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वर्तमान समय में भारतीय नोटों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चेहरा नजर आता है। लेकिन महात्मा गांधी से पहले भारतीय नोटों पर किसी और का चेहरा हुआ करता था। आइए जानते हैं भारतीय करेंसी के बारे में कुछ दिलचस्प बातें: (Photo Source: Unsplash)
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1- महात्मा गांधी की पहली बार भारतीय करेंसी पर 1969 में महात्मा गांधी के जन्म शताब्दी के मौके पर उनका चेहरा प्रकाशित हुआ था। उस तस्वीर में वह बैठे हुए थे और पृष्ठभूमि में उनका सेवाग्राम आश्रम दिखाई देता था। (Photo Source: Unsplash)
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2- इसके बाद साल 1987 में 500 रुपये का नोट दोबारा जारी किया गया, जिस पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई गई। फिर 1996 में भारतीय रिजर्व बैंक ने महात्मा गांधी सीरीज शुरू की जिसके बाद से सभी भारतीय करेंसी के नोटों पर उनका चेहरा नजर आने लगा। (Photo Source: Indian Express)
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3- आजादी से पहले भारतीय नोटों पर किंग जॉर्ज V की तस्वीर छपती थी। ये नोट ब्रिटिश सरकार के समय जारी किए जाते थे। नोट इंग्लैंड से मंगवाए जाते थे और डिजाइन काफी रंगीन और उभरी हुई होती थी। कुछ समय तक किंग जॉर्ज VI की तस्वीर वाले नोट भी चलन में रहे। (Photo Source: Indian Express) नेपाल के पास क्यों नहीं है नोट छापने की मशीन, किस देश से छपवाता है अपनी करेंसी?
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4- आजादी के बाद भारत सरकार ने विदेशी राजा की तस्वीर हटाने का फैसला लिया। आजादी के बाद किसी भी भारतीय नोटों पर किसी शख्स की फोटो नहीं छपती थी। (Photo Source: Indian Express)
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5- फिर भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के नए नोटों में अशोक स्तंभ, खेती, विकास और भारतीय संस्कृति को पेश करने वाले चित्रों को छापा। ऐसे नोटों की छपाई का चलन कई सालों तक चला। (Photo Source: Indian Express)
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6- इसके बाद साल 1996 में भारतीय रिजर्व बैंक ने नई करेंसी लाने का फैसला लिया। जिसके बाद महात्मा गांधी का चेहरा नोटों पर छापा जाने लगा। (Photo Source: Indian Express)
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7- महात्मा गांधी ही क्यों?
दरअसल, महात्मा गांधी आजादी का सबसे बड़ा चेहरा था। दुनिया में उन्हें सच्चाई और शांति का प्रतीक माना गया। साथ ही उनकी पहचान दुनियाभर में थी। (Photo Source: Indian Express) -
8- शुरुआत में महात्मा गांधी की तस्वीर 10 रुपये और 500 रुपये के नोट पर छपते थे। लेकिन धीरे-धीरे अलग-अलग पर भी उनकी तस्वीर को छापा जाने लगा। (Photo Source: Unsplash) एक कुवैती दिनार 297 रुपये के बराबर, कैसे बनी इतनी मजबूत मुद्रा, क्यों डॉलर के गिरने से भी नहीं होती प्रभावित