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आज जिन व्यंजनों को हम लग्जरी, स्ट्रीट फूड या कम्फर्ट फूड मानते हैं, उनकी शुरुआत भूख मिटाने या जिंदा रहने की जद्दोजहद से हुई थी। खाने का इतिहास बताता है कि ज्यादातर मशहूर डिशेज स्वाद के लिए नहीं, मजबूरी के लिए बनाई गई थीं। (Photo Source: Pexels)
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रेफ्रिजरेटर से पहले की दुनिया में खाना खराब होने से बचाना, पेट भरना और अगली सुबह तक जिंदा रहना- यही असली चुनौती थी। ऐसे में जो उपाय निकले, वही आज दुनिया के सबसे पसंदीदा फूड बन गए। (Photo Source: Pexels)
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चॉकलेट
आज चॉकलेट खुशी, प्यार और मिठास की पहचान है। लेकिन कभी यह एक पूरी सभ्यता की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करती थी। एजटेक और मायन सभ्यताओं में कोको बीन्स को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ये सोने से भी ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती थीं- हल्की, टिकाऊ और आसानी से ले जाई जा सकने वाली। (Photo Source: Pexels) -
16वीं सदी के मेसोअमेरिका में 1 कोको बीन्स में टमाटर खरीदा जा सकता था, और 100 बीन्स में एक टर्की मिल जाती थी। लोग चॉकलेट खाते नहीं थे, बल्कि उससे टैक्स चुकाते और कारोबार चलाते थे। (Photo Source: Pexels)
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पिज्जा
आज का लग्जरी पिज्जा कभी गरीब मजदूरों का सस्ता नाश्ता हुआ करता था। 18वीं सदी के नेपल्स में पिज्जा सिर्फ एक सपाट रोटी थी, जिस पर जो मिल जाए- लहसुन, नमक, लार्ड या टमाटर डाल दिया जाता था। (Photo Source: Pexels) -
अमीर वर्ग इसे ‘घटिया खाना’ मानता था, जब तक कि 1889 में क्वीन मार्घेरिटा ने इसे चख नहीं लिया। एक शाही स्वाद ने स्ट्रीट फूड को ग्लोबल आइकन बना दिया। (Photo Source: Pexels)
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सैंडविच
सैंडविच का जन्म किसी शेफ की रसोई में नहीं, बल्कि जुए की मेज पर हुआ था। आप शायद नहीं जानते होंगे कि सैंडविच का नाम पड़ा जॉन मोंटैग्यू, चौथे अर्ल ऑफ सैंडविच के नाम पर पड़ा है। 18वीं सदी में वह एक जुनूनी जुआरी थे और चाहते थे कि खाने के लिए कार्ड टेबल छोड़नी न पड़े। (Photo Source: Pexels) -
इसलिए उन्होंने इसका समाधान निकाला। उन्होंने ब्रेड के दो टुकड़ों के बीच मांस रख दिया, ताकि हाथ गंदे न हों और खेल चलता रहे। इस तरह से दुनिया को सबसे आसान भोजन मिल गया। आज करोड़ों लोग जिस सैंडविच को खाते हैं, वह असल में एक जुआरी की सुविधा का नतीजा है। (Photo Source: Pexels)
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फ्रेंच फ्राइज
नाम भले ही फ्रेंच फ्राइज हो, लेकिन इनकी कहानी बेल्जियम से जुड़ी है। 1600 के दशक में सर्दियों में नदियां जम जाती थीं और गरीब परिवारों को मछली मिलना बंद हो जाता था। (Photo Source: Pexels) -
इसके बाद तब उन्होंने आलू को मछली की तरह पतली स्ट्रिप्स में काटकर तलना शुरू किया। पहले विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने यह डिश चखी। अमेरिकी सैनिकों ने फ्रेंच भाषा बोलने वाले बेल्जियन लोगों को देखकर इन्हें ‘फ्रेंच फ्राइज’ कहना शुरू कर दिया। (Photo Source: Pexels)
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सुशी
आज सुशी को लग्जरी जापानी फूड माना जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत मछली को खराब होने से बचाने के लिए हुई थी। प्राचीन दक्षिण-पूर्व एशिया और जापान में मछली को नमक लगाकर चावल में महीनों तक फर्मेंट किया जाता था ताकि वह खराब न हो। (Photo Source: Pexels) -
दिलचस्प बात यह है कि उस समय चावल फेंक दिया जाता था, सिर्फ संरक्षित मछली खाई जाती थी। जिस सुशी को आज आर्ट समझा जाता है, वह कभी फूड प्रिजर्वेशन की मजबूरी थी। (Photo Source: Pexels)
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