बने थे उनका निर्माण राजस्थान के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के आदेश पर हुआ था। दरअसल, महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय को गणित, वास्तुकला और खगोल विज्ञान में विशेष रुचि थी। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB)
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कहां-कहां बनें हैं जंतर-मंतर
पांचों जंतर मंतर जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में बनाए गए थे। चार तो अभी भी मौजूद हैं लेकिन मथुरा का जंतर मंतर अब अस्तित्व में नहीं है। इन वेधशालाओं में मिश्र यंत्र सहित कुल 19 तक अलग-अलग खगोलीय उपकरण बनाए गए हैं, जिनका उपयोग समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और अन्य खगोलीय गणनाओं के लिए किया जाता था। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB) -
सबसे बड़ा जंतर मंतर
राजस्थान के जयपुर में जंतर-मंतर का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध यंत्र है, जिसे सम्राट यंत्र कहा जाता है और यह दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य घड़ी (सनडायल) है। यह यूनोस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। इस यंत्र में एक बड़ा त्रिकोणाकार संरचना बनी हुई है, जिसका ऊपरी हिस्सा पृथ्वी की धुरी के समानांतर रखा गया है। इसके दोनों ओर वृत्ताकार आकार के दो भाग बने हैं, जो पृथ्वी की भूमध्य रेखा के समानांतर हैं। एक जानकार व्यक्ति कई यंत्रों की मदद से लगभग 20 सेकंड की सटीकता के साथ समय का पता लगा सकता है। इसके अलावा, यह सूर्य और अन्य खगोलीय पिंडों की स्थिति का भी सटीक अनुमान लगाने में सक्षम है। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB) -
कौन-कौन से यंत्र लगाए गए थे
उस समय जंतर-मंतर में कई तरह के खगोलीय यंत्र लगाए गए थे, जिनमें सम्राट यंत्र, जय प्रकाश यंत्र, दिशा यंत्र, राम यंत्र, चक्र यंत्र, राशिवलय यंत्र, दिगांश यंत्र और उतांश यंत्र प्रमुख हैं। समय के अलावा इन यंत्रों का मुख्य उद्देश्य उस दौरान खगोलीय तालिकाएं तैयार करना, सूर्य-चंद्रमा-ग्रहों की स्थिति और गति का सटीक अनुमान लगाना था। (Photo Source: Jantar Mantar | Jaipur, India/FB)
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