-
मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक Apollo Missions मानी जाती हैं, जिनके तहत 1969 से 1972 के बीच इंसान ने छह बार चंद्रमा पर कदम रखा। इस दौरान Neil Armstrong पहले व्यक्ति बने जिन्होंने चांद की सतह पर कदम रखा। कुल 12 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरे और 24 वहां तक पहुंचे। (Photo Source: Pexels)
-
लेकिन इसके बाद, 1972 में Apollo 17 मिशन के बाद आज तक कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) से आगे नहीं जा सका। तो सवाल उठता है, जब हम चांद तक पहुंच चुके हैं, तो आखिर मंगल या अन्य ग्रहों तक इंसान क्यों नहीं पहुंच पाया? (Photo Source: Pexels)
-
चांद और दूसरे ग्रहों में सबसे बड़ा फर्क: दूरी
चंद्रमा पृथ्वी से करीब 3.84 लाख किमी दूर है, जबकि Mars (मंगल ग्रह) अपनी नजदीकी स्थिति में भी लगभग 5.5 करोड़ किमी दूर होता है। यह दूरी सैकड़ों गुना ज्यादा है। यही वजह है कि जहां चांद तक पहुंचने में कुछ दिन लगते हैं, वहीं मंगल तक जाने में 6 से 9 महीने तक का समय लग सकता है। (Photo Source: Pexels) -
तकनीकी चुनौतियां: अभी पूरी तरह तैयार नहीं
चांद मिशन एक सीमित समय और लक्ष्य के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन मंगल जैसे ग्रह पर जाने के लिए लंबे समय तक टिकने वाली तकनीक चाहिए। मौजूदा रॉकेट फ्यूल इतना प्रभावी नहीं कि लंबी दूरी जल्दी तय कर सके, न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसी तकनीक अभी विकास के चरण में है, और अंतरिक्ष यान का आकार बहुत बड़ा होना चाहिए, लगभग फुटबॉल मैदान जितना। (Photo Source: Pexels) -
इंसानी शरीर और दिमाग की सीमाएं
इंसान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण और वातावरण के अनुसार विकसित हुआ है। अंतरिक्ष में महीनों तक रहना बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि लो ग्रेविटी (कम गुरुत्व) से हड्डियां कमजोर होती हैं, रेडिएशन (किरणें) से कैंसर का खतरा है, और लंबे समय तक बंद जगह में रहने से मानसिक तनाव हो सकता है। NASA इन समस्याओं पर रिसर्च कर रहा है, जैसे ISS (स्पेस स्टेशन) और सिमुलेशन मिशन के जरिए। (Photo Source: Pexels) -
दूसरे ग्रहों का खतरनाक माहौल
हमारे सौरमंडल के ज्यादातर ग्रह इंसानों के लिए रहने लायक नहीं हैं। Venus इतना गर्म है कि इंसान जल जाएगा, Jupiter, Saturn जैसे ग्रह गैस से बने हैं, ठोस जमीन ही नहीं, और Pluto पर तापमान -240°C तक गिर जाता है। हालांकि, मंगल ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां कुछ हद तक इंसान के रहने की संभावना मानी जाती है। (Photo Source: Pexels) -
मंगल पर उतरना और रहना भी आसान नहीं
मगर, मंगल पर पहुंचना ही नहीं, वहां सुरक्षित उतरना और रहना भी बड़ी चुनौती है। वहां, पतला वायुमंडल होने के कारण लैंडिंग मुश्किल है। विशाल धूल भरी आंधियों के कारण सोलर पावर ठप कर सकती हैं। इसके अलावा वहां पहले से उपकरण भेजने होंगे ताकि इंसान सुरक्षित रह सके। (Photo Source: Pexels) -
सही समय का इंतजार
पृथ्वी और मंगल की कक्षाएं अलग-अलग हैं, इसलिए हर 26 महीने में ही जाने का सही मौका मिलता है। बेहतर अवसर तो लगभग 15 साल में एक बार आता है। (Photo Source: Pexels) -
पैसा और राजनीति भी बड़ी वजह
Apollo मिशन बेहद महंगा था। उसके बाद सरकारों का फोकस बदल गया। वे स्पेस शटल और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ध्यान देने लगे और गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) मिशन पर कम निवेश किया। (Photo Source: Pexels) -
क्या भविष्य में इंसान मंगल पर जाएगा?
NASA और SpaceX जैसी संस्थाएं 2030 के दशक में मानव मिशन मंगल पर भेजने की तैयारी कर रही हैं। माना जा रहा है कि 2033 के आसपास ऐसा संभव हो सकता है, अगर तकनीक, बजट और राजनीति साथ दें। (Photo Source: Pexels)
(यह भी पढ़ें: एक महीने में भारतीय सेना ने बेकार पुल को बना दिया टूरिस्ट स्पॉट, सोशल मीडिया सेंसेशन बना तवांग में खुला ‘बॉर्डर ब्रू कैफे’)